भाजपा की बी टीम कहलाने के सुयोग्य अधिकारी हैं केजरीवाल!

भाजपा की बी टीम कहलाने के सुयोग्य अधिकारी हैं केजरीवाल!

Kejriwal deserves to be called BJP’s B team!

किसके साथ हैं केजरीवाल, पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है?

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में अवैध निर्माण तोड़ने के काम (Demolition of illegal construction in Delhi’s Jahangirpuri area) पर रोक लगा दी है। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है और अब इस मामले में दो हफ्ते बाद सुनवाई होगी। यानी बुलडोजर का शोर अभी शांत रहेगा, लेकिन इस कार्रवाई से जो सियासी हलचल दिखनी शुरु हो गई है, वो लंबे वक्त तक जारी रहेगी, ऐसा नजर आ रहा है।

जनता को उसका हक दिलाने के लिए कैसे नेता चाहिए?

बुधवार को कार्रवाई के वक्त ही माकपा नेता वृंदा करात ने बुलडोजर के सामने जाकर कार्रवाई रोकने की मांग करते हुए जो हिम्मत दिखाई, उसकी प्रशंसा कई संवेदनशील और जागरुक नागरिक कर रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि जनता को उसका हक दिलाने के लिए उसके साथ इसी तरह खड़े होने वाले जननेता चाहिए।

गुरुवार को कांग्रेस के एक दल ने भी जहांगीरपुरी का दौरा किया, हालांकि पुलिस ने उन्हें अंदर गली में जाने से रोक दिया। इस बीच कुछ कांग्रेसियों ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी के घर के बाहर प्रदर्शन किया, जिस पर उन्हें हिरासत में लिया गया। एआईएमआईएम के असद्दुदीन ओवैसी भी इस मामले में लगातार भाजपा को अपने निशाने पर ले ही रहे हैं। समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को जहांगीरपुरी जाने वाला है।

जबकि बसपा की मुखिया मायावती ने कई ट्वीट्स के जरिए बुलडोजर की कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने लिखा कि सरकार को उन अधिकारियों के विरुद्ध भी सख्ती करनी चाहिए जिनके भ्रष्टाचार की वजह से ही अवैध निर्माण हो रहे हैं। मायावती के ट्वीट्स पर कुछ लोगों ने उन्हें सलाह भी दी है कि वे ट्विटर की दुनिया से निकल कर लोगों के बीच जाना शुरु करें।

अरविंद केजरीवाल का हैरान करने वाला रवैया : सरेआम हिंदुत्व की राजनीति?

बहरहाल, जिस तरह से तमाम दल इस प्रकरण पर भाजपा के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उससे पता चलता है कि आने वाले चुनावों में जहांगीरपुरी और बुलडोजर का मुद्दा (Jahangirpuri and bulldozer issue) विपक्षी दल भाजपा को घेरने के लिए उठाएंगे। मगर इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी के नेताओं का जो रवैया है, वो हैरान करने वाला नहीं, बल्कि निराश करने वाला है। आम आदमी पार्टी गरीबों और पीड़ितों के हक की राजनीति के नाम पर ही बनाई गई थी। दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह घूम-घूम कर बिजली कनेक्शन जोड़े, पानी, शिक्षा और इलाज गरीबों के लिए मुहैया कराने का वादा किया, उस पर दिल्ली के मतदाताओं ने भरपूर प्रतिदान उन्हें दिया। स्पष्ट बहुमत के साथ उनकी सरकार बनवाई, मगर अब आम आदमी की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल सरेआम हिंदुत्व की राजनीति को बढ़ावा देते नजर आ रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल भाजपा की बी टीम कहलाने के सुयोग्य अधिकारी हैं, यह बात उनके बयानों से जाहिर हो जाती है। पिछले छह दिनों में जहांगीरपुरी में सांप्रदायिक फसाद से लेकर बुलडोजर का आतंक सब जनता ने भुगत लिया, लेकिन श्री केजरीवाल एक बार भी पीड़ितों के साथ खड़े नहीं दिखे।

16 अप्रैल को जब हनुमान जयंती की शोभायात्रा में अनावश्यक झगड़ा खड़ा किया गया, तब दिल्ली के मुख्यमंत्री सुंदर कांड का कार्यक्रम देख रहे थे। वहां से निकलते ही उन्होंने कार्यक्रम की तारीफ करने के साथ ट्वीट किया कि अब दिल्ली में जगह-जगह सुंदरकांड का मंचन कराएंगे। जबकि हिंसा की निंदा करते हुए उनका ट्वीट था कि जो भी दोषी हों उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सभी लोगों से अपील- एक दूसरे का हाथ पकड़कर शांति बनाए रखें। क्या एक निर्वाचित मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा की जा सकती है कि वो केवल एक ट्वीट से दुख का इजहार करे।

आप नेताओं के सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाले बयान

जहांगीरपुरी मामले में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाले बयान भी अब आम आदमी पार्टी के नेताओं से आ रहे हैं। जिस तरह भाजपा बांग्लादेशी औऱ रोहिंग्या मुसलमानों पर अक्सर उंगली उठाती है, लगभग वैसे ही आप विधायक आतिशी सिंह ने जहांगीरपुरी मामले में ट्वीट में कहा कि अमित शाह के घर और भाजपा मुख्यालय पर बुलडोजर चलना चाहिए। भाजपा ने दंगे करवाने के लिए देशभर में बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को बसाया है। भाजपा सूची दे, किसे कहा बसाया है? इससे पता चल जाएगा- अगले दंगे भाजपा कहां करवाने जा रही है।

आप के निशाने पर भी अल्पसंख्यक

इस तरह की बेतुकी बातों से साफ पता चलता है कि आप विधायक भाजपा की निंदा जुबानी जमाखर्च के लिए कर रहे हैं। मगर जिस तरह भाजपा के निशाने पर अल्पसंख्यक हैं, वही आप का भी निशाना है।

दंगों के लिए शरणार्थियों को जिम्मेदार ठहराना ओछी राजनीति

दुनिया भर में पीड़ितों को शरण देने की परंपरा है और अगर भारत में बांग्लादेश या म्यांमार के पीड़ित शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं, तो उन्हें दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराना साफ तौर पर ओछी राजनीति है। साथ ही यह अल्पसंख्यकों के खिलाफ समाज को उकसाने वाली कार्रवाई भी है, जिस पर तुरंत संज्ञान लिया जाना चाहिए।

श्री केजरीवाल या उनके पार्टी विधायकों को ये बताना चाहिए कि वे बुलडोजर की कार्रवाई के खिलाफ हैं या नहीं? तभी उनका पक्ष जनता को समझ आएगा। केवल भाजपा की निंदा करने से ईमानदार राजनीति नहीं होगी।

(देशबन्धु का 22 अप्रैल का संपादकीय किंचित् संपादन के साथ साभार)

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