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मुशर्ऱफ को फांसी और लाश घसीटने के आदेश के खिलाफ बड़ी अदालत में अपील करेगी पाकिस्तान सरकार

‘Mentally unfit, incompetent’: Imran Govt to move SJC against judge over Musharraf treason verdict

नई दिल्ली, 20 दिसंबर 2019. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल परवेज़ मुशर्रफ को फांसी की सजा पर पाकिस्तान में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। अभी तक न्यायपालिका और सेना के बीच जारी तनातनी पर कुछ कहने से बचती रही इमरान सरकार, जिसे बिलावल भुट्टो सेना की कठपुतली सरकार कहते रहे हैं, ने पहली बार अपना मुँह खोला है और ऐलान किया है कि पाकिस्तान सरकार विशेष अदालत के न्यायाधीश के न्यायमूर्ति वकार सेठ के खिलाफ, जिन्होंने अपने फैसले में कहा कि यदि फांसी से पहले जनरल (रिटा.) परवेज मुशर्रफ की प्राकृतिक मौत हो जाती है तो उनकी लाश को खींचा जाए और डी-चौक पर तीन दिनों तक लटका दिया जाए।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन न्यायाधीशों की विशेष अदालत, जिसमें न्यायमूर्ति नज़र अकबर और न्यायमूर्ति शाहिद करीम शामिल थे, ने पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह मामले में अपना विस्तृत फैसला सुनाया, के फैसले के कुछ घंटों बाद, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक इमरान सरकार के इस फैसले की जानकारी स्वयं कानून मंत्री फ़रग नसीम Law Minister Farogh Naseem ने एक संवाददाता सम्मेलन में दी।

पाकिस्तान के कानून मंत्री ने कहा कि न्यायमूर्ति सेठ ने “विचित्र आदेश” जारी करके “न्यायिक आचरण का उल्लंघन किया है” कि मुशर्रफ की लाश को तीन दिनों के लिए सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया जाए यदि वह फांसी की सजा के निष्पादन से पहले मर जाते हैं।

मंत्री ने कहा कि न्यायमूर्ति सेठ “मानसिक रूप से अयोग्य और अक्षम” थे, जो किसी भी अदालत के न्यायाधीश बनने के लिए लायक नहीं थे।

उन्होंने कहा कि सरकार ने एसजेसी से संपर्क करने का फैसला किया है, जिसमें यह दलील दी गई है कि “इस तरह के न्यायाधीश को किसी भी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश होने का कोई अधिकार नहीं है”।

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Musharraf sentenced to death under Article 6 of the Constitution of Pakistan

मंगलवार को, विशेष अदालत ने – न्यायमूर्ति वकार सेठ (Justice Waqar Seth) की अध्यक्षता में, जो पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (chief justice of the Peshawar High Court) भी हैं – 3 नवंबर, 2007 को पाकिस्तान के संविधान को रद्द करने और आपातकाल की घोषणा करने के लिए पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत मुशर्रफ को मृत्युदंड सजा सुनाई थी।

न्यायमूर्ति सेठ, जिन्होंने पूर्व सेना प्रमुख की “लाश” को “डी-चौक पर घसीटने” और “तीन दिनों के लिए फांसी पर लटकाने” का निर्णय सुनाया, पर टिप्पणी करते हुए इमरान सरकार के मंत्री ने कहा कि “मैं उस अधिकार को नहीं समझता जिसके तहत इस प्रकार का आदेश दिया गया था।” उन्होंने कहा “सार्वजनिक फांसी पाकिस्तान के संविधान और इस्लाम के खिलाफ है”।

जवाबदेही पर प्रधान मंत्री इमरान खान के विशेष सहायक शहजाद अकबर (Special Assistant to Prime Minister on Accountability Shehzad Akbar) ने कहा कि मुशर्रफ पर राजद्रोह का मुकदमा जल्दबाजी में संपन्न हुआ, जो अभूतपूर्व था। “फैसले में कानूनी खामियां” बहुत हैं और सरकार न्यायमूर्ति सेठ के खिलाफ न्यायिक संदर्भ दाखिल करने के अलावा विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करेगी।

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