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Corona virus

जानिए आखिर क्या है भीलवाड़ा मॉडल

Know what is the Bhilwara model

अगर हम सभी इस मैनिपुलेशन, झूठ, बेईमानी और भ्रष्ट व छद्म आचरण को छोड़ सकते तो कितना बेहतर हो? पर नहीं, सबको अपना ही सब कुछ ठीक लगता है और दूसरे का गलत।

यह सोचने की बात है कि दिक्कत तब बढ़ जाएगी जब आप अपने अड़ियल रवैये को अपनाते हुए किसी अच्छे प्रोजेट को स्वीकार न करें। जब यह कुटैव सामाजिक रूप से विस्तृत हो जाती है और फिर एक पूरा समाज ही अपने से भिन्न लोगों को खारिज़ करने, उनको गलत तरीके से लेबल करने और अपने हर तरह के धत-करम को उचित ठहराने लगता है।

ऐसा समाज स्वयं ढोंग, पाखंड और दिखावा करते हुए भी दूसरों से उत्तम आचरण व आदर्शों की अपेक्षा रखता है, जबकि ज्यादातर लोग व्यक्तिगत स्तर पर आचरण की शुद्धता और अपने कर्म-व्यवहार की सार्थकता सिद्ध करने में बहुत पीछे रह जाते हैं।

आज दिनांक 8 अप्रैल को भारत में कोरोना पीड़ित मरीजों की संख्या (Number of patients suffering from corona in India) 5 हज़ार से पार कर गई है, लेकिन अभी सरकार के पास इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए कोई ब्लूप्रिंट या कहें कोई श्वेत पत्र, नहीं है जिसको मानक मान कर सरकार अपनी रणनीति पर आगे बढ़ें।

इस वक्त सरकार की कमियों को उजागर करना गलत है, पर मानव जीवन भी अमूल्य है जिसके कारण उसके लिए नई रणनीति बनाकर देना भी हम जैसों का ही दायित्व है। धरातल पर कुछ होता नहीं दिख रहा है। इस बीच राजस्थान के एक शहर के नाम की चर्चा बहुत हो रही है जिसने कोरोना से लड़ने का भीलवाड़ा मॉडल (‘Bhilwara model’ of fighting Corona) तैयार किया है।

भीलवाड़ा कोरोना का मार्च महीने में सबसे बड़ा सेंटर था। वहाँ विदेश से आये एक डॉक्टर के संक्रमित होने की वजह से उनके संपर्क में आये 26 लोग पॉज़िटिव पाए गए थे। तत्काल कलेक्टर श्री राजेंद्र जी ने राज्य सरकार के निर्देश पर 20 मार्च से ही पूरे शहर में कर्फ्यू लगाकर बॉर्डर सील कर दिया। जिले की सीमाएं सील करते हुए 14 एंट्री पॉइंट्स पर चेक पोस्ट बनाईं, ताकि कोई भी शहर से न बाहर जा सके और न अंदर आ सके।

भीलवाड़ा में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया, इसमें रोडवेज बस से लेकर ऑटो-रिक्शा, टैक्सी सभी शामिल थीं।

Bhilwara became the first district in the country where media was also banned

भीलवाड़ा देश का पहला जिला बना जहाँ मीडिया को भी बैन किया गया।एनजीओ को भी बैन किया गया। कर्फ्यू पास भी रद्द किए गए। यहाँ तक कि जनप्रतिनिधियों को भी शहर में घुसने नहीं दिया, सिर्फ काम के पुलिस और प्रशासन के अधिकारी ही घुस पाए। भीलवाड़ा में कोरोना के आंकड़ों को 26 पर ही रोक दिया गया।

16 हजार स्वास्थ्य कर्मियों की टीम को एक साथ भीलवाड़ा भेजा गया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर स्क्रीनिंग शुरू कर दी। इस दौरान करीब 18 हजार लोगों में सर्दी-जुकाम के लक्षण पाए गए।

डॉक्टर से संक्रमण फैलने का पता चलते ही हॉस्पिटल का स्टॉफ, उनके परिवार वाले, जो मरीज हॉस्पिटल में आए थे, उनके परिजन सभी की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से शहर में करीब 11 हजार लोग संदिग्ध मिले। उनमें से करीब 6445 को उनके ही घरों में ही आइसोलेशन किया गया। पूरे शहर में फैले हुए संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए करीब 77 हजार घरों का तीन बार सर्वे किया गया।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक-एक घर में जाकर सभी लोगों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की। इसमें पहले चरण में छह हजार स्वास्थ्य टीमों ने 24 लाख लोगों की स्क्रीनिंग केवल 9 दिनों में पूरी की। जो अपने आप में एक मिसाल है।

इसके ही दूसरे चरण में 18 हजार लोगों का सर्वे के साथ ही सर्दी, जुखाम का इलाज किया गया। कोरोना संदिग्धों को भीलवाड़ा के थ्री स्टार होटल और रिजॉर्ट तक में रखा गया। कई जगह तो हर कमरे के लिए अलग गार्डन भी हैं। वहीं, घर में क्वारन्टाइन किए गए 6445 लोगों की ऐप से निगरानी की गई।

आज के दौर में डिजिटल दुनिया का सर्वोत्तम प्रयोग करके तथा कुछ के घर के बाहर पुलिस भी बैठाई गई।

Amit Singh ShivBhakt Nandi अमित सिंह शिवभक्त नंदी, कंप्यूटर साइन्स - इंजीनियर, सामाजिक-चिंतक हैं। दुर्बलतम की आवाज बनना और उनके लिए आजीवन संघर्षरत रहना ही अमित सिंह का परिचय है। हिंदी में अपने लेख लिखा करते हैं
Amit Singh ShivBhakt Nandi अमित सिंह शिवभक्त नंदी, कंप्यूटर साइन्स – इंजीनियर, सामाजिक-चिंतक हैं। दुर्बलतम की आवाज बनना और उनके लिए आजीवन संघर्षरत रहना ही अमित सिंह का परिचय है। हिंदी में अपने लेख लिखा करते हैं

इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी कलेक्टर श्री राजेंद्र जी ने खुद अपने हाथ में रखी। पीएम के द्वारा प्रायोजित टोटकों और  नौटंकी में शामिल होने वालों के लिए भी कलेक्टर ने कड़े नियम लागू किये थे। आप एक तरह से कह सकते हैं कि भीलवाड़ा में महाकर्फ्यू लागू है।

इसका परिणाम ये आया कि अब भीलवाड़ा 15 दिन में ही कोरोना मुक्त हो गया है। 26 पॉजिटिव लोगों में से 17 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। वहीं इसमें से 9 लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। दो की मौत हुई है। शेष लोग जल्द डिस्चार्ज किये जायेंगे।

लेकिन बाकी देश के जिलों को देखा जाए तो उनके जिला प्रशासन ने ये 15 दिन बर्बाद किये और सरकारी प्रायोजित ताली, थाली, और दिए जलाए गए पर मुख्य कोरोना महामारी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

जबकि भीलवाड़ा मॉडल का परिणाम सामने है। भीलवाड़ा मॉडल कोरोना से प्रभावित जिलों में अविलंब लागू करने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री जी को तत्काल प्रभाव से पूरे देश मे लागू करने के लिए जिला प्रशासन को बोलना चाहिए। और हम को भीलवाड़ा जिले के कलेक्टर श्री राजेन्द्र जी को सम्मान देना चाहिए।

अमित सिंह शिवभक्त नंदी

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