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मोदीनगर नगर पालिका ने व्हिसल ब्लोअर की जान ही खतरे में डाल दी

मोदीनगर नगर पालिका ने अतिक्रमण मामले की शिकायतकर्ता की जान खतरे में डाली

Modinagar municipality put the whistle blower’s life in danger

मोदीनगर नगर पालिका और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने अवैध अतिक्रमण मामले की शिकायतकर्ता की ही जान को जोखिम में डालकर, सूचना प्रदाता (व्हिसल ब्लोअर) संरक्षण अधिनियम, 2014, की अवहेलना कर दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद, मोदीनगर ने रविवार 21 नवम्बर के दिन, लगभग 50 लोगों को अवैध रूप से कब्ज़ाई गई ज़मीन को खाली करने के निर्देश, नोटिस द्वारा भेजे। लेकिन इस नोटिस में नगर पालिका के अधिकारियों ने उस शिकायतकर्ता का भी नाम लिख दिया जिन्होंने ज़मीन के कब्ज़ा होने की शिकायत की थी और इसी के साथ शिकायतकर्ता की जान भी खतरे में डाल दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार फरवरी 2018 में, श्रीमती शाहीन ने मोदीनगर में अवैध अतिक्रमण के मामले को लेकर नगर पालिका परिषद से शिकायत करी थी।

उनका कहना था कि उनके इलाके के स्थानीय पार्षद ही ज़मीन हड़पने के पीछे थे। इस शिकायत को मद्देनजर रखते हुए, नगर पालिका ने इस मामले की जांच करने के लिए एक समिति का गठन किया। इसी समिति के सुझाव पर ही वे नोटिस भेजे गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस नोटिस में श्रीमती शाहीन का नाम होने के कारण, उनको और उनके पति श्री रिज़वी सहित पूरे परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं।

जानकारों के मुताबिक प्रदाता (व्हिसल ब्लोअर) संरक्षण अधिनियम, 2014, के अंतर्गत प्रदाता या व्हिसल ब्लोअर के पास अपनी पहचान गुप्त रखने का अधिकार है। इस अधिनियम के मुताबिक़, जो व्यक्ति लापरवाही से या दुर्भावना से शिकायतकर्ता की पहचान का खुलासा करता है, उसे 3 साल तक की कैद और ₹50,000 तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। अब ये देखने वाली बात होगी कि क्या अधिशासी अधिकारी और नगरपालिका अध्यक्ष को भी इस कानून के अंतर्गत कटघरे मे खड़ा किया जाता है या नहीं।

हमने इस मामले के संदर्भ में नगर पालिका तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से हमें कोई उत्तर नहीं मिला।

अनिकेत सिंह चौहान

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