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लता मंगेशकर के व्यक्तित्व को फिल्मी दायरे में सीमाबद्ध करना अपराध है

It is a crime to limit the personality of Lata Mangeshkar in the film industry.

लता मंगेशकर के सुर संसार में हम सभी लोग कमोबेश शामिल रहे हैं। 92 वर्ष की आयु में भी उनके स्वर के अवसान से हम सभी दुःखी हैं। वे भारत रत्न हैं। और किसी भी राजनेता या कलाकार, साहित्यकार से ज्यादा उनकी प्रतिष्ठा और विश्वव्यापी लोकप्रियता है। लेकिन विडम्बना यह है कि हम सिर्फ फिल्मी संगीत में लता मंगेशकर की भूमिका (Lata Mangeshkar’s role in film music) की चर्चा कर रहे हैं।

समग्र संगीत जगत में लता मंगेशकर का योगदान क्या है?

भारत की संगीत परम्परा समृद्ध है और उससे ज्यादा समृद्ध है यहां की विविध बहुल लोकपरम्परायें। इस समग्र संगीत जगत में उनके योगदान पर भी चर्चा होनी चाहिए।

भारत में देश को जोड़ने और आम लोगों के हक हकूक की आवाज बुलंद करने में, सामाजिक यथार्थ के चित्रण और निरंकुश सत्ता के प्रतिरोध में लोकसंस्कृति के विकास और आधुनिक भारत के मानस के निर्माण में भी भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक भूमिका रही है। इस समग्र सांस्कृतिक आंदोलन में सुर सम्राज्ञी कहाँ थी, इसे भी रेखांकित किया जाना चाहिए।

महान विभूतियों की सामाजिक भूमिका पर भी चर्चा क्यों जरूरी है?

क्रिकेट ही या साहित्य या संगीत,इस क्षेत्र में स्टार सुपरस्टार अनेक हुए हैं, लेकिन भावनाओं से इतर ऐसी महान विभूतियों की सामाजिक भूमिका पर भी चर्चा बेहद जरूरी है ताकि नई पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सकें

विद्वतजन इस पर विशद चर्चा करें तो आभारी रहेंगे।

खासकर जिन स्त्रियों के होंठों को उन्होंने आवाज दी, उनकी अस्मिता और उनके हक हकूक की लड़ाई में उनकी क्या भूमिका है, इस पर चर्चा जरूरी है।

ऐसी महान विभूति के व्यक्तित्व को फिल्मी दायरे में सीमाबद्ध करना अपराध है।

पलाश विश्वास

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हमारे बारे में पलाश विश्वास

पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग पलाश जी हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

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