Home » Latest » तुलसीदास की नैतिकता का आधार है ‘जिम्मेदारी’ और ‘वफादारी’

तुलसीदास की नैतिकता का आधार है ‘जिम्मेदारी’ और ‘वफादारी’

तुलसीदास की नैतिकता का आधार,तुलसीदास की नैतिकता,क्या जिम्मेदारी हमेशा अच्छी भूमिका अदा करती है

 The basis of Sant Goswami Tulsidas’ morality is ‘responsibility’ and ‘loyalty’

तुलसीदास की नैतिकता का आधार क्या है?

तुलसी के मानस को एकसूत्र में बांधने वाला प्रधान तत्व क्या है?

तुलसी के मानस की हजारों किस्म की व्याख्याएं प्रचलन में हैं, इसका प्रधान कारण है इसकी भाषा का अनखुलाभाव। यह भाषा प्रतीक के लिहाज से ही अनखुली नहीं है, बल्कि संस्कृति के लिहाज से भी अनखुली है, अपूर्ण है। इसके बावजूद तुलसी के मानस को एकसूत्र में बांधने वाला प्रधान तत्व है उसकी अवधी भाषा।

तुलसी के मानस में जब नैतिक पक्ष को आधुनिक आलोचना के नजरिए से खोलेंगे तो पाएंगे कि वहां जो अच्छा है, वह अच्छा है, उसे बुरा नहीं बनाया जा सकता अथवा वह बुरा नहीं हो सकता। राम अच्छे हैं तो राम अच्छे हैं, रावण बुरा है तो बुरा है। अच्छा कभी बुराई को पैदा नहीं कर सकता और बुरा कभी अच्छाई पैदा नहीं कर सकता। नैतिकता के प्रति इस तरह का रुख धर्म का स्याह पक्ष है।

मजेदार बात यह है कि नैतिकता के सिद्धान्तकारों की रोशनी में हमने कभी तुलसी की नैतिकता को देखा ही नहीं। हम नैतिकता के धार्मिक मानकों के आधार पर मूल्य निर्णय करते रहे। जबकि इस पक्ष पर ज्यादा गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि राम को मर्यादा पुरूष बनाने का काम नैतिक मूल्यों के आधार पर ही किया गया है।

रामचरित मानस जैसी कृति में नैतिकता के सवाल बेहद जटिल रूप में सामने आते हैं। नैतिकता के जो रूप हमें परेशान करते हैं, उन्हें तो हम मनमाने ढ़ंग से व्याख्यायित कर लेते हैं, किंतु नैतिकता की व्याख्या करना बेहद कठिन काम है।

नैतिक मूल्यों की कोई सीमा नहीं होती, इसकी सीमाएं स्पष्ट नहीं हैं। यही वजह है कि आसानी से किसी भी चीज को नैतिक मूल्य करार दे दिया जा सकता है। नैतिकता से जुड़ी किसी भी समस्या के कारणों को आप कृति में आसानी से खोज नहीं सकते। नैतिकता के कारण और समस्या को आसानी से अलगाया नहीं जा सकता।

नैतिक मूल्यों को विवेचित करते समय जो व्याख्याएं पेश की जाती हैं उनमें पूर्वाग्रह चले आते हैं, पूर्वाग्रहों के कारण ही हमारे सामने संभावित व्याख्याएं आती हैं।

तुलसी के मानस में नैतिकता के मानकों को जिम्मेदारीऔर वफादारीकी धारणाओं के आधार पर निर्मित किया गया है। जिम्मेदारीकी धारणा के आधार पर निर्मित नैतिकता का अमूमन लक्ष्य होता है नैतिक उच्चता की ओर ले जाना। किंतु सवाल पैदा होता है कि क्या जिम्मेदारी हमेशा ऊपर की ओर ले जाती है? क्या जिम्मेदारी हमेशा अच्छी भूमिका अदा करती है ?

एक अन्य बात यह भी ध्यान में रखने की है कि भक्ति-आंदोलन के संदर्भ के बिना रामचरित मानस पर कोई बात अधूरी ही रहेगी।

भक्ति-आंदोलन का सारा ताना-बाना नैतिकता पर टिका है। भक्ति आंदोलन के रचनाकार किस तरह नैतिकतावादी नजरिए से चीजों को देख रहे थे, इसका आदर्श उदाहरण है जातिप्रथा संबंधी उनका नजरिया। वे जातिप्रथा को नैतिक प्रथा मानकर चुनौती देते हैं, उसके आर्थिक आधार की अनदेखी करते हैं।

व्यापारिक पूंजीवाद के दौर में बुद्धिजीवियों का एक सीमा तक बौद्धिक उत्थान होता है, बौद्धिक उत्थान के सीमित दौर में तर्क‘ (रीजन) की भूमिका की तरफ बुद्धिजीवी तेजी से मुखातिब होते हैं। तर्ककी चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका स्वीकार की गयी है। व्यापारिक पूंजीवाद के युग में तर्कको जीवन शैली से युक्त किया गया।

तुलसी का तर्कजीवनशैली से जुड़ता है। तर्कऔर विचारके बीच में अंतर या भेद भी इसी युग में पैदा होता है। इस दौर में यह मान लिया गया कि विचार के जरिए जीवन को संतुलित नहीं बनाया जा सकता। इच्छा और अन्तर्विरोध के समाधान के लिए रामचरित मानस में विचार की बजाय तर्कका सहारा लिया गया। आलोचना में मनुष्य का अच्छेऔर बुरेके रूप में वर्गीकरण भ्रमित करने वाला है। किंतु संकट की अवस्था में ही इन दोनों की स्पष्ट सीमाएं सामने आती हैं।

तुलसीदास ने रामचरित मानस में अच्छेऔर बुरेका जो वर्गीकरण किया है वह संकट की अवस्था में चरित्रों को उभारने में मदद करता है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ.
जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

shahnawaz alam

ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर सर्वे : मीडिया और न्यायपालिका के सांप्रदायिक हिस्से के गठजोड़ से देश का माहौल बिगाड़ने की हो रही है कोशिश

फव्वारे के टूटे हुए पत्थर को शिवलिंग बता कर अफवाह फैलायी जा रही है- शाहनवाज़ …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.