जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने किसान आंदोलन को चीनी क्रांति जैसे ऐतिहासिक महत्व का बताया

श्री काटजू का मत है कि 15-20 वर्षों में हम आसानी से उत्तरी अमेरिका, यूरोप, जापान या चीन की तरह बन सकते हैं और अपने लोगों को उच्च जीवन स्तर प्रदान कर सकते हैं .. .. लेकिन उस ऐतिहासिक परिवर्तन को प्राप्त करने के लिए, हमारे लोगों के बीच एकता एक अत्यंत आवश्यक शर्त है, जो दुर्भाग्य से गायब है।

Justice Markandey Katju called the peasant movement of historical significance like the Chinese Revolution

नई दिल्ली, 08 दिसंबर 2020. किसानों के आव्हान पर आज भारत बंद है। सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने इस किसान आंदोलन की तुलना चीनी क्रांति से करते हुए किसान आंदोलन को ऐतिहासिक महत्व का बताया है।

हस्तक्षेप डॉट कॉम के अंग्रेजी पोर्टल पर The historical significance of the farmers’ agitation शीर्षक से लिखे अपने अंग्रेजी लेख में जस्टिस काटजू ने कहा है कि आंदोलनकारी किसान संगठनों के आह्वान पर आज 8 दिसंबर को भारत बंद के रूप में मनाया जा रहा है। मैं मानता करता हूं कि चल रहा किसान आंदोलन सिर्फ किसानों के हितों की लड़ाई नहीं है, इसका ऐतिहासिक महत्व भी है।

अपने लेख में श्री काटजू ने कहा  है कि हमारा राष्ट्रीय उद्देश्य भारत को एक अविकसित देश से एक आधुनिक उच्च औद्योगीकृत देश में बदलना होना चाहिए, जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे तब तक हम बड़े पैमाने पर गरीबी, रिकॉर्ड बेरोजगारी, बाल कुपोषण, लगभग स्वास्थ्य और स्वास्थ्य शिक्षा की कमी, आदि का दंश झेलते रहेंगे, जिससे 1.35 बिलियन लोगों की हमारी विशाल आबादी का शायद 75% से अधिक पीड़ित हैं।

हालाँकि जस्टिस काटजू मानते हैं कि यह ऐतिहासिक परिवर्तन आसान नहीं होगा, क्योंकि आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की शक्तिशाली ताकतें हैं, जो इसका कड़ा विरोध करेंगी। इसे हासिल करने के लिए लोगों के शक्तिशाली संघर्ष की आवश्यकता होगी, लेकिन इसके लिए लोगों के बीच एकता बिल्कुल आवश्यक है।

वह कहते हैं कि अभी तक हम जाति और धर्म की आधार पर विभाजित होते रहे हैं, और अपनी ऊर्जा एक सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था बनाने (जिसमें हमारे लोगों को सभ्य जीवन मिलता) के लिए संयुक्त रूप से लड़ने के बजाय अपनी ऊर्जा को एक दूसरे से लड़ने में नष्ट करते रहे हैं।

भारत में अब तक के आंदोलन आमतौर पर या तो धर्म आधारित होते थे जैसे राम मंदिर आंदोलन, या जाति आधारित, जैसे जाटों, गुर्जरों, दलितों आदि के आंदोलन।

दूसरी ओर, मौजूदा किसान आंदोलन, जाति और धर्म से ऊपर उठ गया है, और इसने कम से कम अस्थायी रूप से लोगों को एकजुट किया है। इसलिए यह ऐतिहासिक महत्व का है।

भारत के पास वह सब, तकनीकी प्रतिभा और प्राकृतिक संसाधनों का एक विशाल पूल, है जो एक उच्च औद्योगिक देश बनने के लिए आवश्यक है।

श्री काटजू का मत है कि 15-20 वर्षों में हम आसानी से उत्तरी अमेरिका, यूरोप, जापान या चीन की तरह बन सकते हैं और अपने लोगों को उच्च जीवन स्तर प्रदान कर सकते हैं .. .. लेकिन उस ऐतिहासिक परिवर्तन को प्राप्त करने के लिए, हमारे लोगों के बीच एकता एक अत्यंत आवश्यक शर्त है, जो दुर्भाग्य से गायब है। अब किसान आंदोलन ने यह एकता प्रदान की है।

वह कहते हैं कि किसानों के आंदोलन के परिणाम की भविष्यवाणी करना कि, सरकार द्वारा उनकी मांगों को स्वीकार किया जाएगा या नहीं, संभव नहीं है। लेकिन मेरे विचार में यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है। जो महत्वपूर्ण है वह यह है कि लोगों ने अपनी रचनात्मकता, और आपस में एकरूपता प्रदर्शित की है। इस प्रकार किसान आंदोलन ने दिखाया है कि हमारे सामने सबसे बड़ी बाधा, अर्थात हमारे विभेद, दूर की जा सकती है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह हमारी एकता को स्थापित करने का पहला कदम है, और कुछ निहित स्वार्थ अभी भी हमें जाति और सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने के बेताब प्रयास करेंगे, लेकिन किसानों ने दिखाया है कि इस तरह के डिजाइनों को विफल किया जा सकता है।

श्री काटजू ने अपने लेख में कहा है कि हमारे अन्नदाता भारतीय किसानों ने, जो कि हमारी कुल आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हैं, इस प्रकार इतिहास बनाया है, जैसा कि चीनी क्रांति में हुआ था।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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