तिरंगे का महत्व समझने में भाजपा को आजादी के बाद के 75 साल लग गये : कांग्रेस

तिरंगे का महत्व समझने में भाजपा को आजादी के बाद के 75 साल लग गये : कांग्रेस

It took BJP 75 years after independence to understand the importance of tricolor: Congress

रायपुर/01 अगस्त 2022। आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर देशभर में तिरंगा फहराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम (Mohan Markam State president Chhattisgarh Congress) ने कहा है कि भाजपा को तिरंगे का महत्व समझने में आजादी के बाद के 75 साल लग गये। भाजपा को झंडा फहराने का काम आरएसएस मुख्यालय नागपुर और देशभर के संघ कार्यालयों से शुरू कर प्रायश्चित करना चाहिये। जिनका भारत की आजादी की लड़ाई में रत्ती भर का योगदान नहीं हो, आज वही आजादी के अमृत महोत्सव के बहाने खुद के चेहरे पर पुती कालिख को जगमग सफेदी बताने की असफल कोशिशों में जुटा है।

श्री मरकाम ने कहा कि देश की आन-बान-शान का प्रतीक रहे तिरंगा को भाजपा ने देश के लिये अपशगुन बताया था तथा आजादी के बाद 50 सालों तक आरएसएस के मुख्यालय नागपुर में तिरंगा नहीं फहराया जाता था। आजादी का अमृत महोत्सव के नाम पर राष्ट्रभक्ति की नौटंकी करने वाले भाजपाई आजादी की लड़ाई में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को विरोध करते थे।

उन्होंने कहा कि अब जब कि भाजपा के नेताओं को यह अहसास हो गया है कि भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी आंदोलन आजादी की लड़ाई थी तथा सबसे बड़े देश भक्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे तब आजादी की लड़ाई के आंदोलन का विरोध करने के अपने पूर्वजों के कृत्यों के लिये भाजपा को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिये।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर तमाशा दिखाने की कोशिश में वो लोग हैं जो आजादी की लड़ाई में तमाशबीन ही थे। जिनके पुरखे प्राण प्रण से लगे थे कि कांग्रेस द्वारा चलाया जा रहा आजादी का यह आंदोलन किसी भी कीमत पर विफल हो जाये। देश की आजादी के समय जिनके पूर्वजों ने 15 अगस्त 1947 को देश भर में काला झंडा फहराने का आह्वान किया था यदि आज वे आजादी के अमृत महोत्सव पर तिरंगा फहराने की बात कर रहे तो उनसे सवाल तो पूछा जाएगा आप अपने पुरखों के दरिद्र इतिहास पर पर्दा डालने की कोशिश में लगे है।

श्री मरकाम ने कहा कि वह तिरंगा, जिसे आरएसएस ने कभी भारतीय ध्वज नहीं माना, उसके तीन रंगों को अशुभ और उसमें बने चक्र को अभारतीय बताया, जिसे आजादी के बाद के 52 वर्षों तक उसने कभी नहीं फहराया, जिसने भारत के संविधान का विरोध किया, जिसने स्वतंत्रता प्राप्ति के दिन 15 अगस्त 1947 को देश भर में काले झंडे फहराने का आव्हान किया, नाथूराम गोडसे सहित जिससे जुड़े लोगों ने आजादी मिलने के पांच महीनों के भीतर ही महात्मा गांधी की हत्या करवा के स्वतंत्र राष्ट्र को अस्थिर करने की कोशिश की, आज वही राष्ट्रवाद और देशभक्ति को शोर मचाकर खुद को देश भक्त साबित करने की जुगत में लगे हैं।

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