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जितिन प्रसाद : अखिलेश ने दुत्कारा तो भाजपा ने गले लगाया

भाजपा में जाने का आखिरी दाव: जितिन से नाराज थे कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता

लखनऊ, 10 जून 2021. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने भाजपा ज्वाइन कर ही ली। जितिन प्रसाद के भाजपा में चले जाने से कांग्रेस पर तो उतना ही असर पड़ेगा जितना टॉम बडक्कन के भाजपा में जाने से पड़ा था, लेकिन उनकी भाजपा में आमद से भाजपा की कलह खुलकर सामने आ गई है।

हालांकि जितिन प्रसाद को लेकर इसके पहले भी कई बार भाजपा और सपा में जाने की खबरें मीडिया में जमकर चली थीं। सिर्फ इतना ही नहीं यूपी कांग्रेस की जिला इकाई लखीमपुर खीरी ने तो बाकायदा एक प्रस्ताव भी पारित कर दिया था कि जितिन प्रसाद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।

सूत्रों के मुताबिक जितिन प्रसाद ने यूपी कांग्रेस नेतृत्व से कुछ वरिष्ठ नेताओं के जरिये माफी मांगी थी और कांग्रेस संगठन में जिम्मेदारी चाहते थे, जिसके बाद वह बंगाल के प्रभारी बनाए गए।

बंगाल चुनाव में भी जितिन प्रसाद सक्रिय नहीं रहे और पंचायत चुनाव में पारिवारिक हार से जितिन प्रसाद राजनीतिक भविष्य की तलाश में थे।

अखिलेश से मिले थे जितिन प्रसाद, पर बात नहीं बनी

लखनऊ के सत्ता के गलियारों में यह चर्चा आम है कि पिछले दिनों जितिन प्रसाद ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी लेकिन अखिलेश यादव उन्हें पार्टी में लेने के पक्ष में नहीं थे। लखनऊ के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि अखिलेश यादव यूपी की सियासत में जितिन प्रसाद की हैसियत बखूबी जानते हैं कि तराई बेल्ट में अब प्रसाद जिला पंचायत सदस्य तक जिताने की हैसियत में नहीं हैं। सम्भवतः भाजपा जितिन प्रसाद के जरिये ब्राह्मण विरोध कम करना चाहती है, इसमें वह कितना सफल होगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

सोशल मीडिया पर बाजार गर्म : कई आरोप और ब्राह्मण हुए नाराज

जितिन प्रसाद के ऊपर ब्राह्मण चेतना परिषद के जरिये ब्राह्मणों को धोखा देने का आरोप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कई फेसबुक एकाउंट से ऐसी पोस्टें शेयर हो रहीं हैं।

जितिन की हैट्रिक हार : नाम बड़ा दर्शन छोटे

जितिन प्रसाद को मृतक आश्रित कोटे से कांग्रेस ने केंद्र में मंत्री बनाया लेकिन 2014 से लगातार जितिन प्रसाद को अपनी पैतृक सीट पर हार ही नसीब हुई है। 2014 में जितिन प्रसाद लोकसभा का चुनाव हारे। फिर 2017 का विधानसभा। पिछली लोकसभा में जितिन प्रसाद के भाजपा में जाने की खबर चली थी लेकिन बात नहीं बनी और जितिन प्रसाद कांग्रेसी उम्मीदवार के बतौर चुनावी मैदान में उतरे और जीत हार के खेल से दूर तीसरे नम्बर पर रहे। इतने सब कुछ के बाद कांग्रेस ने उन्हें बंगाल का प्रभारी बनाया था। जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि बीते पंचायत में जितिन प्रसाद अपने क्षेत्र में अपने उम्मीदवार को हज़ार वोट भी नहीं दिला पाए।

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