Home » Latest » नदी अधिकार यात्रा का छठा दिन, मिर्ज़ापुर के मिसिरपुर घाट पहुंची यात्रा
nadi adhikar yatra नदी अधिकार यात्रा

नदी अधिकार यात्रा का छठा दिन, मिर्ज़ापुर के मिसिरपुर घाट पहुंची यात्रा

निषाद समाज ने चेहरा गांव में नदी अधिकार यात्रा का गाजे बाजे के साथ किया स्वागत

बालू निकालने का हक़ निषादों को दिया जाए : देवेंद्र निषाद

पूरे प्रदेश में निषाद समाज को एकजुट करेंगे, बसवार से बलिया तो शुरुआत है : देवेंद्र निषाद

निषाद समाज को नदियों के कछार में खेती करने का मिले अधिकार : मनोज यादव

मिर्ज़ापुर, 06 मार्च 2021। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पिछड़ा वर्ग की तरफ से निकाली गयी नदी अधिकार पद यात्रा आज प्रयागराज के मांडा से सुबह निकली।

प्रयागराज के बसवार से निकली यह यात्रा अबतक कुल 130 किलोमीटर चल चुकी है। मिर्ज़ापुर की सीमा में प्रवेश करते समय चेहरा गांव में निषाद समाज के लोगों ने गाजे बाजे के साथ पदयात्रा का स्वागत किया।

प्रदेश सचिव देवेन्द्र निषाद ने योगी सरकार से मांग करते हुए कहा कि योगी सरकार एनजीटी के नाम पर लगी रोक को तत्काल हटाए और बालू, मोरंग आदि पर निषाद समाज का पारंपरिक हक़ बहाल किया जाए।

उन्होंने देवरी गांव में निषाद समाज के साथ संवाद करते हुए कहा कि बसवार में जो निषाद विरोधी घटना हुई है वह योगी आदित्यनाथ  सरकार की सत्ता में ताबूत की आखिरी कील साबित होगी।

देवेंद्र निषाद ने कहा कि बसवार से बलिया तक यात्रा तो बस शुरुआत है, अब पूरे प्रदेश में निषाद समाज को योगी आदित्यनाथ की सरकार के खिलाफ एकजुट किया जाएगा।

पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि इस सरकार में अतिपिछड़ा समाज का बहुत उत्पीड़न हुआ है। तमाम भर्तियों में पिछड़े समाज को हक़ नहीं मिला। उनके ऊपर पुलिसिया उत्पीड़न हुआ।

मनोज यादव ने नदी अधिकार यात्रा की मांगों को दोहराते हुए कहा कि निषाद समाज को नदियों के कछार में खेती करने का अधिकार मिले।

पाठकों से अपील

“हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें

 

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

dr. bhimrao ambedkar

65 साल बाद भी जीवंत और प्रासंगिक बाबा साहब

Babasaheb still alive and relevant even after 65 years क्या सिर्फ दलितों के नेता थे …

Leave a Reply