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इस गणतंत्र दिवस पर जानें, कौन है भारतीय संविधान का रक्षक?

Know on this Republic Day, who is the protector of the Indian Constitution?

हर साल 26 जनवरी भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल हम अपना 73वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं।

इतिहास के पन्नों में झांक कर देखें तो साल 1947 में जब देश को ब्रिट‍िश राज से स्‍वतंत्रता मिली तब उसके पास अपना कोई संविधान नहीं था।

26 जनवरी 1950 को भारत को अपना संविधान मिला और भारत एक संप्रभु राज्‍य बन गया, जिसे गणतंत्र घोष‍ित किया गया।

डॉ बीआर अंबेडकर ने संविधान की मसौदा समिति (constitution drafting committee) की अध्यक्षता की थी।

जानिए क्या होता है संविधान (Know what is constitution) ?

विकिपीडिया को पढ़ें तो समझ में आता है कि संविधान ( ‘सम्’ + ‘विधान’ ), मूल सिद्धान्तों का एक समुच्चय है, जिससे कोई राज्य या अन्य संगठन अभिशासित होते हैं।

संविधान किसी संस्था को प्रचालित करने के लिये बनाया हुआ दस्तावेज है। यह प्रायः लिखित रूप में होता है। यह वह विधि है जो किसी राष्ट्र के शासन का आधार है, उसके चरित्र, संगठन, को निर्धारित करती है तथा उसके प्रयोग विधि को बताती है।

यह राष्ट्र की परम विधि है तथा विशेष वैधानिक स्थिति का उपभोग करती है ।

यह भी पढ़ें – जानिए मौलिक अधिकार क्या हैं

सभी प्रचलित कानूनों को अनिवार्य रूप से संविधान की भावना के अनुरूप होना चाहिए, यदि वे इसका उल्लंघन करेंगे तो वे असंवैधानिक घोषित कर दिए जाते है।

भारत का संविधान (The constitution of India) विश्व के किसी भी सम्प्रभु देश का सबसे लम्बा लिखित संविधान है।

भारत में कौन है संविधान का रक्षक

भारत के उच्चतम न्यायालय को संविधान का रक्षक कहा जाता है तथा समय-समय पर उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान की रक्षा की गई है। संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से ही उच्चतम न्यायालय को इतना महत्व और इतनी शक्तियां दी गई हैं।

संविधान के अनुच्छेद 124 (Article 124 of the Constitution) के अंतर्गत भारत के उच्चतम न्यायालय के स्थापना का उपबंध किया गया है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) द्वारा दिए गए कुछ ऐसे निर्णय, जिन्होंने संविधान की रक्षा की

यूनियन ऑफ इंडिया बनाम एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (Union of India Vs Association for Democratic Reforms) – सार्वजनिक पदाधिकारियों और पद के उम्मीदवारों के बारे में जानने का अधिकार। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के तहत सार्वजनिक पदों के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के बारे में जानने का अधिकार भी शामिल है।

न्यायमूर्ति केएस पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ (Justice KS Puttaswamy (Retd.) Vs Union of India) – क्या निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है? इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से भारत के संविधान के भाग 3 के अनुसार एक मौलिक अधिकार के रूप में निजता का अधिकार माना।

बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामला (Bijoe Emmanuel vs state of Kerala in Hindi)

क्या बच्चों को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करना उनके धर्म के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है? बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में अनुच्छेद 19 के तहत मौन का अधिकार मौलिक अधिकार का हिस्सा है

क्या संवैधानिक शिक्षा अनिवार्य होना चाहिए (क्या संवैधानिक शिक्षा अनिवार्य होना चाहिए?)

संविधान से राष्ट्र को ऊर्जा मिलती है और इस समय हमारे गणतंत्र के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती संवैधानिक निरक्षरता के रूप में सामने आई है।

संविधान के बारे में जानकारी क्यों है जरूरी? Why is it important to know about the Constitution of India?

संवैधानिक निरक्षरता के कारण ही लोग अपने अधिकारों की बातें तो करते है लेकिन नागरिक कर्तव्यों की बातें नहीं होतीं।

अगर संविधान के बारे में जानकारी नहीं होगी तो उसके अनुदेशों का पालन होना भी मुश्किल है इसलिए यह जरूरी है कि देश में संवैधानिक शिक्षा अनिवार्य हो।

हिमांशु जोशी,

उत्तराखंड।

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