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Dep Siddhu

भारतीय किसानों के महान संघर्ष के ख़िलाफ़ हिन्दुत्ववादी साज़िश विफल! डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1948 में ही पहचान लिया था संघियों का षड़यंत्रकारी चरित्र

Hindutva conspiracy against the great struggle of Indian farmers failed!

महान किसान आंदोलन (Peasant movement) को नुक़सान पहुँचाने वाला हिंदुत्व साज़िश का मुख्य चेहरा, दीप सिद्धू अपने असली आक़ाओं के साथ! यह वही मुजरिम है जिस ने ऐतिहासिक ट्रेक्टर रैली और किसानों के एकता को विफल करने के उद्देश्य से लाल क़िले पर एक धर्म का झंडा टांगा और देश के गृह मंत्री, अमित शाह, जो आरएसएस के एक वरिष्ठ स्वयंसेवक हैं और जिन्हें आरएसएस ‘लोह-पुरुष’ बताती है, के अधीन दिल्ली पुलिस तमाशा देखती रही।  

दीप सिद्धू ने यह करतूत इसलिए की ताकि किसानों की बीच धार्मिक एकता को छिन-भिन्न कर दिया जाए जिस की कोशिश आरएसएस-भाजपा शासक लगातार कर रहे थे। 

आरएसएस के दर्शन और इस की षड्यंत्रकारी कार्यपद्धती के एक शोध-कर्ता के तौर पर इस लेखक को लगा की महान किसान आंदोलन की ट्रक्टर रैली के ख़िलाफ़ भी साज़िश रची जा सकती है। ऐसी सम्भावना के बारे में किसान आंदोलन के नेतृत्व को सचेत करते हुए लेखक ने निम्नलिखित नोट सोशल मीडिया पर 26 तारीख को सुबह लगाया : 

“किसान आंदोलन का देश के 72वें गणतंत्र दिवस पर बेमिसाल ट्रेक्टर रैली द्वारा जश्न ज़िंदाबाद!

आरएसएस और उस के गुर्गों की हर साज़िश को नाकाम करने के लिए 200% सजग रहें!!

आज 26 जनवरी 2021 का दिन केवल हमारे देश का 72वां गणतंत्र दिवस ही नहीं है बल्कि एक ऐसा दिन भी है जो हमारी प्रजातान्त्रिक-धर्मनिरपेक्ष वव्यवस्था का भविष्य भी सुनिश्चित करेगा। अगर यह ऐतिहासिक जश्न सफलतापूर्वक होने दिया जाता है तो यह तय हो जायगा कि आरएसएस-भाजपा शासकों का राष्ट्र-समाज विरोधी हिंदुत्व मंसूबा जिस के तहत वे भारत की जनता का पूरी तरह निर्धनीकरण करके अमीरों में से भी अमीर अम्बानी और अडानी जैसे घरानों (मोदी सरकार के हिन्दुत्वादी मंसूबे के सब से बड़े फाइनेंसरों में से दो) को और अमीर बनाना है, पर अंकुश लग सकेगा । 

लेकिन एक बहुत बड़ा और संगीन सवाल यह है कि क्या देश के शासक जो सब ही आरएसएस से जुड़े हैं, इस जश्न को सफल होने देंगे, जबकि इनका पूरा हिंदुत्व मंसूबा ही दाँव पर लगा हो?

यह टोली जिस संगठन से जुड़ी है वह साज़िशें रचने में अव्वल नंबर है, यह अपने स्वयंसेवकों को षड्यंत्र रचने में निपुण बनाती है और उन की रगों में यह परवर्ती दौड़ती रहती है। इन की इन शर्मनाक साज़िशों को हम सब ने गाँधी जी की हत्या 1948, बाबरी मस्जिद के विद्धवंस 1992, गुजरात क़त्ल–ए-आम 2002, दिल्ली हिंसा 2020, (सैंकड़ों मिसालों में से कुछ) में कामयाब होते देखा है।   

आरएसएस से जुड़े लोगों के इस अति-पापी चरित्र की जानकारी किसी और से नहीं बल्कि डा. राजेन्द्र प्रसाद (जो बाद में भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने) के निम्नलिखित पत्र से मिल सकती है, जो उन्होंने देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल को 14 मार्च सन् 1948 को लिखा थाः

“मुझे बताया गया है कि आरएसएस के लोगों ने झगड़ा पैदा करने के लिए मंसूबा बनाया है, उन्होंने बहुत सारे लोगों को मुसलमान पहनावा पहनाकर, मुसलमान जैसा दिखने वालों के रूप में हिन्दुओं पर आक्रमण करेंगे ताकि झगड़ा पैदा हो और हिन्दू भड़क जायं। इसी के साथ इनके साथ कुछ हिन्दू होंगे जो मुसलमानों पर हमला करेंगे ताकि मुसलमान भड़क जाएं। इस सबका परिणाम यह होगा कि हिन्दू-मुसलमान भिडेंगे और एक बड़ा झगड़ा पैदा हो जायेगा।”

इस महान किसान आंदोलन के रहनुमाओं और संघर्ष में जुटे किसानों से यह निवेदन है कि उन्हें गणतंत्र को बचाने के इस जश्न को हिन्दुत्ववादी टोली द्वारा किसी भी तरह की साज़िश जो सरकार और उस के बाहर इस के गुर्गो रच सकते हैं, उस के बारे 200% सजग रहना होगा!”

इस देश के लूट के शिकार आम किसान और उनका नेतृत्व जो दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हैं, सच-मुच में बधाई के पात्र हैं जिन्होंने हिन्दुत्ववादी शासकों के इस खौफ़नाक हमले का अपनी एकता क़ायम रखते हुए मुँह-तोड़ जवाब दिया और मोदी सरकार के गुर्गों की साज़िश को विफल कर दिखाया।

देश के खेतों और उपज को अम्बानी-अडानी जैसे खरब-पतियों के हवाले करने के ख़िलाफ़ चल रहा महान किसान आंदोलन ज़िंदाबाद!

हिंदुत्व फ़ासीवादी गुर्गों का नाश हो!!

इंक़लाब ज़िंदाबाद!!

शम्सुल इस्लाम

January 27, 2021

{Dr. Shamsul Islam, Political Science professor at Delhi University (retired).}
{Dr. Shamsul Islam, Political Science professor at Delhi University (retired).}

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