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जेलें जितनी खाली की जा सकती हैं की जाएँ; एक पूर्व मीसाबन्दी और जेलयात्री कार्यकर्ता की अपील

श्री शिवराज सिंह जी

मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन, भोपाल

एक पूर्व मीसाबन्दी और जेलयात्री कार्यकर्ता की अपील

जेलें जितनी खाली की जा सकती हैं की जाएँ

मान्यवर

बेलगाम हुयी कोरोना की महामारी के देश प्रदेश की जेलों में भी पहुँच जाने की अप्रिय और अशुभ खबरें आ रही हैं। अपने जेल अनुभवों के आधार पर दो बातें आपसे साझा करना प्रासंगिक होगा।

एक- जेल में कोरोना पहुंचना मुश्किल नहीं। संतरी से लेकर जेलर, अधीक्षक, डॉक्टर कम्पाउण्डर तक सारा जेल स्टाफ, सिविल और इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस का पीडब्लूडी स्टाफ, खाकी हो या बाकी, सब बाहर से आता है और कारागार में निरुध्द बंदियों के निकट संपर्क में रहता है। जेल के बाहर से आने वाले और जेल में अपनी अपनी ड्यूटी से वापस बैरक में पहुँचने वाले बंदियों की जामा तलाशी – फ्रिस्किंग – हाथों से छूकर की जाती है। इसके अलावा सब्जी, दूध, राशन की नियमित आपूर्ति भी बाहर से लाई जाती है। इसलिए जेल में कोरोना का पहुंचना कोई मुश्किल बात नहीं है।

दो- चूंकि जेल एक अवरुद्ध स्थान है, जिला और अन्य छोटी जेलें तो और भी कम फैलाव में हैं और बिना किसी अपवाद के सभी जेलों में उनकी क्षमता के मुकाबले कहीं ज्यादा बंदी है इसलिए दैहिक दूरी – फिजिकल डिस्टेंसिंग – का सवाल ही नहीं उठता।

ऐसी स्थिति में हमारा आग्रह है कि कोरोना की महाआपदा को देखते हुए मध्यप्रदेश की जेलों में बंद कैदियों की संख्या में कमी लाने के लिए जरूरी निर्णय लिए जायें।

1- ह्त्या. दहेज़ ह्त्या और प्रताड़ना, बलात्कार, दलित तथा आदिवासी उत्पीड़न और आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी के मामलों में बंद लोगों को छोड़कर बाकी सबकी जेल से रिहाई के बारे में उपाय उठाये जाएँ। इनमें कुछ इस प्रकार हो सकते हैं;

2- सभी जमानत योग्य अपराधों में तत्काल, एक आदेश से, जमानत देकर, जिनकी जमानत जमा करने की हैसियत नहीं है उन्हें मुचलके पर छोड़कर विचाराधीन बंदियों की संख्या कम की जाये।

3- मुकद्दमों के प्रकार और काटी गई जेल अवधि के आधार पर आम रिहाई दी जाए।

4 – बड़ी सजाओं में जिन्होंने 10 वर्ष से अधिक सजा काट ली है और जिनका बर्ताब अच्छा या संतोषजनक रहा है। उन्हें स्थिति सामान्य होने तक मुचलके पर छोड़ा जाना भी एक विकल्प हो सकता है। 

5 – इनके अलावा जो शेष बच जाते हैं उन सबका तथा जेल स्टाफ का नियमित चेकअप किया जाए। उन्हें टीके लगाए जाएँ।

पूरा विश्वास है कि इन सुझावों पर विचार कर उन पर अमल के निर्देश जारी करेंगे।

सादर शुभकामनाओं सहित

पूर्व मीसाबंदी तथा राजनीतिक कारणों से करीब साढ़े तीन वर्ष तक जेल काटने वाला आपका प्रदेश वासी

बादल सरोज

सम्पादक लोकजतन संयुक्त सचिव अखिल भारतीय किसान सभा

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