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लॉकडाउन का उल्लंघन भी पूर्णतः अनुचित एवं खतरनाक

Lockdown violations are also completely unfair and dangerous

भोपाल, 22 मई 2020. वरिष्ठ पत्रकार एल.एस. हरदेनिया ने कहा है कि लॉकडाउन का उल्लंघन भी पूर्णतः अनुचित एवं खतरनाक है।

उन्होंने कहा है कि कोरोना के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए देश में लॉकडाउन (Lockdown in the country to control the corona outbreak) लागू किया गया है। लॉकडाउन लगे हुए दो महीने पूरे होने वाले हैं। परंतु इस दरम्यान अनेक स्थानों पर लॉकडाउन के निर्देशों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ है। अनेक स्थानों पर हजारों लोग एकत्रित हो रहे हैं, ट्रकों, बसों और ट्रेनों में दूरी बनाए रखने के नियम की धज्जियां उड़ रही हैं, बड़ी संख्या में लोग बिना मास्क पहने खुले आम सड़कों पर घूम रहे हैं।

DadDaji’s funeral in Katni on 18 May 2020

श्री हरदेनिया ने कहा कि यद्यपि साधारण नागरिक द्वारा  नियमों का उल्लंघन भी पूर्णतः अनुचित है परंतु यदि शासकीय अधिकारी ऐसा करे तो वह तो अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आएगा। ऐसा दिनांक 18 मई 2020 को कटनी में हुआ। वहां दद्दाजी का अंतिम संस्कार किया गया। इसमें संदेह नहीं कि दद्दाजी के देहांत का समाचार सुनकर उनके अनगिनत श्रद्धालु शोकमग्न हो गए। इसमें भी कोई संदेह नहीं कि वे सब भारी संख्या में उनके अंतिम दर्शन करना चाहते थे। परंतु क्या लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन (Violation of lockdown rules) कर ऐसा करना उचित था?

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Personal reverence can never be above social and constitutional responsibility.

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान अंतिम संस्कार में कितने लोग शामिल हो सकते हैं (How many people can attend the funeral during the lockdown), इसकी संख्या तय है। परंतु  दद्दाजी के अंतिम संस्कार में इस निर्धारित संख्या से कई गुना ज्यादा लोग शामिल हुए। और इस नियम का उल्लंघन जिले के कलेक्टर, एसपी और विधायकों ने भी किया। यह संभव है कि अंतिम संस्कार में शामिल हुए कई लोग कोरोना से संक्रमित हों और इस तरह उन्होंने रोग को फैलाने में मदद की हो।

उन्होंने सवाल किया कि क्या कलेक्टर का उत्तरदायित्व नहीं था कि वे ऐसी व्यवस्था बनाते जिससे नियमों का उल्लंघन किया बिना लोग अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर पाते? चार-पांच की संख्या में दूरी बनाते हुए भी श्रद्धांजलि अर्पित की जा सकती थी। व्यक्तिगत श्रद्धा का स्थान सामाजिक और संवैधानिक उत्तरदायित्व से ऊपर कदापि नहीं हो सकता

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Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

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