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झारखंड : बिजली विभाग की लापरवाही से हुई मौत के मामले में एनएचआरसी ने दिया एक लाख रूपये मुआवजा देने का आदेश

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hastakshep
15 Feb 2021
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी सीएसआईआर और केवीआईसी की संयुक्त पहल

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Jharkhand: NHRC orders compensation of one lakh rupees in case of death due to negligence of the electricity department

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झारखंड के दुमकाजिला के रामगढ़ थानान्तर्गत बौड़िया गांव में 3 अगस्त, 2017 को प्राईवेट बिजली मिस्त्री रवि कुमार की करेंट लगने से हुई मृत्यु के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झारखंड सरकार को 15 फरवरी, 2021 को मृतक रवि के परिवार को 6 सप्ताह के अंदर एक लाख रूपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

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मालूम हो कि 3 अगस्त, 2017 को प्राईवेट बिजली मिस्त्री रवि कुमार अपने कुछ साथियों के साथ दुमका जिला के रामगढ़ थानान्तर्गत बौड़िया गांव में बिजली लाइन ठीक करने गया था। रवि ने रामगढ़ स्थित पावर हाउस से शट डाउन लेने के बाद लाइन पर काम शुरु किया था। काम पूरा होने के बाद वह जैसे ही ट्रांसफार्मर पर फ्यूज बांधने के लिए चढ़ा, तो किसी ने पावर हाउस से लाइन चालू कर दी। इससे 11 हजार वोल्ट की लाइन में करेंट दौड़ा और दर्जनों लोगों के सामने देखते-देखते रवि की मौत हो गयी।

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यह खबर जब स्थानीय अखबार 'दैनिक हिंदुस्तान' में प्रकाशित हुई, तो इसे आधार बनाते हुए 'मानवाधिकार जन निगरानी समिति' के झारखंड राज्य संयोजक ओंकार विश्वकर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को 5 अगस्त, 2017 को एक आवेदन दिया, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा अब तक प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गयी? साथ ही उक्त मामले पर न्यायिक जांच कर कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को 5 लाख रूपये मुआवजा भुगतान करने की मांग भी की।

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 24 अगस्त, 2017 को मानवाधिकार कार्यकर्ता ओंकार विश्वकर्मा के आवेदन पर संज्ञान लेते हुए दुमका एसपी व झारखंड के उर्जा विभाग के सचिव से 4 सप्ताह के अंदर इस मामले पर रिपोर्ट मांगी। जिसका जवाब देते हुए झारखंड के उर्जा विभाग के सचिव ने 14 मई, 2019 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजा, जिसमें लिखा था कि रवि कुमार गैर-कानूनी तरीके से बिजली के पोल पर चढ़ा था, इसके लिए व अधिकृत भी नहीं था।

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इसके बाद भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और झारखंड के उर्जा मंत्रालय के बीच कई बार पत्र का आदान-प्रदान हुआ और एक प्राथमिकी भी दर्ज हुई।

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अंततः राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने माना कि बिजली विभाग के जरिए सुरक्षा की अनदेखी की गयी है और काफी लापरवाही बरती गयी है, जो कि मानवाधिकार का उल्लंघन है। इसलिए 15 फरवरी, 2021 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार (लाॅ) इन्द्रजीत कुमार ने झारखंड के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि मृतक रवि कुमार के परिवार को एक लाख रूपये का आर्थिक मुआवजा 6 सप्ताह के अंदर दिया जाय।

रूपेश कुमार सिंह

स्वतंत्र पत्रकार  

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