Home » Latest » अगर घर ही लक्ष्मण-रेखा है, तो मोदीजी किसान अपने खेत जा सकता है कि नहीं ? ये देश 21 दिन के लॉकडाउन के लिये तैयार नहीं
Narendra Modi in anger

अगर घर ही लक्ष्मण-रेखा है, तो मोदीजी किसान अपने खेत जा सकता है कि नहीं ? ये देश 21 दिन के लॉकडाउन के लिये तैयार नहीं

If the house itself is Laxman-Rekha, then Modiji farmer can go to his field or not? This country is not ready for 21 days lockdown

ये देश 21 दिन के #लाकडाउन के लिये तैयार नहीं है।

सबसे बड़ी बात, ये सरकार 130 करोड़ जनता को, रोज़मर्रा को सुविधायें मुहैया कराते हुए, दिहाड़ी मज़दूरों तक बुनियादी सुविधायें पहुंचाते हुए, किसानों की फसल की कटाई/ बिक्री गारंटी करते हुए, लोकतांत्रिक ढंग से, घर में रखने के काबिल नहीं है! सरकारी मशीनरी/ लेखपाल, ब्लाक/ तहसील अधिकारी/ प्रधानों इत्यादि का भ्रष्टाचार 100 गुना बढ़ जायेगा!

अमरेश मिश्र (Amaresh Mishra) लेखक वरिष्ठ पत्रकार, इतिहासकार व फिल्म पटकथा लेखक हैं।उच्च वर्ग ने तो घर में सामान स्टोर कर लिया है! पर किसानों और गरीबों पर ज़ुल्म बढ़ेगा, क्यूंकि यहां की पुलिस को जरूरी सेवाओं वाले लोगों और अन्य में फर्क करने की ट्रेनिंग है ही नहीं! पत्रकारों तक को तो दिल्ली में पुलिस पीट देती है!

अगर घर ही लक्ष्मण-रेखा है, तो किसान अपने खेत जा सकता है कि नही–ये भी साफ नहीं है!

अमरेश मिश्रा

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व इतिहासकार हैं। वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध चुनाव लड़ चुके हैं।)

हमारे बारे में hastakshep

Check Also

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

नरभक्षियों के महाभोज का चरमोत्कर्ष है यह

पलाश विश्वास वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं। आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की …