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Dangerous politics of television

सीरियल संस्कृति, राजनीति और विचारधारा : टेलीविजन की खतरनाक राजनीति

Jagadishwar Chaturvedi was live on 6th April 2020

टीवी एक माध्यम के रूप में जहां भी TV  गया, स्वभावतः वह कंजर्वेटिव है। टीवी ने समाज में तरह तरह के घेटो तैयार किए।

अमेरिका के समाज में हजारों घेटो मिलेंगे

टीवी की अंतर्वस्तु महत्वपूर्ण नहीं है।

सोवियत संघ में टीवी का सबसे बड़ा नेटवर्क था। सोवियत संघ पहला राष्ट्र था जिसने घर घर टीवी पहुंचाया और सोवियत संघ पहला राष्ट्र था जो 10 टुकडटों में बिखर गया।

सीरियल कल्चर के जरिए किस तरह का समाज विकसित हुआ।

हिंदी टेलीविजन आने के क्या परिणाम निकले।

टीवी ने समाज को क्या नुकसान पहुंचाया

क्या टीवी समाज का एकीकरण करता है ?

टीवी का जैसे जैसे विस्तार होता गया, कांग्रेस सिकुड़ती गई

टेलीविजन की खतरनाक राजनीति है।

सीरियल कल्चर सबसे पहले तमिलनाडु में शुरू हुआ, वहीं लगातार दलितों पर हमले बढ़े हैं।

टेलीविजन की संस्कृति व्यक्ति और व्यक्ति के बीच में घृणा और अलगाव पैदा करती है। देखते आप हम लोग हैं लेकिन बनते पराए लोग हैं।

टेलीविजन का काम है सांप्रदायिक विभाजन करना, राष्ट्रीय एकीकरण टेलीविजन का लक्ष्य नहीं है।

टेलीविजन सीरियल को देखने वाले अमूमन असांस्कृतिक होते हैं।

टीवी अगर चलता रहेगा तो हिन्दू बनता रहेगा, आपके घर में सामाजिक का विभाजन होता रहेगा। भाजपा रहे या न रहे धार्मिक असहिष्णुता रेगी।

टेलीविजन जिसे नायक बनाता है, उसे खलनायक भी बनाता है।

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

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