सुधा भारद्धाज को रिहा करो, देश भर से मांग उठी

Sudha Bhardwaj

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनसंगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की

Human rights activists, intellectuals, cultural workers, social workers and public organizations have expressed deep concern over the arrest of Sudha Bhardwaj.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, संस्कृति कर्मियों, सामाजिक-राजनैतिक, मजदूर-किसान, ट्रेड यूनियन एवं जनसंगठनों ने सरकार की जनविरोधी नीतियों एवं दमनात्मक कार्यप्रणाली को तानाशाही पूर्ण व आपातकाल से भी बदतर बतलाते हुए देश की वर्तमान हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

सुधा भारद्वाज को अगस्त 2018 में पुणे पुलिस द्वारा जनवरी 2018 में भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा और माओवादियों से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस पर सुधा भारद्वाज ने स्पष्ट रूप से सख्त लहजे में कहा कि

“मैं पूरी दृढ़ता के साथ और स्पष्ट रूप से इस बात से इंकार करती हूं और मुझ पर लगाये गए बदनामी भरे, सामाजिक सरोकार और व्यक्तिगत रूप से क्षति पहुंचाने वाले तमाम आरोपों को मैं पूरी दृढ़ता के साथ ख़ारिज करती हूं। मुझ पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं।”

वास्तव में सुधा भारद्वाज सबसे कमजोर तबकों, मजदूरों, गरीबों, किसानों, दलितों, शोषितों, भूविस्थापितों, मानवाधिकार व सामाजिक सुधार आंदोलनों की एक सशक्त आवाज़ हैं।

Sudha Bharadwaj: Biography, Facts, Career | Who is Sudha Bhardwaj? A brief biography

मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाली वकील सुधा भारद्वाज ने करीब तीन दशकों तक छत्तीसगढ़ में काम किया है। सुधा भारद्वाज भूमि अधिग्रहण के खिलाफ एक ट्रेड यूनियनवादी, कम्युनिस्ट और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता हैं और दिवंगत शंकर गुहा नियोगी के छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा से जुड़ी हैं।

सुधा भारद्वाज एक प्रसिद्ध अधिवक्ता हैं और फिलहाल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली की विजीटिंग प्रोफेसर, इंडियन एसोसिएशन फॉर पीपुल्स वकीलों (IAPL) के उपाध्यक्ष हैं और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की राष्ट्रीय सचिव हैं।

वकील और कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को हार्वर्ड लॉ स्कूल की ओर से सम्मानित किया गया है। उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कॉलेज के पोर्ट्रेट एक्ज़िबिट (फोटो प्रदर्शनी) में जगह दी गयी है।

हार्वर्ड द्वारा इस प्रदर्शनी में दुनिया भर से कानून के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाली महिलाओं को शामिल किया जाता है। हार्वर्ड लॉ इंटरनेशनल वीमेंस डे पोर्ट्रेट एक्ज़िबिट द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित की जाने वाली महिलाओं में सुधा भारद्वाज के अलावा वकील मेनका गुरुस्वामी भी शामिल हैं। इस प्रदर्शनी में शामिल ‘ये महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र की ताकतवर आवाज़ें हैं, भले ही वो हाईकोर्ट में हों, क्लासरूम में पढ़ा रही हों या सड़क पर मार्च निकाल रही हों। 21 महिलाओं को यह सम्मान मिला है, जिन्हें हार्वर्ड लॉ स्कूल के विद्यार्थियों, फैकल्टी और स्टाफ द्वारा नामित किया गया था।

सुधा भारद्वाज का जन्म एक अमेरिकी नागरिक, कृष्ण और रंगनाथ भारद्वाज के सम्पन्न एवं प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पीएचडी कर रहे थे। भारद्वाज 11 वर्ष की आयु में भारत वापस आईं,18 वर्ष की आयु में अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी, और 1984 में पाँच वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए, गणित का अध्ययन करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर ज्वाइन की।

