कोरोना का कहर : देश में यह दुस्समय शोक और अस्पृश्यता का सामाजिक यथार्थ बन गया है

सबसे पहले यह इंटरव्यू करना था। लेकिन हमारी भाभीजी बरेली बेटी के यहां से आकर क्वारंटाइन हो गई 14 दिनों के लिए। हालात बेहद खराब हैं। कोरोना का कहर (Havoc of corona) थम नहीं रहा। उत्तराखण्ड में अपने भी जान बेमौत गंवाने लगे हैं। सुबह ही शंकर चक्रवर्ती का फोन आया। कोरोना की वजह से … कोरोना का कहर : देश में यह दुस्समय शोक और अस्पृश्यता का सामाजिक यथार्थ बन गया है को पढ़ना जारी रखें