मुख्यमंत्री बनते ही हेमंत का ऐलान : आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस होंगे

Hemant Soren

सीएनटी, एसपीटी एक्ट में संशोधन का विरोध और पत्थगड़ी समर्थकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस होंगे : मुख्यमंत्री बनते ही हेमंत का ऐलान

रांची से विशद कुमार

हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनते ही पिछली रघुवर सरकार में किए गए सीएनटी, एसपीटी एक्ट में संशोधन का विरोध करने वालों और पत्थगड़ी का समर्थन करने वालों के खिलाफ जो मुकदमे दर्ज हुए थे, उसे वापस लेने घोषणा से झारखंडी जनता के पक्ष में यह पहला कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि राज्य में पुलिसिया जुल्म के शिकार लोगों को न्याय मिल पात है या नहीं। जिसमें ढोलकट्टा का डोली मजदूर मोतीलाल बास्के की पुलिस द्वारा की गई हत्या भी शामिल है।

मोतीलाल बास्के के परिजनों को इंसाफ दिलाने के लिए आंदोलनों में खुद हेमंत सोरेन और शिबू सोरेन शामिल हुए थे।

यूपीए गठबंधन के नेता हेमंत सोरेन 29 दिसंबर को दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने पद संभालने के तीन घंटे के अंदर ही अपनी पहली कैबिनेट की बैठक की। बैठक में सीएनटी, एसपीटी एक्ट में संशोधन का विरोध करने और पत्थलगड़ी करने वालों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस लेने का फैसला लिया गया। कैबिनेट ने उक्त दोनों मामलों में दर्ज प्राथमिकी वापस लेते हुए आवश्यक कार्यवाही का निर्देश दिया।

राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने श्री सोरेन को पद व गोपनीयता की शपथ दिलायी। अवसर पर कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और राजद के इकलौते विधायक सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

आलमगीर आलम और पूर्व आइपीएएस अधिकारी रामेश्वर उरांव पहली बार राज्य सरकार में मंत्री बने हैं। आलमगीर आलम कोड़ा सरकार में विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं।

इसके अलावा कैबिनेट ने महिला उत्पीड़न और यौन शोषण के मामलों की सुनवाई के लिए हर जिले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला लिया गया। इसके लिए जिलों में न्यायिक पदाधिकारियों का पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश दिया गया।

कैबिनेट ने सरकार के सभी विभागों की रिक्तियां जल्द से जल्द भरने का निर्देश दिया। इसके लिए नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू करने को कहा गया। कैबिनेट ने सभी उपायुक्तों को प्रखंड स्तर पर शिविर लगा कर संविदा पर काम करनेवालों का बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया। संविदा पर कार्यरत आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं, पारा शिक्षकों, अन्य शिक्षकों, पेंशनधारियों व छात्रवृत्ति का बकाया भुगतान जल्द से जल्द करने का निर्देश दिया गया। कैबिनेट ने सभी जिलों में गरीबों को कंबल व ऊनी टोपी बांटने और सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था करने को भी कहा गया।

कैबिनेट ने झारखंड सरकार का प्रतीक चिह्न (लोगो) बदलने का निर्णय लिया। तय किया गया कि राज्य सरकार का नया प्रतीक चिह्न झारखंड की परंपरा, इतिहास व संस्कृति के अनुरूप तैयार किया जायेगा। अंत में कैबिनेट ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग को धन्यवाद दिया।

कैबिनेट की बैठक में स्टीफन मरांडी को प्रोटेम स्पीकर बनाने का फैसला लिया गया।

नवनिर्वाचित सरकार का पहला विधानसभा सत्र छह से आठ जनवरी तक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने सदन की कार्यवाही पर सहमति प्रदान करते हुए छह जनवरी को निर्वाचित विधायकों का शपथ और शोक (यदि हो तो) की कार्यवाही की घोषणा की।

सात जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष का निर्वाचन और राज्यपाल का अभिभाषण होगा। इसी दिन 2019-20 का द्वितीय अनुपूरक बजट पेश किया जायेगा। आठ जनवरी को राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद व धन्यवाद की कार्यवाही होगी। उसके बाद अनुपूरक बजट पर भी वाद-विवाद होगा।

हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह (Swearing-in ceremony of Hemant Soren) में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता रघुवर दास, डीएमके के अध्यक्ष एमके स्टालिन व कनिमोझी असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, बिहार के प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, मध्य प्रदेश के मंत्री उमंग सिघार, कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह, झाविमो नेता बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, भाकपा के महासचिव नेता डी राजा, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, अतुल कुमार अंजान सहित देश भर से कई दिग्गज नेता शामिल रहे।

हेमंत के मुख्यमंत्री बनते ही पिछली रघुवर सरकार में किए गए सीएनटी, एसपीटी एक्ट में संशोधन का विरोध करने वालों और पत्थगड़ी का समर्थन करने वालों के खिलाफ जो मुकदमे दर्ज हुए थे, उसे वापस लेने घोषणा से झारखंडी जनता के पक्ष में यह पहला कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि राज्य में पुलिसिया जुल्म के शिकार लोगों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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