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सरकार सिर्फ उपदेश न दे, यह भी बताए कि स्वास्थ्य बजट में कटौती क्यों की थी? : माकपा

The government should not only preach but also explain why the health budget was cut. : CPI (M)

भोपाल, 20 अप्रैल 2021. कोरोना की भयावह स्थिति में जब लगातार आक्सीजन की कमी के कारण प्रदेश भर में मरीज अपनी जान से हाथ धो रहे हैं, तब प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार सिर्फ नागरिकों को कोरोना कर्फ्यू के उपदेश ही न दे, बल्कि यह भी बताएं कि उसने स्वास्थ्य के बजट में कटौती क्यों थी और प्रस्तावित बजट भी खर्च न कर स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी और विस्तार क्यों नहीं किया है?

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि 2020-21 के बजट में स्वास्थ्य विभाग के लिए 7557 करोड़ का प्रावधान किया गया था। पिछले साल कोरोना की लहर से सबक सीखते हुए बजट को बढ़ाने की बजाय भाजपा की शिवराज सरकार ने इसे घटा कर 6799 करोड़ कर डाला और इसे भी पूरा खर्च नही किया है। साल भर में राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग पर केवल 4709 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं।

माकपा नेता ने कहा है कि इस 4709 करोड़ की राशि की तुलना यदि पूर्व की कमलनाथ सरकार से करें, तो उसने 2019-20 के बजट में 6817 करोड़ का प्रावधान किया था। इस तरह भाजपा सरकार ने कोरोना की महामारी के बावजूद पिछले साल की तुलना में 2108 करोड़ की अपराधिक कटौती की है। इसी कटौती का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

जसविंदर सिंह ने कहा है कि अपने प्रियजनों के लिए रोते बिलखते परिजन और श्मशान और कब्रिस्तान पर अंतिम संस्कार की लंबी कतारें सरकार की इसी लापरवाही का परिणाम है। इस डरावने दृश्यों और जान से हाथ धोते मरीजों की मौत की जिम्मेदारी से भाजपा सरकार कैसे बच सकती है?

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि भाजपा सरकार ने केवल स्वास्थ्य बजट ही नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के बजट में भी कटौती कर चिकित्सा शिक्षा के प्रसार में अवरोध खड़े किए र्हैं। पिछले साल चिकित्सा शिक्षा के लिए बजट में 2299 करोड़ का प्रावधान था, इसे भी घटाकर 2251 करोड़ कर दिया गया और इसमें से केवल 1409 करोड़ ही व्यय किया गया। यह 2019-20 वर्ष के बजट की तुलना में 681 करोड़ कम है, क्योंकि कमलनाथ सरकार ने 2090 करोड़ खर्च किए थे।

जसविंदर सिंह ने कहा है कि कोरोना का संकट मानवता पर संकट है। इस समय सबको एकजुट होने की जरूरत है, मगर भाजपा सत्ताधारी पार्टी के नाते और शिवराज सिंह चौहान सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकती और उन्हें इन प्रश्नों का उत्तर देना ही होगा।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मांग की है कि इस स्थिति से निबटने के लिए तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाई जाये, जिससे इस संकट से निबटने के चौतरफा पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जा सके।

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