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कपिल मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाने और दंगा भड़काने, उकसाने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की मांग

एमपीडीआरएफ की ओर से दिल्ली हिंसा के खिलाफ किया गया प्रदर्शन, राज्यपाल को दिया ज्ञापन

जान लेवा हमलों और दिल्ली में हो रही हिंसा की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की भी मांग

भोपाल, 26 फरवरी। भोपाल के नागरिकों ने बुधवार को मध्य प्रदेश लोकतांत्रिक अधिकार मंच के बैनर तले रंगमहल चौराहे से राजभवन की ओर मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA), राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (NPR) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC) के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन और मार्च के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया गया गया। इस ज्ञापन में मांग की गई कि दिल्ली में हो रही हिंसा का मुख्य आरोपी भाजपा नेता कपिल मिश्रा को बनाया जाये। इसके अलावा उन तमाम लोगों के खिलाफ़ दंगा भड़काने, उकसाने सहित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाई की जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में भड़काऊ बयान दिये हैं और जिससे हिंसा भड़की है।

साथ ही शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हो रहे जानलेवा हमलों और दिल्ली में हो रही हिंसा की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच, हिंसा को बढ़ावा देने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाने, इनके प्रमुखों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने, भाजपा द्वारा सत्ता का दुरुपयोग कर दमनकारी कार्रवाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है इसके राजनैतिक हस्तक्षेप पर तत्काल अंकुश लगाने, दिल्ली हिंसा में मारे गए लोगों को उचित मुआवज़ा देने, घायलों को तत्काल इलाज़ सुनिश्चित करने, हिंसा रोकने के लिए ठोस और उचित कदम उठाने समेत आठ मांग की गई हैं।

शांति मार्च के दौरान प्रदर्शन कारी भोपाल के नागरिकों ने कहा कि CAA-NPR-NRC के खिलाफ़ देश व प्रदेश में चल रहे सभी शांति पूर्ण प्रदर्शनों–धरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। साथ ही राष्ट्रीय जनगणना 2021 और एनपीआर को आपस में जोड़कर इसके लिए 8754 करोड़ आवंटित किया गया है, जबकि नागरिकता संशोधन कानून 2003 के अनुसार एनपीआर के आधार पर देशभर में एनआरसी लागू की जाएगी जो कि असंवैधानिक है। अतः तत्काल एनपीआर हेतु आवंटित किया गया अतिरिक्त 3941 करोड़ रुपए का आवंटन निरस्त किया जाए जो कि शासकीय संपत्ति और शासकीय कर्मचारियों का दुरुपयोग मात्र है। सभी प्रदर्शनकारियों ने देश भर में पुरजोर विरोध को देखते हुए CAA-NPR-NRC पर तत्काल रोक लगाने के पक्ष में एकजुटता दिखाई।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश व प्रदेश कि जनता पिछले चार महीनों से शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता अधिनियम में लाया गया संशोधन और देश भर की जनता को नागरिकता प्रमाणित करने का बंधन सरासर असंवैधानिक है। यह भारतीय संविधान की प्रस्तावना और मूल भावना के खिलाफ़ है। यह संविधान के आर्टिकल 14 व 15 सहित संविधान में वर्णित भाग-2 के नागरिकता संबंधी अनुच्छेद 5 से 10 तक के संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।

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वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली में महीनों से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों को हाल ही कुछ दिनों से उकसाकर सांप्रदायिक मोड़ दिया जा रहा है। पिछले तीन दिनों से सीएए समर्थकों द्वारा दिल्ली में जो उत्पात, तोड़फोड़, आगजनी और हत्याएं की गयी हैं किसी से छुपा नहीं है। जिसमें अब तक 20 लोगों कि जान जा चुकी है, सैकड़ों घायल हैं, बेहिसाब संपत्ति का नुकसान हुआ है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा जैसे विकृत और सांप्रदायिक लोगों द्वारा सीएए के समर्थन के लिए हिंदुवादी संगठनों का आह्वान किया गया, जिसका परिणाम हम सब के सामने है। ऐसा लग रहा है कि सीएए समर्थकों जिसमें बड़ी संख्या में आरएसएस, भाजपा और उसके अनुसांगिक संगठन जैसे बजरंग दल, एबीवीपी इत्यादि शामिल है, जो कानून को अपने हाथों में लेकर यह अंजाम दे रहे हैं, वही दिल्ली पुलिस मूकदर्शक बन तमाशबीन बनी हुई है। खुलेआम असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध अस्त्र शस्त्रों का उपयोग करते हुए CAA-NPR-NRC के खिलाफ़ महीनों से बैठे हुये शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा हमले किए जा रहे है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि दिल्ली पुलिस अपनी तमाम कानूनी और संवैधानिक जिम्मेदारियों भूलकर, शांति बहाली का ढोंग करते हुए CAA समर्थकों का साथ दे रही है। दिल्ली पुलिस शांति पूर्ण विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों कि रक्षा करने के बजाय द्वेषपूर्ण भावना रखते हुये हमलावर नियत से CAA-NPR-NRC विरोधियों पर एकतरफा कार्यवाई कर रही है।

कहा गया कि मीडिया में प्रकाशित खबरों और सोशल मीडिया में आए वीडियो इत्यादि से साफ जाहिर है कि दिल्ली पुलिस की हिंसात्मक गतिविधियों में संलिप्तता है। यह सब राज्य प्रायोजित हिंसा की तरह प्रतीत हो रहा है।

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