जानिए भारत में पशुओं के कानूनी अधिकार क्या हैं

animal rights in india

Know what are the legal rights of animals in India

क्या आप जीव-जंतु के इन पन्द्रह अधिकारों के बारे में जानते हैं? | Do you know about these fifteen rights of animals?

क्या आप जानते हैं कि भारत में सिर्फ मानवाधिकार ही नहीं हैं, बल्कि पशुओं के कानूनी अधिकार भी हैं? हालाँकि ऐसे समय में जब सत्ता समर्थक लोगों को मानवाधिकार भी फिजूल लगते हों, तब हमें जानना चाहिए कि पशुओं को कौन से कानूनी अधिकार (essay on animal rights in india) प्राप्त हैं।

भारतीय कानून में पशुओं की हिफाजत के लिए कम से कम 15 कानून हैं। (Indian law has at least 15 laws to protect animals.) एक नजर इन नियमों पर…

हर नागरिक का कर्तव्य : Duty of every citizen

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 (ए) के मुताबिक हर जीवित प्राणी के प्रति सहानुभूति रखना भारत के हर नागरिक का मूल कर्तव्य है।

मांस को लेकर निर्देश : Meat instructions

कोई भी पशु (मुर्गी समेत) सिर्फ बूचड़खाने में ही काटा जाएगा। बीमार और गर्भ धारण कर चुके पशु को मारा नहीं जाएगा। प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी ऑन एनिमल्स एक्ट (Prevention of Cruelty on Animals Act) और फूड सेफ्टी रेगुलेशन (Food safety regulation) में इस बात पर स्पष्ट नियम हैं।

पशुओं पर पशुता न करें : Do not beast on animals

भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक किसी पशु को मारना या अपंग करना, भले ही वह आवारा क्यों न हो, दंडनीय अपराध है।

-पशु को आवारा बनाना :

प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी ऑन एनिमल्स एक्ट (पीसीए) 1960 के मुताबिक किसी पशु को आवारा छोड़ने पर तीन महीने की सजा हो सकती है।

बंदर पालना : Monkey cradle

वाइल्डलाइफ एक्ट के तहत बंदरों को कानूनी सुरक्षा (Legal protection to monkeys under the Wildlife Act) दी गई है। कानून कहता है कि बंदरों से नुमाइश करवाना या उन्हें कैद में रखना गैरकानूनी है।

एंटी बर्थ कंट्रोल (2001) डॉग्स रूल : Anti Birth Control (2001) Dogs Rule

इस नियम के तहत कुत्तों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। पालतू और आवारा। कोई भी व्यक्ति या स्थानीय प्रशासन पशु कल्याण संस्था के सहयोग से आवारा कुत्तों का बर्थ कंट्रोल ऑपरेशन कर सकती है। उन्हें मारना गैरकानूनी है।

पशुओं की देखभाल : Animal Care

जानवर को पर्याप्त भोजन, पानी, शरण देने से इनकार करना और लंबे समय तक बांधे रखना दंडनीय अपराध है। इसके लिए जुर्माना या तीन महीने की सजा या फिर दोनों हो सकते हैं।

-पशुओं को लड़ाना : पशुओं को लड़ने के लिए भड़काना, ऐसी लड़ाई का आयोजन करना या उसमें हिस्सा लेना संज्ञेय अपराध है।

एनिमल टेस्टिंग : Animal testing

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक रूल्स 1945 (Drugs and Cosmetics Rules, 1945) के मुताबिक जानवरों पर कॉस्मेटिक्स का परीक्षण करना और जानवरों पर टेस्ट किये जा चुके कॉस्मेटिक्स का आयात करना प्रतिबंधित है।

-बलि पर बैन : स्लॉटरहाउस रूल्स 2001 (prevention of cruelty to animals slaughterhouse rules 2001,) के मुताबिक देश के किसी भी हिस्से में पशु बलि देना गैरकानूनी है

चिड़ियाघर का नियम : Zoo rule

चिड़ियाघर और उसके परिसर में जानवरों को चिढ़ाना, खाना देना या तंग करना दंडनीय अपराध है। पीसीए के तहत ऐसा करने वाले को तीन साल की सजा, 25 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

पशुओं का परिवहन (पशु परिवहन अधिनियम) : Transport of animals (Animal Transport Act)

पशुओं को असुविधा में रखकर, दर्द पहुंचाकर या परेशान करते हुए किसी भी गाड़ी में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मोटर व्हीकल एक्ट और पीसीए एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है।

-कोई तमाशा नहीं :

पीसीए एक्ट के सेक्शन 22(2) के मुताबिक भालू, बंदर, बाघ, तेंदुए, शेर और बैल को मनोरंजन के लिए ट्रेन करना और इस्तेमाल करना गैरकानूनी है।

-घोंसले की रक्षा :

पंछी या सरीसृप के अंडों को नष्ट करना या उनसे छेड़छाड़ करना या फिर उनके घोंसले वाले पेड़ को काटना या काटने की कोशिश करना शिकार कहलाएगा। इसके दोषी को सात साल की सजा या 25 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

-जंगली जानवरों को कैद करना :

किसी भी जंगली जानवर को पकड़ना, फंसाना, जहर देना या लालच देना दंडनीय अपराध है। इसके दोषी को सात साल की सजा या 25 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

स्रोत – देशबन्धु

Topics –  भारत, पशु, वन्य जीवन, अधिकार, कानून, एनिमल प्रोटेक्शन,

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