झारखंड ने मोदी-शाह को दिखाया आईना

नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2019 (सी.एस. राजपूत ). झारखंड का विधानसभा चुनाव (Assembly elections in Jharkhand) एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रहे आंदोलन (Movements against NRC and Citizenship Amendment Act) के बीच हुआ है। आंदोलन सही था या फिर गलत इसका निर्णय बहुत हद तक झारखंड चुनाव के परिणाम से भी होना था। इतना ही नहीं मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल के कारनामे भी इस आंदोलन में समाहित थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी झारखंड चुनाव प्रचार में धारा 370 धारा का हटाना, तीन तलाक पर बिल लाना, राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो जाना, ये सभी अपनी उपलब्धियों का बखान झारखंड चुनाव प्रचार में किया।

यह परिणाम इसलिए भी महत्व रखता है क्योंकि नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को भाजपा जनता की आवाज मानने को तैयार नहीं है। भाजपा अब भी इस आंदोलन को विपक्ष द्वारा उकसाया गया मुस्लिमों का आंदोलन मानकर चल रही है। यही वजह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली रामलीला मैदान से आंदोलन को विपक्ष विशेषकर कांग्रेस द्वारा प्रायोजित बताया। हालांकि केंद्र सरकार ने विरोधियों से सुझाव मांगे हैं पर मोदी सरकार जो कुछ कर रही है वह सब सही मानकर चल रही है।

Jharkhand assembly election result analysis

झारखंड विधानसभा चुनाव परिणाम में हेमंत सोरेन की अगुआई वाला महागठबंधन ने 41 के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है।

मलतब झारखंड में भी भाजपा का सत्ता से बाहर हो चुकी है। महाराष्ट्र के बाद अब झारखंड में भी भाजपा (BJP) सत्ता से बाहर हुई है। मतलब एक साल में भाजपा ने छह प्रदेश खोये हैं।

ज्ञात हो कि मार्च 2018 में 21 राज्यों में भाजपा (BJP) या उसके सहयोगियों की सरकार थी, लेकिन दिसंबर 2019 आते-आते यह आंकड़ा सिमटकर 15 राज्यों तक पहुंच गया है। जो लोग प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी के कार्यकाल को सराह रहे हैं, उन्हें भाजपा की गत साल की स्थिति देख लेनी चाहिए औेर आज की भी। मतलब साफ है कि गत साल में ही झारखंड समेत पांच राज्य भाजपा के हाथ से निकल चुके हैं।

ज्ञात हो कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा (BJP) नरेंद्र मोदी की अगुआई में प्रचंड बहुत के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई थी। वह मोदी की बढ़ती लोकप्रियता ही थी कि इसके बाद तो भाजपा (BJP) एक के बाद एक राज्यों के चुनावों में फतह हासिल करती गई। 2014 में भाजपा (BJP) की अगुआई वाले राजग (NDA) की सिर्फ 7 राज्यों में सरकार थी। यहां से भाजपा (BJP) के चरम की शुरुआत हुई। पार्टी एक के बाद एक राज्यों को फतह करती चली गई। उसी साल हुए महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव (Maharashtra and Haryana Assembly Elections) में भाजपा (BJP) ने जीत का परचम लहराया था। जब 2017 में कांग्रेस और सपा के गठबंधन के साथ ही बहुजन समाज पार्टी को शिकस्त देते हुए भाजपा ने देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण प्रदेश उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ फतह हासिल की तो भाजपा (BJP) का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था। यही वजह थी कि 2018 आते-आते 21 राज्यों में भगवा रंग की पताका लहरा गई। इन राज्यों में या तो भाजपा (BJP) की सरकार थी या फिर उसके गठबंधन वाली सरकार।

एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ चुनाव बाद तेजी से गिरा भाजपा (BJP) का ग्राफ :

मार्च 2018 में जहां 21 राज्यों में भाजपा (BJP) की सरकार थी, वहीं साल बीतते-बीतते तस्वीर तेजी से बदली। भले ही इसमें किसान आंदोलन का बहुत बड़ा योगदान रहा हो पर 2018 के आखिर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में भाजपा (BJP) सत्ता से बाहर हो गई। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो करीब डेढ़ दशकों से पार्टी का एकछत्र राज था।

हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले से भी बड़ी जीत हासिल कर 303 सीटें जीतीं तो भाजपा फिर से बौराने लगे। केंद्र में एक बार फिर मोदी सरकार बनने के बाद अक्टूबर में हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे आए।

महाराष्ट्र में भाजपा (BJP)-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला लेकिन सीएम पद को लेकर ऐसी पेच फंसी कि सूबा भाजपा (BJP) से छिटक गया और शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे एनसीपी-कांग्रेस के सहयोग से मुख्यमंत्री बन गए। हालांकि, हरियाणा में भाजपा (BJP) किसी तरह जेजेपी के साथ हाथ मिलाकर सत्ता बरकरार रखने में कामयाब हो गई। अब 2019 बीतते-बीतते झारखंड भी भाजपा (BJP) के हाथ से फिसल गया है।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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