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हिमालय कैसे बना? सूरज और चाँद और धरती अस्तित्व में कैसे आए?

हिमालय कैसे बना? सूरज और चाँद और धरती अस्तित्व में कैसे आए?

How did the sun and the moon and the earth come into existence?

Why are there sun and moon and earth in Hindi?

कोई नहीं जानता कि सूरज और चाँद और धरती क्यों हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि पृथ्वी इसलिए है ताकि हम उस पर रह सकें। वही लोग यह कहेंगे कि सूरज इसलिए है ताकि पौधे खुद के लिए और हम सबके लिए खाना उत्पन्न करने के लिए सूरज की रोशनी का इस्तेमाल कर सकें। और बिलकुल, यदि सूरज नहीं होगा तो (if there is no sun) दिन एवं रात नहीं होंगे और आपको यह पता नहीं चलेगा कि कब सोना है और कब उठना है। और चाँद इसलिए है ताकि आप उसके बारे में कविताएँ लिख सकें। ये लोग हमेशा यह सोचते हैं कि हर चीज का कोई-न-कोई उद्देश्य होता है। वे लोग कहेंगे कि आपके पास कान इसलिए हैं ताकि आप धूप का चश्मा पहन सकें। इसे ही कहते हैं कि अब तो हद ही हो गई! हालाँकि, जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे कान इसलिए नहीं होते ताकि हम धूप का चश्मा पहन सकें। हर चीज़ को किसी-न-किसी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल तो किया जा सकता है लेकिन आप यह नहीं कह सकतीं कि यह चीज़ इस उद्देश्य के लिए ही बनाई गई थी या कि यह चीज इस उद्देश्य के लिए अस्तित्व में है।

Panzia Kise Kehte Hain – पेंजिया किसे कहते हैं?

कोई चीज अस्तित्व में इसलिए भी रह सकती है क्योंकि उसे किसी और उद्देश्य के लिए बनाया गया था, या फिर किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं बनाया गया था। बहुत-सी चीजें किसी घटना का परिणाम होती हैं। उदाहरण के लिए, ऐसा कहा जाता है कि सारे महाद्वीप पहले एक ही थे। एक अकेला महाद्वीप जो लाखों साल पहले अस्तित्व में था उसका नाम पेंजिया (Pangaea) था। कुछ समय बाद पेंजिया टुकड़ों में बँट गया।

क्या यह सब संयोगवश हुआ था? और यह भी एक संयोग ही था कि पेंजिया के टुकड़े एक विशिष्ट आकार में हुए थे ?

दरअसल पेंजिया किन्हीं खास आकारों में नहीं टूटा था लेकिन आज हम सोचते हैं कि वह बहुत ही खास आकारों में विभाजित हुआ था। वह किन्हीं अन्य आकारों में भी टूट सकता था और हम तब भी यही बात कहते। जैसे यदि हम एक मिट्टी का खिलौना गिराएँगे तो वह कुछ आकार के टुकड़ों में टूट जाएगा। हालाँकि, यदि हम उसी खिलौने को फिर से गिराएँ तो वह बहुत अलग आकारों के टुकड़ों में टूट सकता है। आकारों के सन्दर्भ में ‘क्यों’ जैसा कुछ नहीं होता – वे ऐसे ही बनते/होते हैं।

अब यदि पेंजिया के टुकड़े द्रव पर तैर रहे हैं तो वे बहेंगे – मतलब, वे यहाँ-से-वहाँ जाएँगे। इसलिए धीरे-धीरे वे एक-दूसरे से दूर जा सकते थे। या वे एक-दूसरे से टकरा भी सकते थे। दोनों तरह की चीज़ें हुईं और जब दो टुकड़े टकराए तो उनमें से एक अन्दर चला गया जबकि दूसरा वाला ऊपर उठता चला गया, और इस तरह हिमालय बना। तो हिमालय का बनना एक संयोग था। हम पूछ सकते हैं कि हिमालय क्यों है (Why Himalaya?)। इसी तरह पृथ्वी, चाँद, सूरज और दूसरे सारे तारे अस्तित्व में आए थे। वैज्ञानिकों ने कई सिद्धान्त तैयार किए थे, यह समझाने के लिए कि ये सारी चीजें अस्तित्व में कैसे आईं लेकिन हम यह नहीं जानते कि इसका कोई उद्देश्य है या नहीं। बस इनका अस्तित्व है।

यदि कोई चीज ऊपर की तरफ फेंकी जाए तो वह धरती पर क्यों गिरती है?

जैसा कि ऊपर कहा है, बहुत-सी चीजें जो हम अपने चारों तरफ देखते हैं वे कुछ संयोगवश हुई घटनाओं की वजह से हैं। हालाँकि, ऐसी बहुत-सी चीजें हैं जो वैसी ही होती हैं जैसी उनको होना चाहिए क्योंकि प्रकृति के निश्चित नियम-कानून होते हैं जिस वजह से चीजें एक निश्चित तरीके से होती हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई चीज ऊपर की तरफ फेंकी जाए, वह अन्तत: धरती पर ही वापस आती है। इसलिए, ज़्यादातर चीजें धरती पर मिलती हैं, ऊपर हवा में नहीं।

वैज्ञानिकों का मुख्य काम क्या है?

वैज्ञानिकों का मुख्य काम प्रकृति के नियमों को समझना है। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी, चाँद, सूरज, सौरमण्डल, तारे, आकाशगंगाओं आदि के अस्तित्व के बारे में काफी विचार किया है। इन चीजो़ के बारे में उनकी कुछ समझ भी बनी है।

Notes : Pangaea or Pangea was a supercontinent that existed during the late Paleozoic and early Mesozoic eras. (Wikipedia)

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