महान कवि लिखते तो गांव पर हैं और अपने गांव भी नहीं जा पाते

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

विष्णु नागर (vishnu nagar) जी बड़े कवि तो हैं ही, बड़े पत्रकार भी हैं। उन्हें हिंदुस्तान में काम करते हुए देखने का अनुभव अद्भुत है। ऐसे संकट काल में कवित्व से ज्यादा उनकी पत्रकारिता की जरूरत है।

जन्मदिन पर विष्णु नागर को बधाई।

बाकी महान कविगण बंगाल की भुखमरी (Starvation of Bengal,) के दौरान सोमनाथ होड़ और चित्तोप्रसाद जैसे महान चित्रकारों की तरह थोड़ी पत्रकारिता भी कर लें तो जनता को बहुत बड़ा सहारा मिलेगा।

यह निवेदन उन कवियों के लिए नहीं है जो लिखते तो गांव पर हैं और अपने गांव भी नहीं जा पाते।

उन महान कवियों के लिए नहीं है जो कविता और साहित्य की आलोचना और पाठ के लिए संवेदना नहीं, दृष्टि नहीं, विद्वता जरूरी मानते हैं।

उन कवियों के लिए भी यह निवेदन नहीं है जो देश-विदेश में छपी कविता शेयर करते हुए कविता के सौंदर्यबोध पर अकादमिक चर्चा वर्तमान यथार्थ और आम जनता की तकलीफ से जरूरी मानते हैं।

ऐसे महान कवियों के खुरों को दूर से ही प्रणाम।

पलाश विश्वास

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