50 वर्ष से ऊपर के लोग प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए हर साल कराएं पीएसए टेस्ट : प्रोफेसर डॉ पी बी सिंह

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किडनी फेलियर से बचने के लिए सही समय पर जांच एवं परामर्श जरूरी : डॉक्टर विद्यानंद

साइलेंट स्टोन आपकी किडनी के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक : डॉ कुलदीप अग्रवाल

गाजियाबाद, 16 फरवरी 2020. यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी गाजियाबाद में रविवार को किडनी रोगों के मरीजों के लिए एक विशाल निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। कैंप में यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी के वरिष्ठ किडनी प्रत्यारोपण सर्जन एवं यूरोलॉजिस्ट (Senior Kidney Transplant Surgeon and Urologist) प्रोफेसर डॉ पी बी सिंह, वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर कुलदीप अग्रवाल एवं वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर विद्यानंद ने मरीजों को निशुल्क परामर्श दिया एवं जागरूकता व्याख्यान के माध्यम से गुर्दे की बीमारियों, मूत्र रोगों की बीमारियों, प्रोस्टेट की समस्या (Kidney diseases, urinary tract diseases, prostate problem,) एवं किडनी प्रत्यारोपण से जुड़े सवालों का भी जवाब दिया।

इस शिविर में एवं जागरूकता व्याख्यान में 100 से भी ज्यादा लोगों ने भाग लिया।

प्रोस्टेट के लिए खून की जांच : blood test for prostate cancer

डॉक्टर बी पी सिंह ने 50 वर्ष से ऊपर लोगों को जागरूक करते हुए कहा के 50 वर्ष की उम्र पार करते ही हर साल एक बहुत ही सामान्य खून की जांच जिसे प्रोस्टेट एंटीजन या पीएसए टेस्ट (Prostate Antigen or PSA Test) कहते हैं उसे जरूर कराना चाहिए।

Prostate cancer symptoms and treatment

डॉक्टर बी पी सिंह ने कहा इसे हेतु लोगों में अवेयरनेस बहुत जरूरी है हम बाजार में जाकर उल्टी-सीधी चीजों में बहुत सारा धन खर्च कर देते हैं किंतु अपने शरीर के ऊपर ध्यान नहीं रखते। उन्होंने कहा इस सिंपल टेस्ट के जरिए से प्रोस्टेट कैंसर को सही समय पर पकड़ा जा सकता है और उसकी रोकथाम की जा सकती है।

Treatment of prostate cancer

डॉक्टर बी पी सिंह ने कहा कि प्रोस्टेट कैंसर का उपचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह बड़ी उम्र के लोग यदि रात में बार-बार उठ करके फिर तो यह कोई सामान्य बात नहीं है यह एक बीमारी है इसे तुरंत डॉक्टर का परामर्श जरूर लेना चाहिए। महिलाओं में भी विशेषकर जब माहवारी रुक जाती है उसके बाद उनसे पेशाब रोकी नहीं जाती और उन्हें बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता है तो यह बीमारी है इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी में पिछले दो वर्षों में हम किडनी ट्रांसप्लांट के काफी सफल ऑपरेशन कर चुके हैं और इस कार्यक्रम को हम सफलतापूर्वक चला रहे हैं।

किडनी का काम क्या है What is kidney function

वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट (Senior nephrologist) डॉ विद्यानंद ने बताया कि किडनी का काम हमारे ब्लड से अपशिष्ट पदार्थों को छानना होता है। यदि किडनी खराब हो जाए तो यह अपशिष्ट पदार्थ, टॉक्सिन या विषैले पदार्थ, अतिरिक्त पानी हमारी किडनी एवं शरीर में ही जमा होने लगते है।

डॉ. विद्यानंद ने कहा कि किडनी के मामलों में ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत होती है क्योंकि हमें जन्म से दो कितनी मिलती हैं और यदि एक किडनी खराब हो जाती है तो दूसरी किडनी ज्यादा काम करने लगती है और हमें लक्षण पता नहीं चलते, ऐसे में हमें समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट और डॉक्टर की परामर्श लेकर यदि कोई भी हमें लक्षण दिखाई देते हैं तो सलाह लेते रहनी चाहिए अन्यथा ज्यादातर लोग जब दोनों किडनी खराब हो जाती हैं तभी डॉक्टर के पास पहुंच पाते हैं और ऐसे मामलों में या तो किडनी प्रत्यारोपण करना पड़ता है या डायलिसिस करना पड़ता है

वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर कुलदीप अग्रवाल ने किडनी में होने वाले स्टोन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हमारे किडनी में कई बार छोटे स्टोन होते हैं और वह कभी-कभी अपने आप भी निकल जाते हैं, किंतु खतरनाक तब हो जाता है जब हम देसी दवाइयों या घरेलू नुस्खों के चक्कर में पड़ जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सबसे खतरनाक होता है साइलेंट स्टोन जिसका मतलब यह होता है कि कभी एक बार स्टोन था उसका दर्द हुआ और दोबारा फिर कभी दर्द नहीं हुआ। डॉक्टर कुलदीप बताते हैं कि ऐसे में लोग समझते हैं कि उनका स्टोन निकल गया है लेकिन बहुत सारे मामलों में ऐसा देखा गया है कि वह स्टोन किडनी में से निकल कर के कहीं और जाकर फंस जाता है और किडनी के अंदर सूजन आने शुरू हो जाती है और किडनी के नेफ्रोंस नष्ट होने लगते हैं और ऐसे में जन्म से मिली दूसरी किडनी ज्यादा काम करने लगती है जिसके फलस्वरूप थोड़े समय बाद दूसरी किडनी भी खराब हो जाती है। ऐसे में लोग किडनी फेलियर (दोनों किडनी का काम करना बंद कर देना) के मरीज बनकर डॉक्टर के पास आते हैं और ऐसे में गुर्दा प्रत्यारोपण अथवा डायलिसिस ही कराना पड़ता है।

डॉ कुलदीप ने कहा कि अगर सही समय पर स्टोन को हम पकड़ ले तो उसे हमारे शरीर के किसी भी अंग पर बिना किसी नुकसान पहुंचाए लेजर पद्धति से तोड़कर निकाला जा सकता है। साथ ही उन्होंने बताया कि उत्तर भारत का उच्चतम वाट एनर्जी का थूलियम लेजर यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी में उपलब्ध है और हम इससे काफी मरीजों को ठीक कर रहे हैं।

डॉक्टरों ने जागरूकता और किडनी के सफल बचाव के ऊपर बहुत जोर दिया

ऐसे लोग जिन्होंने अपनी किडनी दूसरों को दान कर दी थी उन्होंने भी सवाल जवाब कर डॉक्टरों से अपनी समस्याओं का हल जाना.

कैंप का संचालन हॉस्पिटल के गौरव पांडे, प्रतिम गून, राहुल साहनी, अनुपम, संजीव कुमार, अंकित राज, मनीष रावत, नितिन भारद्वाज ने किया।

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