आईआईटी में एक छात्र के रूप में अपने समय के दौरान उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में मजदूरों की भयावह कार्य स्थितियों से अवगत हुईं। 1986 में प्रख्यात मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी के छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के साथ काम करना शुरू किया। श्रमिकों के समग्र विकास को प्रदान करने के लिए दृढ़ संकल्प सुधा ने 2000 में अपनी कानून की डिग्री रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज से प्राप्त की।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा से जुड़े रहने के दौरान, भारद्वाज ने भ्रष्ट नौकरशाहों के खिलाफ काफी संघर्ष किया और यह सुनिश्चित करने के लिए कि भिलाई में स्थित खानों और संयंत्रों में श्रमिकों को उचित मजदूरी का भुगतान किया जाए। वह दलित और आदिवासी अधिकारों, विशेष रूप से भूमि के अधिकार, शिक्षा के अधिकार, स्वास्थ्य और भ्रष्ट जमींदारों के खिलाफ सुरक्षा के मुद्दों पर भी लगातार काम करतीं रही।

सुधा भारद्वाज मजदूरों, गरीबों, किसानों, दलितों, शोषितों, भूविस्थापितों, मानवाधिकार व सामाजिक सुधार आंदोलन की सशक्त आवाज़ बन गई।

महिला सशक्तिकरण की एक मिशाल एक प्रतीक बन गई। करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा, आदर्श व सहारा का नाम सुधा भारद्वाज है।

गणेश कछवाहा, Ganesh Kachhwaha रायगढ़ छत्तीसगढ़
गणेश कछवाहा,
रायगढ़ छत्तीसगढ़

सुधा भारद्वाज जैसेअन्य सामाजिक कार्यकर्ता, जो सरकार की गलत नीतियों, शासकीय तंत्र की कमजोरियों,सामाजिक बुराइयों को दूर करने, नागरिक अधिकारों की रक्षा,मानवाधिकारों की सुरक्षा, समाज के सबसे कमजोर तबकों को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिलाने उन्हें जागरूक करने,संविधान व लोकतंत्र की हिफाज़त के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किए हुए हैं उन्हें सरकार के खिलाफ साजिश के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है। जिससे देश स्तब्ध हैं।

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जनसंगठनों ने कहा कि इससे संविधान और लोकतंत्र काफी कमजोर होगा जो काफी चिंता जनक है। सुधा भारद्धाज सहित गिरफ्तार कर जेल भेजे गए कार्यकर्ताओं में प्रमुख नाम है – वरवर राव 81 वर्षीय हैदराबाद के प्रसिद्ध कवि और लेखक हैं। आनंद तेलतुंबडे – एक दलित विद्वान लेखक हैं।गौतम नवलखा – दिल्ली में नागरिक अधिकार कार्यकर्ता,पत्रकार और प्रसिद्ध राजनैतिक विश्लेषक हैं। सुरेन्द्र गडलिंग – महाराष्ट्र नागपुर के प्रख्यात मानव अधिकार वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।शोमा सेन – नागपुर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग की प्रमुख,एक प्रसिद्ध अकादमिक एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं। अरुण फरेरा – मुंबई में मानव अधिकार वकील,जेल जीवन के संस्मरण ‘कलर्स ऑफ द केज’ के लेखक हैं। वर्णन गोंसालवेस – लेखक, अनुवादक एवं ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता हैं। सुधीर धवले – संस्कृति कर्मी,मराठी पत्रिका ” विद्रोही” के संस्थापक प्रकाशक हैं। महेश राउत – गढ़ चिरौली के आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता हैं। रोना विल्सन – जेएनयू के पीएचडी छात्र, राजनैतिक कैदियों की रिहाई के लिए सक्रिय रूप से अभियान चलाया है।

सुधा और अन्य साथियों की गिरफ्तारी के दो वर्ष पूर्ण हो रहे हैं सरकार को चाहिए कि वस्तु स्थिति की समीक्षा कर सुधा भारद्वाज एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा करें।

गणेश कछवाहा,

रायगढ़ छत्तीसगढ़

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