भारत अमेरिका नहीं बनेगा : भुखमरी इतिहास बदल देती है साहेब, चीन की भुखमरी की कोख से क्रांति का जन्म हुआ था

Donald Trump and Xi Jinping

India will not become America: starvation changes history Saheb, revolution was born from the hunger of Chinese starvation

अभी लॉक डाउन लम्बा चलेगा।

घरों में बन्द आप नोबेल विजेता लेखिका पर्ल बक की चीन की भुखमरी और क्रांति पर केंद्रित क्लासिक उपन्यास गुड अर्थ (The refugee story by Pearl S Buck in Hindi) जरूर पढ़ लें।

चीन की भुखमरी की कोख से क्रांति का जन्म हुआ था।

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राजनीतिक आंदोलन के अलावा आदिवासी और किसान आंदोलन, मजदूर आंदोलन और सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलन को अगर आजादी की लड़ाई के साथ जोड़कर देखें तो यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि दूसरे विश्वयुद्ध से ब्रिटिश साम्राज्यवाद के पतन के साथ बंगाल की भुखमरी की कोख से जन्मी थी भारत की स्वतंत्रता।

भुखमरी इतिहास बदल देती है।

भुखमरी नया इतिहास का निर्माण भी करती है।

किसानों और मजदूरों और आम जनता के बेबस कैद चेहरे पर लिखा जा रहा है नया इतिहास।

भारत अमेरिका नहीं बनेगा।

भारत किसी कीमत पर अमेरिका नहीं बन सकता।

अमेरिका से सावधान।

जय भीम कामरेड।

पलाश विश्वास

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Notes – The Good Earth is a novel by Pearl S. Buck published in 1931 that dramatizes family life in a Chinese village in the early 20th century. It is the first book in a trilogy with Sons (1932) and A House Divided (1935).

(Source – wikipedia )

Pearl Sydenstricker Buck (June 26, 1892 – March 6, 1973; also known by her Chinese name Sai Zhenzhu; Chinese: 赛珍珠) was an American writer and novelist. As the daughter of missionaries, Buck spent most of her life before 1934 in Zhenjiang, China. Her novel The Good Earth was the best-selling fiction book in the United States in 1931 and 1932 and won the Pulitzer Prize in 1932. In 1938, she was awarded the Nobel Prize in Literature “for her rich and truly epic descriptions of peasant life in China and for her biographical masterpieces”. She was the first American woman to win the Nobel Prize for Literature.

(Source – wikipedia )

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