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भारत में, संपन्न उपभोक्ताओं की तुलना में, गरीब गृहस्थियों को दो गुना कम एलपीजी सब्सिडी मिलती है – रिपोर्ट

In India, poor households get twice as much LPG subsidy as compared to affluent consumers – report

नई दिल्ली, 28 अप्रैल, 2021 (डॉ. सीमा जावेद) – जहाँ लाखों भारतीय लोग तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (Liquefied petroleum gas – LPG) (एलपीजी) की कीमत में रिकॉर्ड वृद्धि के लिए सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार एलपीजी सब्सिडी नीति (Lpg subsidy policy) के डिजाइन में बदलाव नहीं करती है तो गरीब परिवारों को LPG समर्थन से, संपन्न उपभोक्ताओं की तुलना में, 2 गुना कम लाभ हो सकता है।

एक नई रिपोर्ट के अनुसार (जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड द इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी से भारत में LPG सब्सिडियों को कैसे लक्षित किया जाए), जब केंद्र सरकार की सभी ऊर्जा सब्सिडी का लगभग 28% LPG सब्सिडी में शामिल था, तब झारखंड के ग्रामीण और शहरी हिस्सों में सबसे गरीब 40% परिवारों को FY (वित्त वर्ष) 2019 में सरकार LPG सहायता का 30% से कम प्राप्त हुआ।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IISD) एक पुरस्कार विजेता स्वतंत्र थिंक टैंक है जो स्थिर जलवायु, सस्टेनेबल संसाधन प्रबंधन और उचित अर्थव्यवस्थाओं के समाधान में तेजी लाने के लिए काम कर रहा है।

एक वर्ष में डेढ गुना से ज्यादा हो गईं एलपीजी सिलेंडर की कीमतें

सरकार ने मई 2020 में कम तेल की कीमतों के कारण एलपीजी सब्सिडी को रोक दिया और इसके परिणामस्वरूप घरेलू एलपीजी सिलेंडर दरों में कमी आई। पर हाल ही में, एलपीजी सिलेंडर की कीमतें (Lpg cylinder prices) मई 2020 में INR 594 से बढ़कर मार्च 2021 में INR 819 हो गई हैं, जिससे लाखों भारतीय खाना पकाने के ईंधन का खर्च उठाने से जूझ  रहे हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गरीब परिवारों के लिए एलपीजी मूल्य समर्थन महत्वपूर्ण है और इसे तत्काल लागू किए जाने की जरूरत है, लेकिन मौजूदा नीतियों को सबसे ज़रूरतमंद लोगों का समर्थन करने के लिए रिडिज़ाइन  (नया स्वरूप देने) करने की जरूरत है।

Poor families need LPG subsidy

रिपोर्ट की लेखक, श्रुति शर्मा, ने कहा,

“यह स्पष्ट है कि गरीब परिवारों को एलपीजी सब्सिडी की आवश्यकता है, इसलिए जब सरकार एलपीजी सब्सिडी को फिर से लागू करती है, तो उसे पुरानी गलतियों को को दोहराने से बचना चाहिए और लाभों को अन्यथा कम स्वच्छ बायोमास-आधारित ठोस ईंधन पर निर्भर होने के लिए मजबूर हैं उन गरीब परिवारों की ओर निर्देशित करना चाहिए। प्रतिगामी सब्सिडी से दूर होने और आर्थिक रूप से कठिन समय के दौरान सरकार के करोड़ों रुपये बचाने के लिए सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना महत्वपूर्ण होगा।”

Rich households have higher consumption of subsidized LPG cylinders

विशेषज्ञों के मुताबिक, सब्सिडी वितरण में सुधार में मुख्य अड़चन संपन्न घरों में सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों की अधिक खपत है। भारत के अधिकांश ग्रामीण परिवारों में सब्सिडी वाले एलपीजी के बजाय स्वतंत्र रूप से उपलब्ध लकड़ी और बायोमास-आधारित ईंधन का अधिक उपयोग जारी है, जबकि अधिक संपन्न घरों में सब्सिडी वाले एलपीजी की अधिक खपत है और उन्हें सब्सिडी का और बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि एलपीजी सब्सिडी की दक्षता पर डाटा की कमी ने सरकार को वितरण में असमानता को पहचानने से रोका है।

