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“लखनऊ एक सच” : विरोधाभासों से भरा एक शहर

“लखनऊ एक सच” : विरोधाभासों से भरा एक शहर

सर्वे “लखनऊ एक सच” में निकल कर आई कई चौंकाने वाली बातें

पुराना लखनऊ समेटे है तहज़ीब और अदब

लखनऊ, 18 जनवरी 2023. अदब और तहजीब के शहर लखनऊ के कई रूप हैं, जहां एक तरफ है लखनऊ का वह हिस्सा जहां अभी भी अदब और तहजीब पूरी तरह से दिखती है वही एक हिस्सा ऐसा भी है जिसे लखनऊ की संस्कृति से कोई लेना देना नहीं है।

यह बातें लेखक और निर्देशक विपिन अग्निहोत्री द्वारा किए गए सर्वे “लखनऊ एक सच” में निकल कर सामने आई हैं।

लगभग 1500 लोगों पर किए गए सर्वे में 746 पुरुष और 754 महिलाओं ने भाग लिया।

विपिन अग्निहोत्री के मुताबिक इस सर्वे को करने के लिए उन्होंने लखनऊ को तीन भागों में विभाजित किया। पहले भाग में उन्होंने पुराने लखनऊ को सम्मिलित किया, दूसरे भाग में गोमती नगर को तथा तीसरे भाग में आलमबाग और कृष्णा नगर के हिस्से को शामिल किया।

चौंकाने वाले रहे सर्वे “लखनऊ एक सच” के नतीजे

सर्वे के नतीजे बहुत ही चौंकाने वाले रहे। जहां पुराने लखनऊ तथा आलमबाग में रहने वाले 82 प्रतिशत लोग आज भी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि लखनऊ की विरासत को संभाला जाए वहीं दूसरी तरफ गोमती नगर में रहने वाले 60 प्रतिशत लोगों को इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता।

अपने पड़ोसी के साथ संवाद पसंद करते हैं पुराने शहर के वासी

एक और बात जो इस सर्वे में उभर कर सामने आई वह यह थी कि आज भी पुराने लखनऊ और आलमबाग क्षेत्र के 90 प्रतिशत लोग अपने पड़ोसी के साथ नियमित संवाद करना पसंद करते हैं वहीं दूसरी तरफ गोमती नगर क्षेत्र की बात करें तो सिर्फ 31 प्रतिशत लोग ही ऐसा करना पसंद करते हैं।

पहले जैसा नहीं रहा अब लखनऊ

विपिन अग्निहोत्री बताते हैं कि लखनऊ जैसे छोटे शहर में भी इस तरह का विरोधाभास होना यह बताता है कि लोगों की सोच में कितना अंतर हो सकता है और हमें इस बात को मानना ही होगा कि लखनऊ अब पहले जैसा नहीं रहा और यहां भी बड़े शहरों की भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल हावी हो रही है।

“Lucknow One Truth”: A City of Contrasts

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