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भाकपा की मांग आगामी जनगणना में जाति को शामिल किया जाये

भाजपा सरकार जाति आधारित गणना के सवाल पर मुंह चुरा रही है। पार्टी ने अपनी इस मांग को जोरदारी से दोहराया है कि आगामी जनगणना में जाति को शामिल किया जाये।

लखनऊ- 19 सितंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश की राज्य काउंसिल की दो दिवसीय बैठक कामरेड शशिबाला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में यहां संपन्न हुई। बैठक को पार्टी के केन्द्रीय सचिव कामरेड अतुल कुमार अनजान ने भी संबोधित किया। राज्य सचिव डा. गिरीश ने देश और प्रदेश के हालातों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस पर हुयी चर्चा में लगभग 50 साथियों ने भाग लिया जिनमें सहसचिव द्वय का. अरविन्द राज स्वरूप एवं इम्तेयाज अहमद भी शामिल हैं।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा किसान आंदोलन था। कहा गया कि अपने कारपोरेट दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए केन्द्र सरकार ने अवांच्छित तीन कृषि कानून किसानों के ऊपर थोप दिये हैं। किसान इसका प्रबल विरोध कर रहे हैं, मगर मगरूर सरकार हठवादी रवैय्या अपनाये हुये है। न तीनों काले कानूनों को रद्द कर रही है और न न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून ही बना रही है। विद्युत बिल 2021 को भी रद्द करने को तैयार नहीं है। हाल में घोषित रबी फसलों और गन्ने का समर्थन मूल्य भी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने वाला है। किसान मजदूर तबाह हो रहे हैं और आंदोलनकारी किसान संगठनों ने 27 सितंबर को भारत बन्द का आह्वान किया है।

भाकपा राज्य काउंसिल ने इसका पुरजोर समर्थन करने का फैसला लिया है।

पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और सहयोगी संगठनों का आह्वान किया है कि वे पूरी शिद्दत से भारत बन्द को समर्थन प्रदान करें। संयुक्त बैठकें बुलाकर तैयारी में जुट जायें।

पार्टी ने इस सवाल को गंभीरता से लिया कि भाजपा सरकार जाति आधारित गणना के सवाल पर मुंह चुरा रही है। पार्टी ने अपनी इस मांग को जोरदारी से दोहराया है कि आगामी जनगणना में जाति को शामिल किया जाये।

बैठक में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर गहरी चिन्ता जतायी गयी। उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता के हितों की उपेक्षा कर रही है। झूठा प्रचार, भ्रष्टाचार और  समाज को बांटना राज्य सरकार के मूल मन्त्र बन गये हैं।

राज्य काउंसिल बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी पर भी बल दिया गया। भाकपा ने अपने इस संकल्प को दोहराया कि वह घोर सांप्रदायिक और फासिस्ट भाजपा सरकार को पुनः सत्तारूढ़ होने से रोकने को पुरजोर कोशिश करेगी। इसके लिए वामपंथी, धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट करने का प्रयास करेगी और विपक्षी वोटों का विभाजन न हो इसके लिए तालमेल की कोशिश करेगी।

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