Best Glory Casino in Bangladesh and India!
जानिए कैसे जस्टिस काटजू ने रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों की आधुनिक व्याख्या की

जानिए कैसे जस्टिस काटजू ने रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों की आधुनिक व्याख्या की

रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों की आधुनिक व्याख्या

गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के किष्किन्धाकाण्ड की यह पंक्तियाँ मेरी पसंदीदा हैं।

इनकी मैंने निजी व्याख्या आज के भारत के सन्दर्भ में की है।

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना।।

पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।

कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं।।

राम काज लगि तब अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्वताकारा।।

कनक बरन तन तेज बिराजा। मानहु अपर गिरिन्ह कर राजा।।

सिंहनाद करि बारहिं बारा। लीलहीं नाषउँ जलनिधि खारा।।

सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी।।

जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही।।

एतना करहु तात तुम्ह जाई। सीतहि देखि कहहु सुधि आई।

इसका सन्दर्भ उस समय का है जब रामचन्द्रजी की सेना समुद्र तक पहुँच गयी और समुद्र पार करके किसी को सीताजी की खोज में लंका जाना थाI सब ने अपनी असमर्थता व्यक्त कीI बुद्धिमान रीछपति जाम्बवंतजी समझ गए कि यह काम केवल हनुमानजी कर सकते हैंI

उस समय हनुमानजी चुपचाप ध्यान में अकेले एक टीले पर बैठे थेI जाम्बवंतजी उनके पास जा कर बोले कि हनुमानजी यह क्या आप चुप चाप बैठे हैं ?

अर्थात् जब कर्म करने समय आता है देशभक्त को चुप नहीं बैठना चाहिएI

जाम्बवंतजी हनुमानजी को याद दिलाते हैं कि आप पवन के पुत्र हैं और आप में पवन जैसी शक्ति हैI जब आंधी तूफ़ान चलता है तब बड़े-बड़े पेड़ों को भी उखाड़ फेंकता हैI

इसके साथ हनुमानजी ज्ञानी और विवेकयुक्त भी हैं ( जैसा देशभक्त को होना चाहिए )I कोई ऐसा काम दुनिया का नहीं है जो वह नहीं कर सकते हैंI उनका अवतार रामचन्द्रजी की सेवा करने के लिए हुआ हैI

अर्थात् देशभक्तों का जन्म देश की सेवा करने के लिए होता है ( राम का यहां अर्थ भारत की जनता समझना चाहिए )I यह सुनते ही हनुमानजी का शरीर बड़ा होने लगा और पर्वत जितना बड़ा हो गया और वह सोने जैसे चमकने लगाI

अर्थात् देशभक्त जब देश की सेवा करने लगते हैं तो वह विख्यात और महान हो जाते हैंI

हनुमानजी शेर जैसे चिंघाडने लगे कि मैं समुद्र को पार कर जाऊँगा या उसे निगल जाऊँगाI

अर्थात् देशभक्त किसी विपत्ति से नहीं डरता हैI ]

परन्तु हनुमानजी में विनम्रता भी है घमंड नहीं। वह जाम्बवंतजी से कहते हैं कि हे जाम्बवंतजी मुझे अच्छी राय दीजिये कि मैं क्या करूँ ?

अर्थात् देश भक्त को कभी घमंड नहीं होना चाहिए और दूसरों से राय लेनी चाहिए।

तब जाम्बवंतजी बोले कि हे हनुमानजी आप इतना ही कीजिये कि लंका जाकर सीताजी का हाल मालूम करके आ जाइये।

अर्थात् इंसान को अपनी सीमा में रहना चाहिएI हनुमानजी आसानी से सीताजी को लंका से ला सकते थे पर यह काम श्रीराम का था। अर्थात् देशभक्त कितना ही बलवान क्यों न हो उसे अपने दायरे में रहना चाहिए और यह न समझना चाहिए कि वह कुछ भी कर सकता है।

जस्टिस मार्कंडेय काटजू

लेखक सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश हैं।

जस्टिस काटजू ने किसानों को हनुमान की शक्ति वाला क्यों बताया, उन्हीं से सुनिए

How Justice Katju gave modern interpretation of some lines of Ramcharitmanas

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner