अगर अदालत सरकार की बोली बोलने लगे तो इन्साफ कौन करेगा ?

अगर अदालत सरकार की बोली बोलने लगे तो इन्साफ कौन करेगा ?

If the court starts speaking the government’s bid then who will do justice?

अदालते आलिया कह रही है कि दंगे की सुनवाई बाद में होगी, पहले छात्र दंगा करना बंद करें.

छात्र कह रहे हैं कि अनजान लोगों ने आगजनी और तोड़-फोड़ की है. पुलिस ने उन्हें रोका नहीं. बीबीसी पत्रकार खुद यही कह रही है, जिसका कैमरा पुलिस ने छीन लिया. गार्ड यही कह रहे हैं. कुलपति भी यही कह रही हैं.

लेकिन अदालत मान चुकी है कि दंगा छात्र कर रहे हैं.

क्योंकि सरकार कह रही है.

अगर अदालत सरकार की बोली बोलने लगे तो इन्साफ कौन करेगा. राष्ट्रीय मीडिया सरकार की बोली बोलने लगे तो सचाई कैसे सामने आएगी. पुलिस सरकार की बोली बोलने लगे तो क़ानून का राज कैसे चलेगा.

लेकिन आज अदालत-मीडिया-पुलिस सब सरकार की बोली बोल रहे हैं.

और सरकार बोल रही है कि वो कपड़ों से समझ जाती है कि दोषी कौन है!.

जो अपने सादा कपड़ों के चलते बेरोजगार छात्र नजर आते हैं, दोषी वही हैं. जिनके पास दस करोड़ का सूट नहीं, दोषी वही हैं.

जो गरीब है, नौजवान है, दोषी वही है.

देश भर के छात्र इस नाइंसाफी के ख़िलाफ़ लोकतांत्रिक तरीकों से आवाज़ उठा रहे हैं. लोकतांत्रिक विरोध हर किसी का बुनियादी हक है. आज ही इस हक के इस्तेमाल का सही समय है.

आशुतोष कुमार

(प्रो. आशुतोष कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उनकी एफबी टिप्पणी )

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner