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Ravish Kumar

भारत का मीडिया भारत के अर्जित लोकतंत्र का हत्यारा है – रवीश कुमार

India’s media is the killer of India’s earned democracy – Ravish Kumar

अमित मालवीय। बीजेपी के नैशनल इंफोर्मेशन एंड टेक्नॉलजी के प्रभारी हैं। प्रेस की कथित स्वतंत्रता का सम्मान करने वाले हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी की पार्टी के NIT सेल के प्रभारी इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई को लेकर अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोल चला रहे हैं। पूछ रहे हैं कि क्या राजदीप सरदेसाई को आतंकी संगठन ISIS का PR यानि पब्लिक रिलेशन हैंडल करना चाहिए?

क्या यह शर्मनाक नहीं है? हर ग़लत पर चुप रहने वाले मोदी समर्थकों और भाजपा समर्थकों से पूछा जाना चाहिए कि क्या वे इसी भारत की चाह रखते हैं? क्या उन्हें इसमें कुछ भी ग़लत नहीं दिखता?

प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री अमित शाह हों या सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इनमें से किसी ने अपनी पार्टी के पदाधिकारी के इस ओपिनियन पोल पर कुछ नहीं कहा है। ज़ाहिर है उन्हें भी ग़लत नहीं लगता होगा। ऐसा तो हो नहीं सकता कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं होगी। अमित मालवीय का ट्विट नहीं देखा होगा। बल्कि वे अमित मालवीय को फोलो भी करते होंगे।

क्या भारत सरकार और भारतीय जनता पार्टी इस स्तर पर आ गई है?

बीजेपी के आधिकारिक मंच से आधिकारिक रूप से पत्रकारों की निशानदेही हो रही है।

राजदीप सरदेसाई ने हाल ही में इंडिया टुडे की तारीफ़ की थी कि वहाँ अभिव्यक्ति को कभी दबाया नहीं जाता। अरुण पुरी की तारीफ़ की थी। उस वक्त किसी ने चैनल का एक ईमेल लीक कर दिया था जिसमें सोशल मीडिया पर न बोलने की तरफ़ इशारा किया था। राजदीप ने तुरंत अपने समूह का बचाव किया।

लेकिन अब उनके बोलने को चुप कराने के लिए बीजेपी के सोशल मीडिया के राष्ट्रीय प्रभारी ओपिनियन पोल करा रहे हैं तो इंडिया टुडे की आवाज़ गुम हो गई। वहाँ राजदीप के साथ काम करने वाले किसी एंकर की ज़ुबान से इसके विरोध में कुछ नहीं निकला है। क्या उन एंकरो को वाक़ई उनके साथ काम करने वाला एक वरिष्ठ एंकर आतंकी संगठन का पी आर लगता है? शर्मनाक है।

क्या आपको इसमें कोई पैटर्न नज़र नहीं आ रहा है?

पत्रकारिता ख़त्म कर दिए जाने के बाद पत्रकारों को ख़त्म किए जाने की बारी है।

आपको सब कुछ मज़ाक़ लग रहा है तो आप बीमार हो गए हैं। आई टी सेल ने आपकी सोच को समाप्त कर दिया है।

यह लिख रहा हूँ ताकि याद रहे कि आपकी आँखों के सामने ये सब हो रहा था।

मीडिया की औपचारिक समाप्ति तो कब की हो चुकी थी। बस आपके भोलेपन का लाभ उठा कर आपसे अख़बारों के पैसे वसूले जा रहे हैं और टीवी के सामने आपको बिठा कर वक्त वसूला जा रहा है।

भारत का मीडिया भारत के अर्जित लोकतंत्र का हत्यारा है।

इसे ख़त्म किया गया ताकि आपको ख़त्म किया जा सके।

अफ़सोस। बेहद अफ़सोस।

रवीश कुमार

(रवीश कुमार के सत्यापित फेसबुक पेज से साभार)

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One comment

  1. I’m not agree with you as well as Mr Jastice katzu, Being as a judge he should think about nation as well.If everybody start rioting and pelting stone on securities and burning the private properties and public properties then what you think as a Chief justice. in democracy it is rights of people’s to burn thproperties, ànd make riot and disrupt the country???
    It is really shame your comments being chief Justice.I feel shame about you.
    If such nuisance is continue then India would be a democratic country??
    I

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