“अमिट संबंध” : आत्मा-परमात्मा

Samiksha Thakur समीक्षा ठाकुर

अमिट संबंध” : आत्मा-परमात्मा | “Indelible relation”: soul-divine

 

वसु बहती नद्य-नीलिमा मैं,

तुम अम्ब धवल विस्तार प्रिय |

शीशोद्गम श्यामल उर्मि मैं,

तुम नीलकंठ कामारि प्रिय ||

तुम अम्ब धवल विस्तार प्रिय ||

 

मैं बहुल वर्ण खग-मृग विचरित,

तुम अमिट सकल संसार प्रिय |

मैं श्वेत-छवि द्वि-ध्रुव-ध्वनि हूँ ,

तुम महाखण्ड आकार प्रिय ||

तुम अम्ब धवल विस्तार प्रिय ||

 

Samiksha Thakur समीक्षा ठाकुर
समीक्षा ठाकुर

प्रति अक्षि-हृय हिमनद सम है,

तुम उदयित पारावार प्रिय |

मैं कुमुद बनी,तुम मधुप बनो,

ज्यों अंजन-दृग श्रंगार प्रिय ||

तुम अम्ब धवल विस्तार प्रिय ||

 

समीक्षा ठाकुर

नाथ-नगरी, बरेली, उत्तर-प्रदेश, भारतवर्ष

पाठकों सेअपील - “हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें