दिल यह सोचकर फेल हो सकता है कि ‘मैं कोविड-19 से मर सकता हूं‘

दिल यह सोचकर फेल हो सकता है कि ‘मैं कोविड-19 से मर सकता हूं‘

Heart can fail thinking ‘I may die of COVID-19’

नई दिल्ली/जम्मू 7 जनवरी, 2022: जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष प्रो. भीम सिंह ने आज विश्व सरकारों से कोविड-19 महामारी के बारे में डराने-धमकाने से रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि डर सबसे बड़ा हत्यारा हो सकता है, इसलिए सभी दिशाओं से भय फैलाना तुरंत बंद कर देना चाहिए।

प्रो. भीम सिंह ने कहा कि 1918 में ‘स्पैनिश फ्लू‘ जिसे ग्रेट इन्फ्लुएंजा के रूप में भी जाना जाता है ने वैश्विक आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा मिटा दिया, अनुमानित 500 मिलियन लोग मारे गए। उस महामारी की लगातार चार लहरें थीं। उस महामारी में पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक युवाओं की मृत्यु हुई है।

उन्होंने  कहा कि जब से कोविड-19 महामारी ने तबाही मचाई है, मृत्यु के आंकड़े आज के आधार पर बढ़ रहे हैं। भारत सरकार ने 35,226,386 संक्रमित और मृत्यु के आंकड़े 4,83,178 घोषित किए हैं। ये आंकड़े 24 मार्च, 2020 को लॉकडाउन घोषित होने के बाद के हैं। यह जानना दिलचस्प होगा कि कितने लोगों की मौत हुई है, क्योंकि लॉकडाउन के बाद उनके पास खुद को चलाने का कोई साधन नहीं है, क्योंकि उनकी नौकरी चली गई है।

भारत ‘आजादी का अमृत महोत्सव‘ मना रहा है। डर अपने चरम पर है। भारत में और भी कई चीजें हो रही हैं लेकिन सरकार के बयान केवल कोविड-19 से हुई मौत के आंकड़ों से भरे हुए हैं। भारत के लोग भूख से मर रहे हैं, जो उचित आश्रय के बिना खराब मौसम के कारण मर रहे हैं। वे अन्य संक्रामक रोगों व दुर्घटनाओं आदि जैसे कई अन्य कारणों से भी मर रहे हैं। उन मौतों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि मनोविकृति के डर को रोकने और कोविड-19 का उचित इलाज खोजने के लिए भारत सरकार काम करे।

उन्होंने कहा कि डर सबसे खराब बीमारी है जो बिना बीमार हुए किसी की जान ले सकती है। दिल यह सोचकर भी फेल हो सकता है कि ‘मैं कोविड-19 से मर सकता हूं‘। इसलिए सभी प्रचारों को तुरंत कम किया जाना चाहिए। मीडिया को इच्छुक पार्टियों द्वारा दिए गए आंकड़ों का शिकार नहीं बनना चाहिए तथा 24 घंटे केवल कोविड-19 महामारी के बारे में बात करने में नहीं लगाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोगों को कोविड-19 के बारे में अधिक जानकारी दिए बिना अकेला छोड़ दिया जाना चाहिए। प्रचार-प्रसार की सूचनाओं पर तत्काल रोक लगनी चाहिए ताकि जीवन में विश्वास व आस्था स्थापित हो सके। डॉक्टरों को सही और आवश्यक दवाओं लिखने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए, न कि वे जो उस क्षेत्र में व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा प्रचारित की जाती हैं। यह जीवन में देश के विश्वास को बहाल करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार, मीडिया, संगठनों और अस्पतालों द्वारा एकता दिखाई जाएगी ताकि इस महामारी का सामना करने के लिए एक निडर भारत स्थापना हो सके।

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