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चन्दौली में कोरोना को लेकर मचा है हाहाकार, स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन पंगु : अजय राय

चन्दौली स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर आईपीएफ ने उठाया सवाल

चन्दौली, 16 मई 2021. आईपीएफ ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिला प्रशासन पंगु हो गया है।

आईपीएफ नेता अजय राय ने एक बयान में कहा कि देश के रक्षा मंत्री के गृह जनपद व केन्द्रीय कौशल विकास मंत्री संसदीय क्षेत्र और मान्यता प्राप्त एक मंत्री भी गृह जनपद होने के बाद भी लगभग वेंटिलेटर विहीन हैं। कोविड अस्पताल और कोविड मरीजों की मौत लगातार हो रही हैं, अस्पताल सुविधा विहीन हैं।

उन्होंने कहा कि चन्दौली जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद हाहाकार मचा है और स्वास्थ्य विभाग जांच के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति कर रही है। गाँवों में न तो डॉक्टर जा रहे हैं और न तो दवाई का वितरण और न ही टेस्टिंग हो रही है। जनप्रतिनिधि घरों में आइसोलेटेड हैं।

आईपीएफ नेता ने कहा कि चन्दौली जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने एक चन्दौली में कमलापति त्रिपाठी सरकारी अस्पताल व चकिया में चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय को कोविड -2 के मरीजों के लिए 150 बेड की व्यवस्था किया है। गम्भीर कोविड के मरीजों के लिए कोविड के मरीजों के लिए कोविड-3 की कोई व्यवस्था नहीं है। वेंटिलेटरों की संख्या बहुत कम हैं मात्र तीन की जानकारी मिल रहीं है, वह भी चन्दौली के कमला पति त्रिपाठी जिला अस्पताल में हैं, चकिया के जिला संयुक्त चिकित्सालय में एक भी नहीं हैं।

श्री राय ने कहा कि पंचायत चुनाव के बाद कोरोना का प्रभाव शहरों कस्बों के गाँव में बड़ी तेजी से फैल रहा है। कुछ गाँव में तो एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गयी हैं। चन्दौली जनपद के ही शहावंगज ब्लॉक के डुमरी गाँव में करीब 15 दिनों के अंदर 11 मरीजों की मौत हो गयी। शुरुआत में नंदलाल मोर्या के पुत्र आनंद मोर्या की तेज बुखार व सांस लेने से दिक्कत हुयी समुचित इलाज न मिलने से मौत हुयी फिर तो सिलसिला शुरू हो गया। देखते-देखते रामसेत मोर्या, शकुन्तला देवी, लालजी चौहान, मराछी, रामराज मोर्या, कामदेव पाण्डेय, प्रभु नारायण, बिन्दा चौवे, पुष्पा और कुमार की मौत हो गयी लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने जांच व दवाई वितरण के नाम पर केवल खानापूर्ति हुयी हैं न तो जांच के लिए पूरे गाँव के लोगों की सैम्पलिंग लिया गया है और न ही गाँव में साफ सफाई, सेनेटाइजेशन की व्यवस्था की गयी है उसी चकिया के सरफुदिन खान, साइमा खातुन, महबुब आलम, शिवा पटेल, लल्लन, चन्द्रमनी कुशवाहा, संजय श्रीवास्तव सहित कई लोगों की आक्सीजन व वेंटिलेटर की अभाव में मौत हुयी! चकिया ब्लॉक के ही कुशही गाँव में एक ही परिवार के रामसेवक यादव, रामजन्म यादव की मौत हुयी!

उन्होंने कहा कि यही हाल सभी ब्लॉक का है जहाँ मरीजों की संख्या की भरमार है। ऑक्सीजन दवाई इलाज के अभाव में लोगों की मौतों का सिलसिला शुरू है। और चन्दौली स्वास्थ्य विभाग पुरी तरह से पंगु है। अपने कोविड अस्पताल में न कोई व्यवस्था दे पा रहा है और न ही निजी अस्पतालों पर अंकुश है। निजी अस्पताल मरीजों को लूट रहे हैं। एक-एक बेड का चार्ज 25 हजार लिया जा रहा है। जांच के नाम रेपिड जांच हो रहा है और उस जांच में ज्यादातर निगेटिव रिपोर्ट आ रहा है, वहीं मरीजों का PCR जांच हो रहा है तो पॉजिटिब रिपोर्ट आ रहा हैं तब तक कोविड मरीजों का हालत खराब हो जा रहा है।

आईपीएफ नेता ने कहा कि लॉकडाउन है, लेकिन मरीजों के परिवार वाले को खाने की व्यवस्था यह जिला प्रशासन नहीं कर रहा है, किचन कम्युनिटी चलाकर गरीबों को भोजन देने की बातें दूर हैं। गम्भीर कोविड के लक्षण दिखाई देने वाले मरीजों को अस्पताल आने में असमर्थ हैं उनका तक घर जाकर PCR की जांज नहीं हो पा रही है। उदाहरण के रूप में समाजसेवी अजय राय की पत्नी गीता राय जो चकिया कस्बे की निवासी हैं उनका तक PCR जांच घर जाकर कर नहीं हो पायी है!

उन्होंने कहा कि कोविड-2 में मरीजों का इलाज नर्स व वार्ड ब्याय के द्वारा हो रहा है जबकि ओपीडी बंद है वरिष्ठ डॉक्टर की टीम बनाकर हो सकता है। कोविड-2 में गंदगी की भरमार है, क्योंकि चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय के सफाई कर्मचारियों, जो संविदा पर हैं, उन्होंने हड़ताल कर दिया कि हम इतना कम वेतन पर जान जोखिम न डालेंगे! जबकि स्थाई सफाई कर्मचारियों की कमी हैं!

श्री राय ने कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी लगातार बनी हुई है, जबकि रामनगर व मुगलसराय में छ: ऑक्सीजन पंलाट निजी हैं, जहां लगातार खुलेआम ऑक्सीजन की कालाबाजारी हो रही है। अभी जिला प्रशासन अधिग्रहण कर लेता तो ऑक्सीजन की किल्लत बनारस व चन्दौली में दूर हो जाता! सरकारी आकड़ा यह है कि चन्दौली जनपद में कोविड मरीजों की संख्या 15422 है। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 13455 और एक्टिव मरीज की संख्या 1720 हैं! 251मरीज की मौत हुयी है। यह सरकारी आकड़ा है, जो जमीनी सच्चाई से परे है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार चंदौली जिले की जनसंख्या 19.527 लाख है।

IPF questions on the negligence of Chandauli Health Department

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