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Face Masks and Surgical Masks for COVID-19

कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क कितने कारगर ?

How effective are masks to avoid coronavirus?

कोरोना वायरस का साइज 300 NM है मास्क 30-40 NM तक के वायरस को ही रोक पाने में सक्षम।

अधिक मास्क का उपयोग करने से शरीर में होगी ऑक्सीजन की कमी, जिसके हो सकते हैं घातक परिणाम।

सड़क किनारे बिकने वाले मास्क पुलिस से बचा सकते हैं कोरोना से नहीं।
कोरोना को अवसर मानकर लूट मचाने वाली कंपनियों के विरुद्ध क्यों नहीं हुई कार्रवाई ?

मास्क को लेकर आम लोगों के दिमाग में कई प्रश्न हैं ,क्या कोरोना वायरस को रोकने के लिए मास्क सक्षम है ? कोरोना वायरस का साइज और मास्क के द्वारा वायरस को रोकने की क्षमता को लेकर विशेषज्ञों का क्या कहना है। ऐसे ही बहुत सारे सवाल मास्क को लेकर लोगों के दिमाग में है। यदि कोरोना वायरस से सुरक्षित रखने में मास्क कारगर साबित हो रहे हैं तो कौन सा मास्क लोगों के लिए सबसे बेहतर हैं यह हर दूसरा व्यक्ति जानने का इच्छुक है।

कोरोना के पहली लहर में लोगों को मास्क के नाम पर कई मेडिकल किट बनाने वाली कंपनियों ने करोड़ों रुपये N-95 मास्क के नाम पर लोगों की जेब से उड़ा लिए। N-95 मास्क 200-1000 रुपए तक बिक रहे थे, कालाबाजारी तक हो रही थी।

कोरोना की पहली लहर में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लोगों को यह बताया जारहा था कि N-95 मास्क कोरोना से बचाव के लिए सबसे सुरक्षित है। जब लोगों ने बड़ी संख्या में N-95 मास्क की खरीदारी कर ली उसके कुछ दिनों के बाद कुछ दिनों के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सर्कुलर जारी कर यह बताया गया कि N-95 मास्क का उपयोग नहीं करें क्योंकि यह सुरक्षित नहीं है। तब तक देश भर में करोड़ों लोग कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए N-95 मास्क खरीद चुके थे। कोरोना को अवसर मान कर लूटने वाली कंपनियों के वारे न्यारे हो चुके थे। साथ ही असुरक्षित बताने के बावजूद N-95 मास्क का उत्पादन लगातार किया जा रहा है और लोग आज भी N-95 मास्क खरीद रहे हैं।

प्रश्न यह उठता है कि जब N-95 मास्क से हम कोरोना से सुरक्षित नहीं रह सकते, बल्कि कोरोना संक्रमण का अधिक खतरा बना रहता है तो फिर उन कंपनियों को N-95 मास्क बनाने की अनुमति कैसे प्रदान की गई ? यह अब भी मेडिकल स्टोर में कैसे उपलब्ध है ?

कोरोनाकाल मे 10 रुपये के मास्क को 200 रुपये में बेचने का यह खेल और इस खेल से लाभान्वित होने वाले चेहरों पर से किसी न्यूज़ चैनल ने कभी कोई खुलासा क्यों नहीं किया ? मीडिया ने लोगों को क्यों नहीं जागरूक किया कि N-95 मास्क जानलेवा है इसका उपयोग नहीं करें। कोरोना को अवसर मान कर लूट का बड़ा खेल खेला गया है, चाहे वह मास्क हो या फिर पीपीई किट। बाज़ार में उपलब्ध अधिकांश पीपीई किट ऐसे थे जिन्हें पहन कर कोरोना संक्रमण से नहीं बचा जा सकता। हवाई यात्रा करने वालों को जो पीपीई किट और मास्क दिये जा रहे थे और अब भी दिए जाते हैं वह भी सुरक्षित नहीं हैं। क्या लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी ?

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क बनाते समय उन सामग्रियों का इस्तेमाल होना चाहिए जो हवा के छोटे-से-छोटे कणों को रोकने में सक्षम हो और सांस को बाहर छोड़ने के लिए एक बेहतर वेंटिलेशन भी प्रदान करे।

ट्रिपल लेयर मास्क : Triple Layer Mask

संक्रमण से बचने के लिए यह मास्क कुछ हद तक ही कारगर है लेकिन इससे भी 30 से 40 प्रतिशत तक ही बचाव हो पाता है। तीन लेयर होने की वजह से यह संक्रमण को कुछ हद तक रोक पाता है। क्योंकि कोरोना वायरस का साइज 300 NM है जब्कि मास्क के रोकने की छमता 30 NM तक ही है। फिर ऐसे मास्क पहन कर हम कोरोना वायरस से कैसे सुरक्षित रह सकते हैं ?

