केरल सरकार सीएए के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय पहुंची

Kerala government reaches Supreme Court against CAA.

Kerala government challenges Citizenship Amendment Act in Supreme Court. Ist state to do so.

नई दिल्ली, 14 जनवरी 2020. केरल विधानसभा द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव पारित (Kerala Legislative Assembly passes resolution against Citizenship Amendment Act (CAA)) किए जाने के बाद, राज्य सरकार ने संशोधित कानून को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। केरल ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है।

गौरतलब है कि सीएए के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

Petitions against CAA in Supreme Court

सर्वोच्च न्यायालय में सीएए के खिलाफ पहले से 60 याचिकाएं दायर हैं और इस मामले की सुनवाई 22 जनवरी को होनी है।

याचिका में वाम मोर्चा की अगुवाई वाली केरल सरकार ने कहा कि नया कानून संविधान के कई अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है, जिसमें समानता का अधिकार शामिल है और कहा कि यह कानून संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2015 में पासपोर्ट कानून और विदेशियों (संशोधन) आदेश में किए गए परिवर्तनों की वैधता को भी चुनौती दी है।

इस कानून में हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी समुदायों के प्रवासियों को नागरिकता देने का प्रावधान है। इस कानून के तहत 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले तीन देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी, बशर्ते वे मुस्लिम न हों।

प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे और जस्टिस बी.आर. गवई और सूर्यकांत की पीठ ने 18 दिसंबर, 2019 को इस कानून को लागू किए जाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और मामले की आगे की सुनवाई जनवरी में किया जाना तय किया था। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत द्वारा 22 जनवरी को सभी मामलों की एक साथ सुनवाई की जाएगी।

केरल सरकार ने कहा कि सीएए संविधान का उल्लंघन करता है और भारत के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की जड़ पर हमला करता है।

सीएए के खिलाफ राज्य विधानसभा द्वारा पारित हालिया प्रस्ताव को याचिका के साथ संलग्न किया गया है।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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