यह फरेब और धोखा है कि बिना जांच, इलाज के सिर्फ लॉक डाउन से कोरोना खत्म होगा

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

It is deceit and deception that without investigation, treatment, only the lock down will end the corona

यह फरेब और धोखा है कि बिना जांच, इलाज के सिर्फ लॉक डाउन से कोरोना खत्म होगा।

अपनी नाकामी पर पर्दा डालने की बेशर्म कोशिश ने पूरे देश में संक्रमण का खतरा बढ़ाया है। अर्थव्यवस्था तनहा की और आम लोगों के लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।

इस तुगलकी फरमान से देश के लोग कश्मीर, पूर्वोत्तर और आदिवासी भूगोल का दर्द समझ सकते हैं बशर्ते कि इस अंधा युग में दिल और दिमाग सही सलामत हो।

नोटबन्दी का स्वागत करके रोने का अनुभव बहुत पुराना भी नहीं है।

पलाश विश्वास