लखनऊ हिंसा का सीसीटीवी फुटेज जारी करे सरकार : स्वराज अभियान

हिंसा की हो न्यायिक जांच

दारापुरी की गिरफ़्तारी की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराएं डीजीपी

लखनऊ, 27 सितंबर, 2019 : प्रदेश के कई स्थानों में हुई हिंसा की विडिओ फुटेज और फोटो जारी करने वाली योगी सरकार को 19 दिसम्बर को लखनऊ में हुई हिंसा और आगजनी की घटना की विडिओ फुटेज भी जारी करनी चाहिए। यह इसीलिए भी जरूरी है क्योंकि सदफ जफ़र की फेसबुक लाइव (Sadaf Jafar’s Facebook Live) पर चला विडिओ यह दिखा रहा है कि लखनऊ में 19 दिसम्बर को हुई हिंसा व आगजनी के वक्त पुलिस मूकदर्शक बनी हुई थी और उसने दंगाइयों व अराजक तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

यह बयान स्वराज अभियान नेता दिनकर कपूर ने प्रेस को जारी किया। उन्होंने ने सरकार से यह भी मांग की कि पूरे प्रदेश में हुई हिंसा की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित आयोग से न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज डीजीपी ने कहा है कि यदि किसी निर्दोष की गिरफ़्तारी की शिकायत उन्हें या सरकार को प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और उसे रिहा किया जाएगा। इस संबंध में लोकप्रिय अम्बेडकरवादी मूल्यों के नेता व मजदूर किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व आई जी एसआर दारापुरी की राजनीतिक बदले की भावना से की गई गिरफ़्तारी पर जन सुनवाई पोर्टल पर 24 दिसम्बर को ही स्वराज अभियान की तरफ से शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें कहा गया है कि सरकार की जन विरोधी, लोकतंत्र विरोधी कार्रवाहियों के आलोचक रहे दारापुरी जी सरकार की आँख की किरकीरी बने हुए थे। एक अनुशासित, जिम्मेदार नागरिक के ऊपर पुलिस का फोन द्वारा लोगों को भड़काने का आरोप हास्यास्पद है। जबकि दारापुरी जी 19 दिसम्बर को घर में पुलिस अभिरक्षा में थे और वह इस दिन आयोजित मार्च में संलिप्त भी नहीं थे। वह कभी भी जन समूह की अराजक भीड़ कार्रवाहियों का समर्थन नहीं करते थे और आंदोलन के मामले में डॉ आंबेडकर के सच्चे अनुयायी थे। यही वजह है कि 19 दिसम्बर की अर्ध रात्रि में वह अपने फेसबुक से हिंसा व आगजनी न करने व शांतिपूर्ण आंदोलन करने की अपील कर रहे थे। शिकायत में निर्दोष दारापुरी की रिहाई की सरकार से मांग की गई थी इसीलिए पुलिस महानिदेशक को निर्दोष दारापुरी जी को तत्काल रिहा करना चाहिए।

इस संबंध में आज डीजीपी उत्तर प्रदेश को शिकायत का व्हाट्सप्प मैसेज भेज कर दारापुरी जी को रिहा करने की पुनः मांग की गई।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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