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झारखंड में जारी है अर्द्धसैनिक बलों की गुंडागर्दी ! Hooliganism of paramilitary forces continues in Jharkhand

झारखंड में जारी है अर्द्धसैनिक बलों की गुंडागर्दी !

Hooliganism of paramilitary forces continues in Jharkhand!

झारखंड: गिरिडीह जिला के ढोलकट्टा गांव में सीआरपीएफ ने अंत्येष्टि में जुटे ग्रामीणों को पीटा

झारखंड में सरकार बदल गयी है, लेकिन अर्द्धसैनिक बलों (सीआरपीएफ) की गुंडागर्दी जारी है। सीआरपीएफ जब भाकपा (माओवादी) के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जंगलों में जाती है, तो वहाँ ग्रामीणों को भी बेवजह पीटने व गाली-गलौज करने से बाज नहीं आती है।

5 दिसंबर, 2020 को गिरिडीह जिला के पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन थानान्तर्गत पारसनाथ पहाड़ की तलहटी में बसे गांव ढोलकट्टा के 20 ग्रामीणों ने गिरिडीह के झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त आवेदन सौंपा है।

आवेदन में लिखा है कि “दक्षिणी पारसनाथ अन्तर्गत गांव-ढोलकट्टा, थाना-मधुबन, प्रखंड-पीरटांड़, जिला-गिरिडीह (झारखंड) के निवासी छुटू किस्कु की मृत्यु 23 नवंबर को अपने घर में मिरगी की बिमारी से हुई थी। इसी दिन 60-70 की संख्या में पुलिस व अर्द्धसैनिक बल गांव में आ धमके और मृत्य जन की अंत्येष्टि करने के लिए जुटे ग्रामीण जनता के साथ मारपीट करने लगे, वह भी बिना कुछ जायजा लिये या पूछताछ किये। इस तरह से हम ग्रामीणों पर जुल्म किया गया। गांव के किसुन बास्के को गाली-गलौज करते हुए थप्पड़ मारा गया।”

आवेदन में आगे लिखा है,

“12 अक्टूबर, 2020 को भी पुलिस ने गांव में आकर लोगों के साथ बदतमीजी की थी। 21 मई, 2003 को निर्दोष ग्रामीण जनता छोटेलाल किस्कू को नक्सली बताकर मुंह में गोली मारी गयी थी और छोटू किस्कू, सुरेश सोरेन सहित लगभग 70 वर्षीय मंगला किस्कू को मारा-पीटा गया था। इतना ही नहीं 2015 में भी रोला लकड़ी काटने के लिए जंगल गये 8 व्यक्तियों को पकड़कर गंभीर रूप से मार-पीट किया गया था, जिनका नाम निम्न है: मांजो मरांडी, बीरू हांसदा, चरण हांसदा, चारो हेम्ब्रम, जीतन हांसदा, चिनू मरांडी, एतवारी मुर्मू व छोटेलाल हांसदा। इसी तरह 9 जून, 2017 को पुलिस ने नक्सली बताकर मोती लाल बास्के (डोली मजदूर) के सीने पर 11 गोली उतार दी थी।”

मुख्यमंत्री को दिये गये आवेदन में ग्रामीणों ने लिखा है,

“2003 से लेकर अभी तक ढोलकट्टा के ग्रामीण जनता पर पुलिसिया जुल्म होते चला आ रहा है। अब ढोलकट्टा में पुलिस कैम्प स्थापित करने की कोशिश जारी है, वह भी ग्रामीण जनता की खतियानी व रैयती जमीन पर।”

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से मांग किया है कि

“ढोलकट्टा गांव में पुलिस कैम्प स्थापित ना किया जाय और हम गरीब आदिवासी जनता को पुलिस के दमन-अत्याचार से बचाया जाय।”

मुख्यमंत्री से मिलकर आवेदन देने वालों में शामिल ग्रामीण भगवान दास किस्कू ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि वहाँ पुलिस कैम्प नहीं लगेगा और जनता पर पुलिस का दमन-अत्याचार नहीं होगा।

9 जून, 2017 को सीआरपीएफ कोबरा की गोली से नक्सली बताकर मारे गये आदिवासी डोली मजदूर मोतीलाल बास्के भी ढोलकट्टा गांव के ही रहने वाले थे, इस मामले में नयी सरकार फिर से जांच भी करवा रही है। मुख्यमंत्री से आज मिलने वालों में मोतीलाल बास्के की पत्नी पार्वती मुर्मू भी शामिल थी। उन्हें भी मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि उन्हें जरूर न्याय मिलेगा।

मुख्यमंत्री के आश्वासन से इतर जाकर देखें तो झारखंड के पश्चिम सिंहभूम, खूंटी, गिरिडीह आदि जिले में अर्द्ध सैनिक बलों की जनता पर ज्यादती की घटनाएं लगातार देखने को मिल रही है, लेकिन इनपर कभी मुकदमा दर्ज नहीं होता है।

तो सवाल उठता है कि क्या ग्रामीण आदिवासियों के साथ मारपीट करने वाले अर्द्धसैनिक बलों पर मुकदमा भी दर्ज होगा या सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहेगा?

रूपेश कुमार सिंह

स्वतंत्र पत्रकार

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