मेडिकल साइंस कहता है कि जबतक किसी भी बात का 100 प्रतिशत परीक्षण से परिणाम नहीं मिलता हो तो आप उसका उपयोग नहीं कर सकते।

सिक्स लेयर मास्क : Six Layer Mask

विशेषज्ञों का कहना है यह संक्रमण से काफी हद तक बचाव करता है। इससे संक्रमण में लगभग 80 फीसदी बचाव हो सकता है परंतु बहुत अधिक संक्रमित क्षेत्र में यह भी अधिक कारगर नहीं है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार अब तक लगभग 500 से अधिक डॉक्टरों ने कोरोना संक्रमण से अपनी जान गंवाई है। वे सभी डॉक्टर सिक्स लेयर मास्क और पीपीई किट का भी उपयोग कर रहे थे।

डॉक्टर्स का कहना है कि बेवजह ही घबराने की ज़रुरत नहीं है, अधिक मास्क का उपयोग करने से भी शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। घर पर या ऐसी जगहों पर जहाँ आप भीड़ भाड़ से दूर हैं मास्क का उपयोग बिल्कुल नहीं करें, क्योंकि शरीर में ऑक्सीजन की कमी से अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं, विशेषकर हार्ट और  किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति यह प्रयास करें कि उन्हें मास्क के उपयोग की आवयश्कता ही नहीं पड़े।

मास्क पहनने के अलावा डॉक्टर्स ने लोगों को कुछ सावधानियां बरतने के लिए कहा है। जैसे – जब भी आप किसी वस्तु और व्यक्ति के संपर्क में आएं तो उसके तुरंत बाद हाथों को सैनिटाइज़र, साबुन या हैंड वॉश से धोएं। इसके अलावा जो व्यक्ति छींक या खांसी से ग्रसित हो, उसे दूरी बनाकर रखें।

अगर हाथ साफ नहीं है तो आंख और मुंह को छूने से बचें।

यदि आपने अनचाहे स्थानों और लोगों से हाथ मिलाया है या आप किसी तरह उनके संपर्क में आए हैं तो कोशिश करें कि अपने मुंह पर हाथ न लगाएं। यदि आप मुंह, आंख, कान, नाक आदि पर हाथ लगाएंगे और आपके हाथ में कीटाणु मौजूद हैं तो वो आपकी नाक द्वारा आपकी सांसों में चले जाएगा और मुश्किल खड़ी कर सकता है। इसलिए ध्यान रहे कि जब भी कहीं बाहर से लौटें तो फौरन किसी साबुन, हैंड वॉश और सैनिटाइज़र से हाथ धोएं।

मास्क को लेकर सरकार लोगों के बीच जागरूकता अभियान चला रही है। सड़कों पर कोरोना योद्धा के रूप में खड़े पुलिस के अधिकारी और जवान जो मास्क स्वयं पहन रहे हैं वह उन पुलिस वालों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित नहीं रख सकते। जानकारी के आभाव में जांच करते पुलिस कर्मियों द्वारा वाहन चालकों के इतना करीब जाकर चेकिंग के दौरान कागज़ात मांगे जाते हैं जो उन्हें संक्रमण की चपेट में ले रहे हैं।

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर आईआईटी दिल्ली की एक रिपोर्ट के अनुसार यह भयावह रूप धारण कर सकती है। तीसरी लहर के शिकार युवा पीढ़ी अधिक होगी यह भी रिपोर्ट में कहा गया है।

जब हम सरकार की तैयारियों की ओर नज़र डालते हैं तो यह पाते हैं कि सरकार जब मुसीबत दरवाजे पर होती है तब उसकी तैयारी की जाती है, समय रहते तैयारी कर इस से बचा जा सकता है।

वहीं दूसरी तरफ मास्क को लेकर सरकार द्वारा ही भ्रामक जानकारी अब तक दी जाती रही है, चाहे वह N-95 मास्क को लेकर शुरुआत में दी गयी जानकारी हो या फिर मास्क को लेकर आमजन को दी जाने वाली जानकारी है। मास्क पहन कर लोग इस खुशफहमी में रहे कि वे अब कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे हालांकि जो मास्क लोग पहन रहे थे वे उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तो घटा रहे थे परन्तु कोरोना वायरस के संक्रमण से रोक पाने में वह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं थे।

शाहनवाज हसन

( लेखक भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव हैं)

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