कुदरत को दिया गया ईश्वर का वरदान है जूही का फूल

Juhi flower is the gift of God given to nature

जूही जिसे मालती, चमेली इत्यादि नामों से भी जाना जाता है, अंग्रेजी में इसका नाम जैसमीन (Jasmine) है जो फारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है-सुगंधित फूल, लड़कियों के नाम के लिए जूही भारत में बेहद प्रचलित है। थाईलैंड में जैसमीन फूल को मां और पवित्र देवी का प्रतीक माना जाता है। इंडोनेशिया और पाकिस्तान का यह राष्ट्रीय फूल है। हिमालय का दक्षिणवर्ती प्रदेश जूही का मूल स्थान है। भारत से यह पौधा अरब लोगों द्वारा उत्तर अफ्रीका, स्पेन और फ्रांस पहुंचा। इस फूल की 200 से अधिक प्रजातियां हैं और लगभग 40 प्रजातियां और 100 किस्में भारत में नैसर्गिक रूप से उपलब्ध हैं।

जूही के फूल का वानस्पतिक नाम : जास्मिनम अरिकुलेटम वाहल जैस्मिनम औरिकुलटम परिवार: ओलियसी (जैस्मीन परिवार)Jasminum auriculatum Family: Oleaceae (Jasmine family)

जूही के फूल सफेद और बहुत छोटे होते हैं, जिनका सुगंध हल्की मीठी और मादक होती है। कुछ जगहों पर पीले रंग के फूलों की लताएं भी पाई जाती हैं।  जूही को कहीं-कहीं पहाड़ी चमेली भी कहा जाता है। इसका पौधा बहुत घना होता है। इस फूल की खूबसूरत बात यह है कि यह शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच खिलता है और अंधेरे में इसकी खुशबू बहुत तेजी से फैलती है। खूशबूदार होने की वजह से यह पौधा घर के अंदर भी लगाया जाता है।

हिंदू धर्म में इस फूल का संबंध भगवान शिव तथा भगवान विष्णु के साथ माना जाता है। देवी को प्रसन्न करने के लिए भी जूही के फूल से भगवान शिव की पूजा करता है उसके घर में अन्नपूर्णा का वास होता है और उसे कभी भी अन्न का अभाव नहीं होता। उत्तरप्रदेश के फरुर्खाबाद, जौनपुर और गाजीपुर जिले में इसे व्यवसायिक तौर पर काफी बड़ी मात्रा में उगाया जाता है।

Use of jasmine oil

जैसमीन तेल का प्रयोग क्रीम, शैंपू, साबुन जैसे सौंदर्य प्रसाधनों और इत्र बनाने के लिए किया जाता है। यह तेल काफी महंगा होता है क्योंकि तेल निकालने के लिए बहुत अधिक मात्रा में फूल इस्तेमाल किये जाते हैं। इन फूलों को जैतून के तेल में भिगोकर कई दिनों तक रखा जाता है। तब सही मायने में जैसमीन सत्व निकल पाता है।

इन फूलों का प्रयोग खुशबूदार चाय बनाने के लिए भी किया जाता है। आमतौर पर इन्हें काली और हरी चाय के साथ मिलाकर चाय बनाई जाती है। इस एंटीऑक्सीडेंट चाय का रोजाना प्रयोग शरीर का मेटाबल्जिम बढ़ाता है। यह चाय रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर वजन घटाने में भी मदद करती है।

Juhi flowers in Ayurveda

आयुर्वेद में जूही के फूल को ताजगी प्रदान करने वाला और शांतिदायक माना गया है। जिसकी सुंगध मात्र ही व्यक्ति को अवसाद से उबार लेती है। जूही के फूल, पत्ते और जड़ तीनों ही औषधीय कार्यों में प्रयुक्त किए जाते हैं। इस फूल में पाए जाने वाले मिथाइल अणु में कैंसर कोशिकाओं को मारने की क्षमता होती है।

अरोमाथैरेपी में इसके तेल का प्रयोग शारीरिक दर्द निवारण के लिए किया जाता है। इससे भी अधिक, यह एक शक्तिशाली एंटीसेप्टिक और टॉनिक है जो श्वांस संबंधी तकलीफों को दूर कर नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाता है।

त्वचा के रोगों के लिए भी इसे रामबाण औषधि माना गया है, लेकिन औषधि के रूप में इसकी 10 ग्राम तक की मात्रा का उपयोग ही लाभकर सिद्ध होता है।

भारत में पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में महिलाओं द्वारा अपने बालों में जूही के फूलों के गजरे का बहुतायत में उपयोग किया जाता है।

कोलकाता में इन फूलों के विक्रेता सड़क किनारे देखे जा सकते हैं, जबकि उत्तर भारत में इनका प्रयोग पूजा-अर्चना के लिए किया जाता है। कहीं-कहीं दूल्हे का सेहरा भी इन फूलों से सजाया जाता है और दुल्हन का श्रृंगार तो इन फूलों के गजरों के बिना अधूरा लगता है। जब बेटी जन्म लेती है तो मां का अपनी नन्हीं परी जूही की कली सी लगती है तभी तो उसके दिल से आवाज निकलती है:

जूही की कली मेरी लाड़ली, नाजों से पली मेरी लाड़ली, ओ आस किरण तू जुग जुग जिए, नन्हीं सी परी मेरी लाड़ली…

अगर ईश्वर ने प्रकृति की रचना करते समय पेड़, पौधों के साथ फूलों की रचना न की होती तो शायद हमें रंग ही समझ न आते। यह कैसी अद्भुत ईश्वरीय देने है जिसकी तुलना किसी और चीज से करना नामुकिन है।

भगवान ने हर रंग का फूल बनाया, तो सफेद रंग कैसे छूट जाता और यह प्रतीक बन गया पवित्रता का। सच जूही फूल कुदरत को दिया गया ईश्वर का वरदान है।

शिखा अब्रोल

चंडीगढ़ सोल-143

देशबन्धु

 

juhi flower in hindi

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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