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‘तुम्हारी आवाज़ बहुत पतली है !’ कहकर लता मंगेशकर को पहले नकार दिया था बॉलीवुड ने

लता मंगेशकर : संपूर्ण जीवन परिचय | लता मंगेशकर जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindi

रहें ना रहें हम महका करेंगे…. ( सुमधुर स्वर कोकिला साम्राज्ञी लता मंगेशकर के निधन पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि- Teardropped tributes on the death of Lata Mangeshkar )

लता मंगेशकर का देहांत कब हुआ?

वर्ष 1929 के 28 सितम्बर को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में जन्म लेने वाली मूल रूप से गोवा के एक मंदिर में अपना जीवनयापन करने वाली एक देवदासी श्रीमती येशुबाई और उसी मंदिर के पुजारी श्री गणेश भट्ट नवाथे हर्डीकर की पड़पोती, एक मराठी पंडित दीनानाथ मंगेशकर और एक गुजराती माँ श्रीमती शेवंती देवी के घर जन्म लेने वाली, पिछले 79 वर्षों से इस देश की लगभग 4 पीढ़ियों के कानों में मधुरतम् संगीत से सजी अपनी सुमधुर, मिश्री की डलियों की तरह मीठी,गु लाब और रात की रानी के पुष्पों की मदहोश कर देनेवाली सुगंध से पागल कर देने वाली, हिन्दी, बंगला, तमिल, गुजराती, मराठी, भोजपुरी आदि 36 भाषा-भाषियों के सरजंमी को अपने रस से सराबोर कर देने वाली, 30000 रिकॉर्ड गीतों को गा देने वाली, बॉलीवुड द्वारा 1989 में उसका सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा 1969 में पद्मभूषण, 1999 में पद्मविभूषण तथा भारत के सर्वश्रेष्ठ भारत रत्न पुरस्कार (Bharat Ratna Award) से 2001 में नवाजी जाने वाली सुमधुर स्वर कोकिला साम्राज्ञी Lata Mangeshkar (लता मंगेशकर) की 06 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की उम्र में मुंबई के एक निजी अस्पताल ब्रीच कैंडी में प्रातःकाल 8.12 बजे ही सदा के लिए साँसें थम गईं !

इस देश के बहुत ही कम ही लोगों को यह मालूम होगा कि इस सदी की इस महानतम् गायिका लताजी ((28 सितंबर 1929 – 6 फ़रवरी 2022)) ने जब बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में एक प्लेबैक गायिका के रूप में प्रवेश किया, तब इनकी पतली सुमधुर आवाज़ को यह कहकर नकार दिया गया था कि ‘तुम्हारी आवाज़ बहुत पतली है !’

लता मंगेशकर का वो गीत जो कभी रिलीज नहीं हुआ

इसके अलावा वर्ष 1942 में इनके द्वारा गाए प्रथम गीत जिसे एक मराठी फिल्म ‘किट्टी हसल’ के लिए सदाशिवराव नेवरेकर ने संगीत दिया था, को कभी रिलीज ही नहीं किया गया।

लताजी ने एकल गीतों के साथ ही अपने समय के लगभग सभी बड़े गायकों यथा मुहम्मद रफी, मुकेश, किशोर कुमार, मन्ना डे आदि के साथ सुप्रसिद्ध संगीतकारों यथा अनिल बिश्वास, शंकर-जयकिशन, गुलाम मोहम्मद,  नौशाद, सचिन देव वर्मन आदि के निर्देशन में अपने गीतों को गाकर उन्हें अमर बना दिया।

लता मंगेशकर का गांव कौन सा है?

