Home » Latest » किसान आंदोलन को मिला देश भर के बिजली इंजीनियरों का साथ
Farmers Protest

किसान आंदोलन को मिला देश भर के बिजली इंजीनियरों का साथ

Kisan agitation got support from electricity engineers across the country

कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 की वापसी की मांग हेतु आंदोलन कर रहे किसानों को बिजली इंजीनियरों ने समर्थन दिया

Power engineers supported the agitating farmers demanding the withdrawal of the Agricultural Laws and Electricity (Amendment) Bill 2020

 लखनऊ, 03 दिसंबर 2020. ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 की वापसी की मांग हेतु पिछले 7 दिनों से संघर्षरत किसानों को समर्थन देने का निर्णय लिया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने आज यहां बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 का ड्राफ्ट जारी होते ही बिजली इंजीनियरों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। इस बिल में इस बात का प्रावधान है कि किसानों को बिजली टैरिफ में मिल रही सब्सिडी समाप्त कर दी जाए और बिजली की लागत से कम मूल्य पर किसानों सहित किसी भी उपभोक्ता को बिजली न दी जाए।

     यद्यपि बिल में इस बात का प्रावधान किया गया है कि सरकार चाहे तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए किसानों को सब्सिडी दे सकती है किंतु इसके पहले किसानों को बिजली बिल का पूरा भुगतान करना पड़ेग, जो सभी किसानों के लिए संभव नहीं होगा।

     उन्होंने बताया कि किसान संयुक्त मोर्चा के आवाहन पर चल रहे आंदोलन में कृषि कानूनों की वापसी के साथ किसानों की यह एक प्रमुख मांग है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 वापस लिया जाए। किसानों का मानना है की इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के जरिए बिजली का निजीकरण करने की योजना है जिससे बिजली निजी घरानों के पास चली जाएगी और निजी क्षेत्र मुनाफे के लिए काम करते हैं अतः बिजली की दरें किसानों की पहुंच से दूर हो जाएंगी।

      ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इस सवाल पर किसान आंदोलन (Farmers Protest) का समर्थन करते हुए कहा है कि किसानों की आशंका निराधार नहीं है इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के लिए जारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट बिजली के निजीकरण के उद्देश्य से लाए गए हैं ऐसे में सब्सिडी समाप्त हो जाने पर बिजली की दरें 10 से 12 रु प्रति यूनिट हो जाएगी और किसानों को 8 से 10 हजार रु प्रति माह का न्यूनतम भुगतान करना पड़ेगा।

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

headlines breaking news

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 03 जुलाई 2022 की खास खबर

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस | दिन भर की खबर | आज की …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.