जानें 8 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस, क्या है इसका महत्व

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आसमान में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी

Indian Air Force Day 2020: Know what is the history of the air force day why IAF celebrates it on 8 October

बेहद शक्तिशाली हो चुकी है भारतीय वायुसेना

Indian Air Force Day 2020 | Indian air force day is celebrated on which date

          8 अक्तूबर को भारतीय वायुसेना अपना 88वां स्थापना दिवस मना रही है। वायुसेना दिवस के अवसर पर पहली बार राफेल लड़ाकू विमान गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर वायुसेना की वार्षिक परेड (Annual Air Force Parade at Hindon Airbase of Ghaziabad) की अगुवाई करेंगे। इस वर्ष वायुसेना के लिए यह दिवस बेहद खास है क्योंकि राफेल सहित कुछ और शक्तिशाली लड़ाकू विमानों तथा हेलीकॉप्टरों के वायुसेना की विभिन्न स्क्वाड्रनों में शामिल होने से हमारी वायुसेना कई गुना शक्तिशाली हो चुकी है। राफेल विमानों की पहली खेप से वायुसेना की युद्धक क्षमताएं बहुत ज्यादा बढ़ी हैं और अब हम हवा में पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं तथा दुश्मन की किसी भी तरह की हरकत का पहले से अधिक तेजी और ताकत के साथ जवाब देने में सक्षम हुए हैं। दरअसल आसमान में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह भारतीय वायुसेना के ही हाथों में होती है, इसलिए दुश्मन देशों की चुनौतियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए वायुसेना को लगातार मजबूती प्रदान करना बेहद जरूरी है।

The Indian Air Force protects the country’s nearly 24,000 km long international border.

भारतीय वायुसेना ही है, जो देश की करीब 24 हजार किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी मुस्तैदी के साथ निभाती है।

मौजूदा समय में चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा पर जारी तनाव के दौर में भारतीय वायुसेना की ताकत (Strength of Indian Air Force) को लेकर वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया (Air Force Chief RKS Bhadauria) ने हाल ही में दो टूक लहजे में कहा है कि चीनी वायुशक्ति भारत की क्षमताओं से बेहतर नहीं हो सकती। उनका कहना है कि समय के साथ वायुसेना ने बहुत तेजी से बदलाव किए हैं और काफी हद तक कमियों को दूर कर लिया गया है। देश के समक्ष उभर रही चुनौतियों ने हमें भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अधिकृत किया है और हमारी क्षमताओं ने विरोधियों को चौंकाया है। वायुसेना प्रमुख के अनुसार हमारे पड़ोस में और आसपास के क्षेत्रों में उभरते हुए खतरे के परिदृश्य में युद्ध लड़ने की मजबूत क्षमता होना आवश्यक है और ऑपरेशनली भारतीय वायुसेना सर्वश्रेष्ठ है। उनका साफतौर कहना है कि भारत किसी भी खतरे से निपटने और दोनों मोर्चों पर युद्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक वायुसेना उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के साथ दोतरफा युद्ध से निपटने के लिए तत्पर है।

          इस समय राफेल के अलावा चिनूक और अपाचे भी वायुसेना की बेमिसाल ताकत बने हैं और आगामी पांच वर्षों में तेजस, कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, ट्रेनर एयरक्राफ्ट सहित कई और ताकतवर हथियार वायुसेना की अभेद्य ताकत बनेंगे। तीन वर्षों में राफेल तथा एलसीए मार्क-1 स्क्वाड्रन पूरी ताकत के साथ शुरू हो जाएगी। डीआरडीओ तथा एचएएल के स्वदेशी उत्पादन भी वायुसेना की ताकत को लगातार बढ़ा रहे हैं। वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए आने वाले समय में 83 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस (मार्क-1ए), 114 एमआरएफए विमानों की खरीद किए जाने की संभावना है। वायुसेना की पहली स्क्वाड्रन 1993 में बनी थी और हर भारतीय के लिए यह गर्व की बात है कि हमारी वायुसेना आज इतनी ताकतवर हो चुकी है कि इसमें फाइटर एयरक्राफ्ट, मल्टीरोल एयरक्राफ्ट, हमलावर एयरक्राफ्ट तथा हेलीकॉप्टरों सहित 2200 से अधिक एयरक्राफ्ट तथा करीब 900 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट शामिल हो चुके हैं। पड़ोसी देशों की फितरत को देखते हुए अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित एयरक्राफ्ट तथा लड़ाकू विमान शामिल किए जाने की प्रक्रिया लगातार जारी है।

