क्या अमित शाह के दबाव में है चुनाव आयोग? सरमा के खिलाफ चुनाव आयोग ने अपना फैसला बदला

क्या अमित शाह के दबाव में है चुनाव आयोग? सरमा के खिलाफ चुनाव आयोग ने अपना फैसला बदला

क्या हेमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ चुनाव आयोग ने अपना फैसला बदल लिया : कांग्रेस ने उठाया सवाल

Is Election Commission under pressure from Amit Shah? Election Commission changed its decision against Sarma

Did the Election Commission change its decision against Hemant Biswa Sarma: Congress raises questions

नई दिल्ली, 4 अप्रैल। भाजपा नेता हेमंत बिस्वा सरमा पर 48 घंटे तक प्रतिबंध लगाए जाने की समयावधि को कम कर 24 घंटे कर दिए जाने के चलते कांग्रेस ने शनिवार को चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा है कि आयोग ने अपने फैसले को बदल दिया है क्योंकि सरमा को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक जनसभा को संबोधित करना है।

पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार ने पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा,

“आज हम हेमंत बिस्वा सरमा के चुनाव प्रचार की अवधि को 48 घंटे से घटाकर 24 घंटे करने के चुनाव आयोग के निर्णय पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त करने के लिए यहां उपस्थित हुए हैं।”

विपक्षी दल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के नेता हाग्रामा मोहिलरी के खिलाफ कथित तौर पर धमकाने वाली टिप्पणियां करने के आरोप में चुनाव आयोग ने असम सरकार में मंत्री और भाजपा नेता सरमा पर 48 घंटे तक प्रचार करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

चुनाव आयोग का फैसला 30 मार्च को कांग्रेस द्वारा दायर की गई शिकायत के मद्देनजर आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि सरमा ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का दुरुपयोग करके मोहिलरी को जेल भेजने की धमकी दी थी।

हालांकि, शनिवार को जारी एक नए आदेश में चुनाव आयोग ने असम विधानसभा चुनाव में सरमा के प्रचार करने पर रोक लगाए जाने की समयावधि को 48 घंटे से घटाकर 24 घंटे कर दिया।

इस फैसले की आलोचना करते हुए कुमार ने कहा,

“24 घंटे से भी कम समय के भीतर चुनाव आयोग ने बिना किसी नोटिस के या शिकायतकर्ता (कांग्रेस और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट) से बात किए बिना अपने फैसले को पलट दिया।”

उधर कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट (Smt Priyanka Gandhi’s Tweet) किया,

“चुनाव आयोग से हम भाजपा नेता की गाड़ी में EVM मामले में कड़ी कार्रवाई का इंतजार कर ही रहे थे कि आयोग के एक और कदम से ऐसा लगता है कि उसने अपनी रुलबुक से निष्पक्षता वाला पेज फाड़के फेंक दिया है।

आखिर किस दबाव में धमकी देने वाले भाजपा नेता के बैन को 48 घंटे से घटाकर 24 घंटे किया गया?”

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