ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के चुनाव : जस्टिस मार्कंडेय काटजू की भविष्यवाणी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी

सांप्रदायिकता हमेशा हैदराबाद में मौजूद थी, लेकिन इस GHMC चुनाव ने इसे एक नए स्तर पर बढ़ा दिया है.... दिलचस्प समय आगे है, 'भगवाकरण' पूरी गति से आगे बढ़ रहा है।

Greater Hyderabad Municipal Corporation elections: Justice Markandey Katju predicts BJP will emerge as the largest party

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के चुनाव 1 दिसंबर को होंगे, और मेरी भविष्यवाणी यह है कि वर्तमान में केवल 150 में से 4 सीटें रखने वाली भाजपा इन चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। हालांकि यह केवल एक नगरपालिका चुनाव है, भाजपा के कई दिग्गज और सितारे, अमित शाह, नड्डा, स्मृति ईरानी, योगी आदित्यनाथ, फड़नवीस, तेजस्वी सूर्या , आदि को प्रचार अभियान में लगाया गया है, और लगभग एक राष्ट्रीय चुनाव बना दिया है।

भारतीय संविधान भारत को एक धर्मनिरपेक्ष देश घोषित करता है, लेकिन जमीनी हकीकत बहुत अलग है।

धर्मनिरपेक्षता औद्योगिक समाज की एक विशेषता है, लेकिन भारत अभी भी अर्ध-सामंती है। अधिकांश हिंदू, जो देश की आबादी का लगभग 80% और अधिकांश मुस्लिम जो लगभग 15-16% दोनों ही सांप्रदायिक हैं।

2014 में केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने से पहले भी भारत में सांप्रदायिकता व्यापक रूप से फैली हुई थी, लेकिन कुछ हद तक इसे कांग्रेस और अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों द्वारा काबू में रखा गया था, इसलिए नहीं कि उन्हें मुसलमानों के लिए वास्तविक सहानुभूति थी, बल्कि इसलिए कि इन दलों की नज़र मुस्लिम वोट बैंक पर थी। इसलिए 2014 से पहले हालांकि सांप्रदायिकता हमेशा मौजूद थी, यह आमतौर पर अव्यक्त था, और सांप्रदायिक घटनाएं केवल छिटपुट थीं।

2014 के बाद हमारे समाज में व्यापक रूप से ध्रुवीकरण हुआ है, और सांप्रदायिकता और ज़्यादा खुली, विषैली और अविरल हो गई है।

ग्रेटर हैदराबाद में होगा पश्चिम बंगाल जैसा मंजर

एक उदाहरण है – पश्चिम बंगाल में जो कुछ हुआ। यह राज्य लम्बे समय तक धर्मनिरपेक्षता का गढ़ रहा, लेकिन अब वहां ध्रुवीकरण हो गया है, भाजपा जो पहले लगभग गैर मौजूद थी, आज राज्य में वह गहरे सेंध बना रही है। ग्रेटर हैदराबाद में भी कुछ ऐसा ही होने की संभावना है।

GHMC में 4 जिले शामिल हैं, और इसके क्षेत्र में 4 सांसद और 24 MLA सीटें हैं। इसमें लगभग 18 लाख (1.8 मिलियन) मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 4 लाख मुस्लिम हैं, जो ज्यादातर पुराने हैदराबाद शहर में हैं, जो AIMIM नेता ओवैसी का गढ़ है। मुसलमान ज्यादातर AIMIM को वोट देंगे, लेकिन बाकी 14 लाख लोगों का क्या जो ज्यादातर हिंदू हैं?

GHMC में 150 सीटें हैं, जिनमें से 2016 के चुनावों में KCR की TRS को 99,  AIMIM को 44, भाजपा को 4 और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। इसलिए ऐसा लगता है कि ज्यादातर हिंदुओं ने TRS को वोट दिया। लेकिन तब से स्थिति बदल गई है।

2018 के तेलंगाना राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा को 119 सीटों में से केवल 1 मिली 7% वोट के साथ I लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को राज्य में 19% मतों के साथ तेलंगाना में 17 लोकसभा सीटों में से 4 मिले। इस प्रकार, केवल एक वर्ष में  भाजपा समर्थकों में बहुत बढ़ोत्तरी हुई है, और ऐसा लगता है कि कई TRS हिंदू समर्थक भाजपा में चले गए हैं।

Communalism was always present in Hyderabad, but

सांप्रदायिकता हमेशा हैदराबाद में मौजूद थी, लेकिन इस GHMC  चुनाव ने इसे एक नए स्तर पर बढ़ा दिया है, भाजपा के प्रचारकों ने ओवैसी को एक और जिन्ना कहा और भड़काऊ भाषण देते हुए ‘इन पाकिस्तानियों और गंदे रोहिंग्याओं को बाहर निकालने’ का आह्वान किया। साथ ही, बिहार चुनाव में AIMIM के 5 उम्मीदवारों की जीत ने समाज में और अधिक ध्रुवीकृत कर दिया है।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव अगले साल मई में होने वाले हैं, इसलिए भाजपा ने आने वाले समय के लिए GHMC चुनाव को परीक्षण ( crucible ) के रूप में इस्तेमाल किया है, और कहीं भी किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

दिलचस्प समय आगे है, ‘भगवाकरण’ पूरी गति से आगे बढ़ रहा है।

जस्टिस मार्कंडेय काटजू,

पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया

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उपाध्याय अमलेन्दु:

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