शर्मा कहती हैं कि, “झारखंड के मामले के अध्ययन से स्पष्ट है कि गरीब परिवारों की सही पहचान करने में नॉलेज गैप (ज्ञान में अंतर) है। अगर हम अप्राप्यता (और महंगाई) की समस्या को ठीक करना चाहते हैं, तो लक्ष्यीकरण महत्वपूर्ण है।”

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लाभार्थियों के एक संकीर्ण सबसेट पर सब्सिडी लाभ का ध्यान केंद्रित करना न केवल सबसे गरीब उपभोक्ताओं का समर्थन कर सकता है, बल्कि समग्र कार्यक्रम लागत को भी कम कर सकता है।

अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि झारखंड में प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) (पीएमयूवाई) कनेक्शन के साथ गरीब परिवारों द्वारा सालाना सिर्फ 5.6 सिलेंडर की खपत होती है, —  जो कि 12 की निर्धारित सब्सिडी वाले सिलेंडर की वर्तमान वार्षिक सीमा (या कोटा) से बहुत कम है। जब तक गरीब परिवार अपनी एलपीजी सिलेंडर खपत नहीं बढ़ाते हैं, सरकार वार्षिक सीमा में 12 से 9 सिलेंडर की कटौती पर विचार कर सकती है। अध्ययन का अनुमान है कि, बिना लाभ के औसत वितरण में ज़्यादा बदलाव किए, यह ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी के खर्च को 14% और शहरी क्षेत्रों में 19% तक कम कर सकता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि गरीबी और घर PMUY लाभार्थी थे या नहीं के इसके बीच कोई ठोस संबंध नहीं था:  PMUY और गैर-PMUY दोनों परिवारों के बीच निम्न-आय और उच्च-आय वाले परिवारों का मिश्रण था। इसका मतलब यह है कि केवल PMUY लाभार्थियों पर सब्सिडी का ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करना – पिछले कई वर्षों में एक आम तौर पर प्रसारित सुझाव – समाधान की तुलना में अधिक समस्याएं पैदा कर सकता है।

अल्पावधि में, केंद्र को ज्ञान अंतर की मैपिंग और पूरे भारत में एलपीजी सब्सिडी की इक्विटी की पहचान करने में निवेश करना चाहिए। मध्यम अवधि में, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि राज्य सरकारों को ज़्यादा उत्पन्न घरों की बेहतर पहचान करने और उनकी एलपीजी सब्सिडी को प्रतिबंधित करने के लिए वाहन स्वामित्व जैसे होशियार संकेतकों का परीक्षण करने पर विचार करें।

अध्ययन के सह-लेखक क्रिस्टोफर बीटन ने कहा,

“गरीबी प्रासंगिक है, और इस रिपोर्ट में झारखंड के लिए हस्तक्षेप का परीक्षण किया गया है, एक उच्च गरीबी वाला राज्य, इसलिए निष्कर्ष निम्न गरीबी के स्तर वाले राज्यों के लिए शायद समान नहीं हों।”

बीटन ने कहा कि,

“कोविड-19 संकट ने गरीब घरों की आय को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, और आगे एलपीजी सब्सिडी के लिए अपना समर्थन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। एलपीजी सब्सिडी पर स्पष्टता की कमी गरीब घरों को, जो गंदे बायोमास का उपयोग करने के बजाय असुरक्षित एलपीजी का खर्च नहीं उठा सकते हैं, पीछे ढकेल सकती है, जिससे महिलाओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा – हमने पाया कि पहले से ही सबसे गरीब परिवारों को, बेहतर घरों में केवल 3% की तुलना में, अपने मासिक खर्च का 9% -11% समर्पित करना होता है। सरकार को सबसे ज़्यादा गरीबों के लिए सामर्थ्य बढ़ाने के लिए एलपीजी सब्सिडी के बेहतर लक्ष्यीकरण पर विचार करना चाहिए।”

डॉ. सीमा जावेद पर्यावरणविद , वरिष्ठ पत्रकार और जलवायु परिवर्तन की रणनीतिक संचारक हैं।

Seema Javed सीमा जावेद पर्यावरणविद, स्वतंत्र पत्रकार
डॉ. सीमा जावेद पर्यावरणविद , वरिष्ठ पत्रकार और जलवायु परिवर्तन की रणनीतिक संचारक हैं।

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