लताजी की दादी जी श्रीमती येशुबाई मूलरूप से गोवा राज्य के मंगेशी गाँव में स्थित एक मंदिर में एक देवदासी थीं। अब वर्तमानसमय में यह देवदासी समाज गोमांतक मराठा समाज के रूप में जाना जाता है,चूँकि इनके पिता दीनानाथ एक देवदासी के पुत्र थे,इसलिए इन्हें अपने पिता  पंडित गणेश भट्ट नवाथे हर्डीकर,जो उस मंदिर के पुजारी थे,का सरनेम हर्डीकर नहीं मिल सकता था। इसलिए दीनानाथ ने मजबूर होकर अपना सरनेम मंगेशकर रख लिया। दीनानाथ की पहली पत्नी श्रीमती नर्मदा का किसी कारणवश जल्दी ही निधन हो गया,इसलिए उन्होंने उनकी छोटी बहन शेवंती से शादी कर लिया,उन्हीं श्रीमती शेवंती देवी से उन्हें लता, आशा, मीना, उषा आदि 4 बेटियों और एक हृदयनाथ मंगेशकर नामक पुत्र का जन्म हुआ।

लता मंगेशकर का बचपन का नाम | लता मंगेशकर का असली नाम क्या है? | Childhood Name of Lata Mangeshkar | What is the real name of Lata Mangeshkar?

लता जी का बचपन का नाम हेमा रखा गया था,लेकिन इनके रंगकर्मी, अभिनेता व संगीतकार पिताजी द्वारा बाद में एक प्रतिभाशाली नाट्य अभिनेत्री लतिका के नाम पर लता कर दिया गया।

शुरूआत में लताजी के पिताजी इनकी विलक्षण प्रतिभा से अनजान थे, लेकिन एक दिन वे अपने एक नाटक में काम करने वाले एक कलाकार को शास्त्रीय संगीत के एक कठिन राग ‘राग पूरिया धनश्री’ सिखा रहे थे, लेकिन वह उस राग को जल्दी सीख नहीं पा रहा था, लेकिन वहीं आँगन में खेल रही नन्हीं सी बच्ची लता उस कठिन राग को अपने पिता को बड़ी ही तन्मयता और कुशलतापूर्वक सुना दी। कठिन राग में गाये गीत को सुनकर लताजी के पिताजी इनकी प्रतिभा के कायल हो गए और तभी से लताजी को भी विधिवत् शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देने लगे।

लेकिन अचानक लताजी के पिताजी का मात्र 41 वर्ष की उम्र में सन् 1942 में निधन हो गया। अचानक 13 वर्षीया लताजी पर अपने 4 अन्य छोटे बहनों और भाई के जीवन निर्वहन की जिम्मेदारी आ पड़ी, जिसे उन्होंने जीवनपर्यंत  ईमानदारी, कर्मठता, कुशलतापूर्वक खुद आजीवन अविवाहित और एकाकी जीवन जीकर निभाईं।

अपनी सभी बहनों और अपने इकलौते भाई के कैरियर को संवारने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया।

लताजी को अपने जीवन के शुरूआती दिनों में बहुत ही अपमान और मानसिक कष्ट भी सहना पड़ा था।

एक घटना में अपने समय के मशहूर अभिनेता और गायक जी एम दुर्रानी ने इनके सुमधुर गानों की प्रशंसा न करके इनके साधारण व सफेद कपड़ों पर फब्तियां कसते हुए यह कह दिया था कि ‘तुम रंगीन कपड़े क्यों नहीं पहनती, तुम कैसे सफेद कपड़े लपेटकर आती हो।’ इससे स्वाभिमानी लताजी तिलमिलाकर रह गईं और उन्होंने कठोरतम् प्रतिज्ञा किया कि ‘मेरे गीतों की एक शब्द तक प्रशंसा न करके मेरे पहनावे पर अभद्र टिप्पणी करनेवाले इस अशिष्ट व्यक्ति के साथ भविष्य में कभी गीत नहीं गाऊँगी।’ भविष्य में यह करके दिखा भी दिया। लेकिन लता जी को भविष्य में इस देश के करोड़ों-अरबों लोगों का असीमित प्यार-दुलार-स्नेह और सम्मान भी मिला। यथा तमिल फिल्मों के मशहूर अभिनेता और सुप्रसिद्ध अभिनेत्री रेखा के पिता श्री जेमिनी गणेशन लताजी को अपनी छोटी बहन मानते थे, वे उन्हें सर वर्ष दीपावली पर कपड़े और मिठाइयाँ भेजा करते थे। लताजी भी जब भी चेन्नई जातीं थीं, तब अपने प्यारे भैया जेमिनी गणेशन के घर पर ही रूकतीं थीं।

