राहुल और प्रियंका गांधी को गिरफ़्तार करना सरकारी गुंडागर्दी का ताज़ा उदाहरण- शाहनवाज़ आलम

Police lathi-charge on Rahul Gandhi convoy

अखिलेश बताएं कि वो बहन बेटियों के सम्मान के लिए लड़ने के बजाए लन्दन में क्या कर रहे हैं

लड़ने के बजाए मौज-मस्ती करना अखिलेश यादव की पहचान बन चुकी है

लखनऊ 1 अक्टूबर 2020, लखनऊ।अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हाथरस जाते समय गिरफ़्तारी की कठोर निंदा की है।

कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाहनवाज़ आलम ने कहा कि योगी सरकार न तो पीड़ितों की आवाज़ सुनती है और ना तो पीड़ितों की आवाज़ उठाने वालों को ही पीड़ितों से मिलने देती है। सरकार को बताना चाहिए कि उसे हाथरस की बेटी के परिवार से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को मिलने देने से क्या दिक़्क़त थी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने राहुल और प्रियंका को गिरफ्तार कर साबित कर दिया है कि उन्हें लोकतंत्र की परिपाटी में यकीन नहीं है। मुख्यमंत्री जी को याद रखना चाहिए कि उनकी पुलिस ने राहुल गांधी जी का गिरेबान नहीं पकड़ा है बल्कि देश की 130 करोड़ आबादी की भावनाओं की तर्जुमानी करने वाले महानायक का गिरेबान पकड़ा है। अवाम इस सरकारी गुंडागर्दी का हिसाब चुनाव में लेगी।

 शाहनवाज़ आलम ने कहा कि पिछले तीन दिनों से योगी जी ने पुलिस को सिर्फ़ कांग्रेस के नेताओं की आवाज़ दबाने में लगा रखा है। अगर उनकी पुलिस बलात्कारियों के ख़िलाफ़ कार्यवाई में यही तत्परता दिखाती तो प्रदेश की महिलाएं डर और दहशत में जीने को मजबूर नहीं होतीं।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि आंकड़ों के आधार पर समाजवादी पार्टी मुख्य विपक्षी दल है, लेकिन सपा मुखिया अखिलेश यादव बहन बेटियों और किसानों की लड़ाई सड़क पर उतर कर लड़ने के बजाए लन्दन से ट्वीट कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जी को बताना चाहिए कि वो लन्दन में क्या कर रहे हैं। क्या वो भाजपा के डर से लन्दन चले गए हैं या फिर हमेशा की तरह जनता को मुसीबत के समय छोड़ कर मौज मस्ती करने की आदत के चलते लन्दन गए हैं जैसा कि उन्होंने मुज़फ्फरनगर नगर दंगों के समय किया था जब मुसलमान एक तरफ मारे जा रहे थे और दूसरी तरफ उनका पूरा परिवार सैफ़ई में नाच देखने में मशगूल था।

Instead of fighting, having fun has become the hallmark of Akhilesh Yadav

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