          वैसे भारतीय वायुसेना चीन के साथ एक तथा पाकिस्तान के साथ चार युद्धों में अपना पराक्रम दिखा चुकी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् 1947 में भारत-पाक युद्ध, कांगो संकट, ऑपरेशन विजय, 1962 में भारत-चीन तथा 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन पूमलाई, ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन कैक्टस, 1999 में कारगिल युद्ध इत्यादि में अपनी वीरता का असीम परिचय देते हुए वायुसेना ने हर तरह की विकट परिस्थितियों में भारत की आन-बान की रक्षा की। वायुसेना का ध्येय वाक्य है ‘नभः स्पृशं दीप्तम’ अर्थात् आकाश को स्पर्श करने वाले दैदीप्यमान। गीता के 11वें अध्याय से लिए गए ये शब्द भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन से कहे थे।

          भारतीय वायुसेना को दुनिया की चौथी बड़ी सैन्यशक्ति वाली वायुसेना माना जाता है, जिसकी जाबांजी के अनेक किस्से दुनियाभर में विख्यात हैं। इसकी स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में 8 अक्तूबर 1932 को हुई थी और तब इसका नाम था ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स(Royal Indian Airforce)। 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में रॉयल इंडियन एयरफोर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं थी। उस समय वायुसेना पर आर्मी का ही नियंत्रण होता था। इसे एक स्वतंत्र इकाई का दर्जा दिलाया था इंडियन एयरफोर्स के पहले कमांडर-इन-चीफ सर थॉमस डब्ल्यू एल्महर्स्ट ने, जो हमारी वायुसेना के पहले चीफ एयर मार्शल बने थे। ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ की स्थापना के समय इसमें केवल चार एयरक्राफ्ट थे और इन्हें संभालने के लिए कुल 6 अधिकारी और 19 जवान थे। आज वायुसेना में डेढ़ लाख से भी अधिक जवान और हजारों एयरक्राफ्ट्स हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् वायुसेना को अलग पहचान मिली और 1950 में ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ का नाम बदलकर ‘इंडियन एयरफोर्स’ कर दिया गया।

Air Marshal Subroto Mukherjee was the first Indian head of the Indian Airforce.

एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी इंडियन एयरफोर्स के पहले भारतीय प्रमुख थे। उनसे पहले तीन ब्रिटिश ही वायुसेना प्रमुख रहे। भारतीय वायुसेना में अभी तक कुल 23 एयर चीफ स्टाफ रह चुके हैं। इंडियन एयरफोर्स का पहला विमान ब्रिटिश कम्पनी ‘वेस्टलैंड’ द्वारा निर्मित ‘वापिती-2ए’ था।

 ‘ग्लोबल फायरपावर’ के अनुसार दुनिया की शक्तिशाली वायुसेना के मामले में चीन तीसरे और भारत चौथे स्थान पर है। चीन के पास भारत के मुकाबले में दो गुना लड़ाकू और इंटरसेप्टर विमान हैं, भारत से दस गुना ज्यादा रॉकेट प्रोजेक्टर हैं लेकिन चीनी वायुसेना भारत के मुकाबले मजबूत दिखने के बावजूद भारत का पलड़ा उस पर भारी है। दरअसल भारतीय लड़ाकू विमान चीन के मुकाबले ज्यादा प्रभावी हैं। रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक गिनती और तकनीकी मामले में भले ही चीन सहित कुछ देश हमसे आगे हो सकते हैं लेकिन संसाधनों के सटीक प्रयोग और बुद्धिमता के चलते दुश्मन देश सदैव भारतीय वायुसेना के समक्ष थर्राते हैं। भारत के मिराज-2000 और एसयू-30 जैसे जेट विमान किसी भी मौसम में और कैसी भी परिस्थितियों में उड़ान भर सकते हैं। मिराज-2000 और एसयू-30 ऑल-वेदर मल्टीरोल विमान हैं। भारत के पास दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम 952 मीटर प्रति सैकेंड की रफ्तार वाली ब्रह्मोस मिसाइलों के अलावा कई दूसरी घातक मिसाइलें भी हैं। इनके अलावा एक बार में 4200 से 9000 किलोमीटर की दूरी तक 40-70 टन के पेलोड ले जाने में सक्षम सी-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट भी वायुसेना के बेड़े में शामिल हैं। मिराज-2000, मिग-29, सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस के अलावा सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमान करीब पौने चार घंटे तक हवा में रहने और तीन हजार किलोमीटर दूर तक मार करने में सक्षम हैं। इनके अलावा चिनूक और अपाचे जैसे अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर भी वायुसेना की मजबूत ताकत बने हैं। वायुसेना प्रमुख भदौरिया का कहना है कि भविष्य में भी वायुसेना की ताकत को और बढ़ाने के प्रयास निरन्तर जारी रहेंगे।

योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा सामरिक मामलों के विश्लेषक हैं)

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