लता जी ने हिन्दी में राजेश खन्ना अभिनीत मशहूर फिल्म आनन्द के तमिल संस्करण में जिसमें जेमिनी गणेशन के एक बेटे ने अभिनय किया था, उस फिल्म में लताजी ने ‘अरारो-अरारो ‘ नामक तमिल भाषा में गीत गाया है।

कैसे थे लता मंगेशकर और दिलीप कुमार के संबंध ? | How was the relation of Lata Mangeshkar and Dilip Kumar?

बॉलीवुड में ट्रेजेडी किंग के नाम से प्रसिद्ध कालजयी अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar, the classic actor known as the tragedy king in Bollywood) भी लताजी को अपनी छोटी बहन सरीखा स्निग्ध और पवित्र प्यार देते थे। हर साल लता जी दिलीप कुमार के घर जाकर अपने प्रिय भैया को राखी बाँधतीं थीं। दिलीप कुमार को जब भी पता चलता था कि उनकी छोटी बहन लता उनके डर आ रही है, तब वे उनकी मनपसंद डिश जिसमें कोरमा, शाही कबाब और बिरयानी होतीं थीं, को विशेषरूप से बनवाते थे। लता जी भी अपने प्यारे भैया दिलीप को अपने हाथों से खाना खिलाना बहुत पसंद करतीं थीं।

लताजी और दिलीप कुमार के संबंधों में कितनी प्रगाढ़ता थी इस संबंध में एक उदाहरण देना चाहते हैं। वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध ‘रॉयल अल्बर्ट हॉल ‘ में खचाखच भरी सभा के एक अंतरराष्ट्रीय कंसर्ट के मौके पर दिलीप कुमार ने मंच से यह घोषणा करके कि ‘लता मेरी छोटी बहन मंच पर आओ। ‘ सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया था। मुंबई में अक्सर ये दोनों भाई-बहन ट्रेन में एक साथ ही अपने-अपने काम पर जाते थे।

लता मंगेशकर के निधन से एक युग का अंत हुआ

लताजी के जाने से एक युग का अंत हो गया है, अब सदियों तक लताजी द्वारा रिक्त किए गए स्थान की भरपाई करना नामुमकिन ही नहीं असंभव भी है।

लता मंगेशकर का गाया अंतिम गीत

लताजी का गाया उनका अंतिम गीत एक फिल्म ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की’ का है, जो भारतीय सेना के वीर जवानों को संबोधित किया गया है, यह गाना भी हर किसी को भावुक कर देता है।

लाल किले पर भूतपूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी के समक्ष गाए लताजी के गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी..जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी..’ पर जवाहर लाल नेहरू की आँखें भी छलक आईं थीं। निश्चित रूप से लताजी का नश्वर शरीर अब हमारे समक्ष इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उनके कोकिल कंठ से निकले, हृदयस्पर्शी और मधुरतम् गीत सदियों तक इस धरती पर रहने वाले संवेदनशील मनुष्यों के दिल को अपनी कोमल संगीत से तनाव से बोझिल उनके मस्तिष्क और हृदय को तरोताजा करते रहेंगें।

मुहम्मद रफी साहब द्वारा गाए उस कालातीत इस गीत कि,

‘तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे….!

हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे…!

जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे…..!

संग संग तुम भी गुनगुनाओगे….!

हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे…

हो तुम मुझे यूँ …..

अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि ।

-निर्मल कुमार शर्मा

‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पाखंड, अंधविश्वास, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ, निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन।

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