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Azamgarh relief camp

भूख से बड़ा मजहब और रोटी से बड़ा ईश्वर हो तो बता देना मुझे भी धर्म बदलना है…

आज़मगढ़ 14 मई 2020.  मुल्क में एक तरफ घर वापसी हो रही है दूसरी तरफ ऐसे बहुत से मज़दूर साथी हैं जिनके घर नहीं हैं, हैं भी तो वहां इससे भी बुरा हाल हो न जाए वो जहां हैं वहीं रह गए हैं.

आज़मगढ़ के सलारपुर, जगदीशपुर में कूड़ा बीनने वाले (Garbage Pickers) और घूम-घूमकर छोटे-मोटे समान बेचने वाले प्रवासी मजदूरों (Migrant labor) के बीच विनोद यादव, अवधेश यादव, राजेश और विभिन्न साथियों के सहयोग से बस्ती के लोग खुद बना और खा रहे हैं.

विनोद यादव का कहना है कि हमारी कोशिश है कि कोई प्रवासी मजदूर जो भी हमारे जिले में है वो भूखा न सोए. साथ-सहयोग से हम आज पल्हनी और अन्य जगहों पर भी यह प्रयास करेंगे. वे बताते हैं कि हमने इन्हें प्रशिक्षित भी किया है कि सभी अच्छे से साबुन से नहाकर ही खाना बनाएं और खाने से पहले अच्छी तरह हाथ धोएं.

वीर भूमि, 24 परगना पश्चिम बंगाल, कटिहार बिहार के मजदूर साथियों के बारे में अवधेश यादव बताते हैं कि हिन्दू-मुसलमान सब मिलजुलकर बनाते-खाते हैं.

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